खरसावां : वसुदेवं सुतं देवं, कंस चाणूर मर्दनम्, देवकी परमानंदं कृष्णं वंदे जगद्गुरु...” और “मंगलम् भगवान विष्णु, मंगलम् मधुसूदनम्, मंगलम् पुंडरी काख्य, मंगलम् गरुड़ ध्वज...” जैसे वैदिक मंत्रों के उच्चारण से खरसावां का राधा-माधव मंदिर भक्तिमय हो उठा. श्रावण शुक्ल दशमी के अवसर पर मंदिर में भगवान श्रीकृष्ण और राधा रानी की वार्षिक झूलन यात्रा पूरे विधि-विधान के साथ शुरू हुई. झूलन यात्रा को लेकर मंदिर में विशेष सजावट की गयी है. राधा-कृष्ण का आकर्षक श्रृंगार कर उन्हें पारंपरिक झूले पर विराजमान कराया गया.
श्रावण शुक्ल दशमी से लेकर श्रावण पूर्णिमा तक चलने वाली इस झूलन यात्रा के दौरान प्रतिदिन राधा-कृष्ण को झूला झुलाया जाएगा. इस दौरान मंदिर में विशेष पूजा-अर्चना, आरती और भोग की परंपरा निभायी जा रही है. झूलन यात्रा के शुभारंभ के अवसर पर बड़ी संख्या में श्रद्धालु मंदिर पहुंचे और राधा-कृष्ण के दर्शन कर सुख-समृद्धि की कामना की. पूजा-अर्चना के बाद भक्तों के बीच प्रसाद का वितरण भी किया गया.
सात दिनों तक चलेगा विशेष धार्मिक अनुष्ठान
मंदिर के पुजारी राधा चरण सतपथी ने बताया कि झूलन यात्रा के दौरान प्रत्येक दिन राधा-कृष्ण की अलग-अलग धार्मिक विधियों के साथ पूजा-अर्चना की जाएगी. भगवान को विशेष भोग लगाया जाएगा तथा आरती के बाद श्रद्धालुओं के बीच प्रसाद का वितरण किया जाएगा. उन्होंने बताया कि गोम्हा पूर्णिमा (बलराम जन्म) के दिन झूलन यात्रा का विधिवत समापन होगा. उन्होंने कहा कि खरसावां के राधा-माधव मंदिर में राजा-रजवाड़े के समय से धार्मिक परंपराओं के अनुरूप विभिन्न अनुष्ठान किये जाते रहे हैं. झूलन यात्रा भी इसी परंपरा का महत्वपूर्ण हिस्सा है. हर वर्ष श्रावण मास में श्रद्धा और भक्ति के साथ इसका आयोजन किया जाता है.
1937 में हुआ था राधा-माधव मंदिर का निर्माण
खरसावां का राधा-माधव मंदिर क्षेत्र के प्रमुख धार्मिक स्थलों में शामिल है. ओडिशा के क्योंझर राजघराने की महारानी मनोज मंजरी देवी ने वर्ष 1937 में अक्षय तृतीया के दिन खरसावां में राधा-माधव मंदिर की स्थापना करायी थी. स्थापना काल से ही मंदिर में विभिन्न धार्मिक अनुष्ठानों और पर्व-त्योहारों को परंपरागत तरीके से मनाया जाता रहा है.
भक्तों के लिये आस्था का केंद्र है खरसावां का राधा-माधव मंदिर
स्थानीय श्रद्धालुओं के अनुसार राधा-माधव मंदिर खरसावां सहित आसपास के क्षेत्र के लोगों की आस्था का प्रमुख केंद्र है. वर्षभर यहां श्रद्धालुओं का आना-जाना लगा रहता है. श्रावण मास में झूलन यात्रा के दौरान मंदिर का वातावरण विशेष रूप से भक्तिमय हो जाता है. झूले पर विराजमान राधा-कृष्ण के दर्शन के लिए श्रद्धालु परिवार के साथ मंदिर पहुंच रहे हैं. मंदिर परिसर में होने वाले भजन, पूजा और आरती से पूरा वातावरण कृष्णमय बना हुआ है.
