रक्षाबंधन के दिन भी खुले रहेंगे स्कूल, यहां जानें क्या है वजह

झारखंड में रक्षाबंधन और रविवार को स्कूल खोलने के सरकारी आदेश पर शिक्षकों और अभिभावकों ने जताई नाराजगी, जानें पूरा मामला।

सरायकेला : राष्ट्रीय खेल दिवस-2026 के अवसर पर आयोजित होने वाले तीन दिवसीय राष्ट्रव्यापी अभियान खेलेगा भारत, जीतेगा भारत को लेकर झारखंड के स्कूली शिक्षा एवं साक्षरता विभाग के आदेश ने नई बहस छेड़ दी है. विभाग ने शिक्षा मंत्रालय, भारत सरकार के निर्देशों के अनुपालन में 28 अगस्त और 30 अगस्त 2026 को राज्य के सभी सरकारी, सरकारी सहायता प्राप्त और निजी विद्यालयों को सुबह 9 बजे से दोपहर 1 बजे तक संचालित रखने का निर्देश दिया है. इन तिथियों में रक्षाबंधन का पर्व और रविवार का साप्ताहिक अवकाश पड़ने के कारण शिक्षकों, अभिभावकों और आम लोगों के बीच चर्चा तेज हो गई है.

क्या है विभागीय आदेश

विभागीय आदेश के अनुसार राष्ट्रीय खेल दिवस के तहत खेलकूद और शारीरिक गतिविधियों को बढ़ावा देने के लिए विद्यालयों में विशेष कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे. इस दौरान कार्य करने वाले शिक्षकों और कर्मचारियों को बाद में क्षतिपूर्ति अवकाश देने का प्रावधान भी किया गया है. हालांकि, रक्षाबंधन जैसे पारिवारिक और सांस्कृतिक महत्व के पर्व के दिन विद्यालय खोले जाने को लेकर कई लोगों ने सवाल उठाए हैं. उनका कहना है कि राष्ट्रीय खेल दिवस और खेल संस्कृति को बढ़ावा देना महत्वपूर्ण है, लेकिन ऐसे कार्यक्रमों के लिए वैकल्पिक तिथियों पर भी विचार किया जा सकता था. रक्षाबंधन भाई-बहन के स्नेह और पारिवारिक मिलन का प्रमुख पर्व है, इसलिए इस दिन विद्यालय संचालन को लेकर असंतोष देखा जा रहा है. शिक्षकों और अभिभावकों के बीच यह भी चर्चा है कि राष्ट्रीय खेल दिवस 29 अगस्त को मनाया जाता है. ऐसे में अभियान की समय-सारणी में बदलाव कर कार्यक्रम को अन्य दिनों में आयोजित किया जा सकता था, जिससे त्योहार और साप्ताहिक अवकाश दोनों प्रभावित नहीं होते.

प्रशासनिक निर्णय लेते समय स्थानीय परंपराओं का ध्यान रखना जरूरी

शिक्षा से जुड़े लोगों का मानना है कि विद्यालय केवल शैक्षणिक गतिविधियों के केंद्र नहीं हैं, बल्कि वे सामाजिक और सांस्कृतिक मूल्यों से भी जुड़े होते हैं. इसलिए प्रशासनिक निर्णय लेते समय स्थानीय परंपराओं और जनभावनाओं का भी ध्यान रखा जाना चाहिए. फिलहाल यह मुद्दा केवल विद्यालयों के खुलने या बंद रहने तक सीमित नहीं है, बल्कि प्रशासनिक जरूरतों और सामाजिक-सांस्कृतिक भावनाओं के बीच संतुलन को लेकर चर्चा का विषय बन गया है. अब लोगों की नजर इस बात पर है कि शिक्षा विभाग इस संबंध में सामने आ रही प्रतिक्रियाओं पर कोई पुनर्विचार करता है या निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार ही अभियान संचालित किया जाता है.


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लेखक के बारे में

By शचिंद्र कुमार दाश

शचिंद्र कुमार दाश प्रभात खबर के वरीय संवाददाता हैं और हिंदी पत्रकारिता में 25 वर्षों से अधिक का अनुभव रखते हैं। वे झारखंड और ओडिशा की राजनीति, प्रशासन, ग्रामीण विकास, सामाजिक सरोकार, कानून-व्यवस्था तथा जनहित से जुड़े मुद्दों की रिपोर्टिंग करते हैं। इसके साथ ही कला, भाषा, संस्कृति, आध्यात्म और समसामयिक विषयों पर लेखन में उनकी विशेष रुचि है। नई जानकारियां जुटाना और उन्हें प्रमाणिक तथ्यों के साथ पाठकों तक पहुंचाना उनकी कार्यशैली की प्रमुख विशेषता है। उनकी रिपोर्टिंग राजनीति, सामाजिक मुद्दों, शिक्षा, खेल, पर्यावरण, साहित्य, संस्कृति से जुड़े विषयों को समेटती है। शचिंद्र कुमार दाश ग्राउंड रिपोर्टिंग पर विशेष जोर देते हैं। वे घटनास्थल पर पहुंचकर तथ्यों के आधार पर समाचार प्रस्तुत करने तथा आम लोगों से जुड़े मुद्दों को प्रमुखता से उठाने का प्रयास करते हैं।

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