जुड़वा बच्चे के कारण रद्द हुआ एक और नामांकन, आदित्यपुर वार्ड 24 से पार्षद प्रत्याशी अभी मुखी को झटका

Saraikela: नगर निकाय चुनाव में जुड़वा बच्चों का मामला तुल पकड़ता जा रहा है. आदित्यपुर वार्ड नंबर 24 के पार्षद प्रत्याशी अभी मुखी का नामांकन जुड़वा बच्चों के कारण रद्द कर दिया गया. इससे पहले जुगसलाई नगर परिषद के अध्यक्ष पद की उम्मीदवार आरती चौधरी का नामांकन भी इसी वजह से रद्द किया गया है.

Saraikela: जुड़वा बच्चा होने के कारण आदित्यपुर नगर परिषद के वार्ड संख्या 24 से पार्षद पद के प्रत्याशी अभी मुखी का नामांकन रद्द कर दिया गया है. यह मामला अब जिला प्रशासन के लिए गले की फांस बन गया है. इस मामले को लेकर लगातार सरगर्मी तेज हो रही है. अभी मुखी इस मामलों को अदालत में ले जाने की बात कह रहे हैं. शुक्रवार को नाम वापसी के दिन जिला समाहरणालय पहुंचे अभी मुखी ने प्रशासन पर दोहरा मापदंड अपनाने का आरोप लगाते हुए अदालत में इसे चुनौती देने की बात कही. उन्होंने अपने वकील के माध्यम से एक आवेदन भी दिया, लेकिन प्रसाशन द्वारा कहा गया कि रद्द हुआ नामांकन वापस नहीं लिया जायेगा.

क्या है पूरा मामला

अभी मुखी का नामांकन इसलिए रद्द कर दिया गया क्योंकि उनके तीन बच्चे है. इस पर अभी मुखी ने कहा कि उनका पहले से एक बच्चा थ, जबकि दूसरी बार जुड़वा बच्चे पैदा हुए. लिहाजा, जुड़वा बच्चे को एक ही यूनिट माना जाता है. उन्होंने झारखंड हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाने की बात कही है. कानूनन, किसी भी उम्मीदवार का नामांकन गलत तरीके से खारिज होने पर वे अनुच्छेद 226 के तहत रिट याचिका दायर कर सकते हैं. ऐसे ही एक मामले में झामुमो समर्थित मेयर प्रत्याशी भुगलु सोरेन (उर्फ डब्बा सोरेन) के नामांकन को वैध माना गया, जबकि भुगलु सोरेन के भी उनकी तरह तीन बच्चे हैं. एक बच्चा पहले से था और दूसरी बार वे जुड़वा बच्चों के पिता बने.

अभी मुखी का तर्क है कि जब एक जैसे मामले में मेयर प्रत्याशी का नामांकन स्वीकार्य हो सकता है, तो उनका नामांकन रद्द क्यों किया गया. इसी भेदभाव को लेकर वे हाई कोर्ट का रुख करेंगे.

जुगसलाई नगर परिषद में भी ऐसा ही मामला

जमशेदपुर के जुगसलाई नगर परिषद के अध्यक्ष पद की उम्मीदवार आरती चौधरी का नामांकन भी इसी वजह से रद्द कर दिया गया कि उनके भी जुड़वा बच्चे हैं और कुल बच्चों की संख्या तीन है. हालांकि, उम्मीदवार आरती चौधरी का कहना है कि उनका पहले एक बच्चा पैदा हुआ था जबकि दूसरी बार जुड़वा बचेचा पैदा हुए थे. इस मामले में सुप्रीम कोर्ट भी मानता है कि इसमें तीन बच्चों का प्रावधान लागू नहीं होता है. उन्होंने कहा कि जुगसलाई में ही सदस्य का चुनाव में एक उम्मीदवार के तीन बच्चे होने के बावजूद इसको वैद्य ठहराया गया, क्योंकि दो बच्चे जुड़वा थे. उन्होंने भी हाईकोर्ट जाने की बात कही है.

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By AmleshNandan Sinha

अमलेश नंदन सिन्हा प्रभात खबर डिजिटल में वरिष्ठ पत्रकार के रूप में कार्यरत हैं. इनके पास हिंदी पत्रकारिता में 20 से अधिक वर्षों का अनुभव है. रांची विश्वविद्यालय से पत्रकारिता की पढ़ाई करने के बाद से इन्होंने कई समाचार पत्रों के साथ काम किया. इन्होंने पत्रकारिता की शुरुआत रांची एक्सप्रेस से की, जो अपने समय में झारखंड के विश्वसनीय अखबारों में से एक था. एक दशक से ज्यादा समय से ये डिजिटल के लिए काम कर रहे हैं. झारखंड की खबरों के अलावा, समसामयिक विषयों के बारे में भी लिखने में रुचि रखते हैं. विज्ञान और आधुनिक चिकित्सा के बारे में देखना, पढ़ना और नई जानकारियां प्राप्त करना इन्हें पसंद है.

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