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मानसून की दस्तक के साथ तसर की खेती की तैयारी शुरू, हफ्तेभर में तसर के अंडे का होगा उत्पादन, कोरोना काल में घर लौटे प्रवासी मजदूरों की भी बढ़ेगी आमदनी

By Prabhat khabar Digital
Updated Date
Tasar Silk Production :  ग्रेनेज हाउस में रखे गये तसर कोसा
Tasar Silk Production : ग्रेनेज हाउस में रखे गये तसर कोसा
प्रभात खबर

Tasar Silk Production, Jharkhand News, सरायकेला खरसावां न्यूज (शचिन्द्र कुमार दाश) : मानसून के दस्तक देने के साथ ही खरसावां-कुचाई क्षेत्र में तसर के खेती की तैयारी शुरू हो गई है. सेंट्रल सिल्क बोर्ड (वस्त्र मंत्रालय, भारत सरकार) द्वारा खरसावां में संचालित बुनियादी तसर बीज प्रगुणन एवं प्रशिक्षण केंद्र परिसर में डीएफएल (तसर के अंडे) के उत्पादन की तैयारी चल रही है. प्रभात खबर से बातचीत में केंद्र के बुनियादी तसर बीज प्रगुणन एवं प्रशिक्षण प्रभारी सह वैज्ञानिक डॉ तिरुपम रेड्डी ने कहा कि इस वर्ष तसर सिल्क की खेती के लिये मौसम पूरी तरह से अनुकूल है. तसर के अंडे (डीएफएल) व तसर कोसा के अधिक उत्पादन का संभावना है.

बुनियादी तसर बीज प्रगुणन एवं प्रशिक्षण प्रभारी सह वैज्ञानिक डॉ तिरुपम रेड्डी ने कहा कि इस साल पिछले साल की तुलना में खरसावां में अधिक डीएफएल की मांग है. तसर किसानों के साथ-साथ कोविड संक्रमण काल में घर लौटे बड़ी संख्या में प्रवासी मजदूर भी इस वर्ष तसर की खेती को इच्छुक हैं. डॉ रेड्डी ने बताया कि अगले सप्ताह से तसर की खेती शुरु हो जायेगी. फिलहाल ग्रेनेज हाउस में तसर कोसा को रखा गया है. यहां तसर के पीपा से अंडा (डीएफएल) का उत्पादन कर खेती के लिये किसानों को उपलब्ध कराया जायेगा. उन्होंने बताया कि भारत सरकार की ओर से सिल्क समग्र योजना के तहत तसर की खेती को बढ़ावा देने के लिये भी कार्य किया जा रहा है. भारत सरकार के साथ-साथ राज्य सरकार की ओर से भी तसर कोसा उत्पादन को बढ़ावा देने के लिये कार्य किये जा रहे हैं.

तसर किसानों से बातचीत करते बीएसएमटीसी के प्रभारी सह वैज्ञानिक डॉ तिरुपम रेड्डी
तसर किसानों से बातचीत करते बीएसएमटीसी के प्रभारी सह वैज्ञानिक डॉ तिरुपम रेड्डी
प्रभात खबर

बीएसएमटीसी के प्रभारी सह वैज्ञानिक डॉ तिरुपम रेड्डी ने कहा कि तसर की खेती में प्री कोकून व पोष्ट कोकून के तहत कार्य करने वाले लोगों की आमदानी बढ़ाने पर जोर है. उन्होंने बताया कि किसानों को तसर की खेती के क्षेत्र में दक्ष बनाने के लिये प्रशिक्षण देने की भी योजना है. तसर के ग्रेनेज बनाने के लिये किसानों को जागरुक किया जायेगा. इससे वे स्वयं डीएफएल का उत्पादन करने लगेंगे तथा उन्हें आर्थिक लाभ भी पहुंचेगा. आने वाले दिनों में नर्सरी व वर्मी कंपोस्ट बनाने का भी प्रशिक्षण दिया जायेगा. वर्मी कंपोस्ट के उपयोग से ओर्गानिक कोकून तैयार होंगे. देश विदेश में ऑर्गेनिक कोकून की काफी मांग है. इसके जरिये किसानों को कम लागत में अधिक मुनाफा होगा.

वैज्ञानिक डॉ तिरुपम रेड्डी ने बताया कि तसर की खेती को बढ़ाने के लिये किसानों के धान के खेतों की मेड़ पर अर्जुन व आसन के पौधे लगाने के लिए भी प्रोत्साहित किया जा रहा है. बंजर भूमि में भी अर्जुन आसन के पौधे लगाने के लिये खरसावां स्थिति बीएसएमटीसी की नर्सरी से किसानों को पौधा उपलब्ध कराया गया है. लगाए गए अर्जुन व आसन के पोधे तीन-चार साल में इसे बड़ा हो जायेगा. इसके बाद उन पेड़ों में तसर कीट पालन किया जायेगा. इससे किसानों को अतिरिक्त रोजगार पहुंचेगा.

Posted By : Guru Swarup Mishra

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