साहिबगंज
शहर स्थित मां बायसी मंदिर परिसर में आयोजित शतचंडी महायज्ञ सह श्रीमद्भागवत कथा एवं रासलीला महोत्सव के चौथे दिन धार्मिक अनुष्ठानों और कथा-प्रवचन में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने भाग लिया. सुबह एवं शाम के सत्र में वैदिक मंत्रोच्चार के साथ विधिवत 33 कोटि देवी-देवताओं का आह्वान कर पूजन, हवन एवं आरती संपन्न करायी गयी. संध्या सत्र में वृंदावन धाम से पधारी कथा वाचिका सुदीक्षा कृष्णा ने श्रीमद्भागवत कथा का रसपान कराया. उन्होंने कहा कि श्रीमद्भागवत एक प्रेम ग्रंथ है, जो मनुष्य को भगवान श्रीकृष्ण से प्रेम करना सिखाता है. भगवान को प्राप्त करने के लिए हृदय में सच्चा प्रेम और समर्पण का भाव होना आवश्यक है. उन्होंने कहा कि भगवान श्रीकृष्ण गोपियों के प्रेम में सराबोर होकर वृंदावन की गलियों में माखन का आनंद लेते थे. भागवत कथा का श्रवण मनुष्य को प्रेम, करुणा और मानवीय संबंधों का महत्व समझाता है. आज का व्यक्ति धन को बचाने में लगा है, जबकि संबंधों को खोता जा रहा है. पहले लोग धन से अधिक रिश्तों को महत्व देते थे और उन्हें संजोकर रखते थे. कथा वाचिका ने कहा कि जिस व्यक्ति को भगवान गोविंद का सहारा मिल जाता है, वह वास्तव में भाग्यशाली होता है. जीवन में आने वाली हर कठिनाई का सामना ईश्वर की कृपा और अपने परिश्रम से किया जा सकता है. उन्होंने श्रद्धालुओं से अपने लक्ष्य स्वयं निर्धारित कर उन्हें प्राप्त करने के लिए निरंतर मेहनत करने का आह्वान किया. कथा के उपरांत रासलीला मंडली द्वारा भगवान श्रीकृष्ण की मनोहारी रासलीला का मंचन किया गया, जिसका श्रद्धालुओं ने भाव-विभोर होकर आनंद लिया. कार्यक्रम के अंत में श्रद्धालुओं के बीच प्रसाद का वितरण किया गया. इस अवसर पर आयोजक विजय जी महाराज, समिति के सदस्य तथा सैकड़ों की संख्या में महिला एवं पुरुष श्रद्धालु उपस्थित थे.
