धरती फटी, लावा बहा... फिर पत्थरों में बदल गया करोड़ों साल पुराना जंगल

राजमहल की पहाड़ियां सिर्फ पहाड़ नहीं, बल्कि करोड़ों साल पुराने ज्वालामुखी विस्फोटों, जीवाश्मों और आदिवासी सभ्यता का इतिहास समेटे हैं. यह धरती की खुली किताब है, जिसके पन्ने समय ने खुद लिखे हैं. इन अनमोल धरोहरों को जानें.

संताल परगना: राजमहल की पहाड़ियों को अगर अपने अब तक सिर्फ पहाड़ समझा है, तो इसे एक बार ध्यान से पढ़िए. इन चट्टानों में करोड़ों साल पहले हुए ज्वालामुखीय विस्फोटों की गूंज दर्ज है, पत्थरों में बदल चुके प्राचीन जंगलों की स्मृतियां सुरक्षित हैं और सदियों से इनके साथ जीती आदिवासी सभ्यता का इतिहास भी सांस लेता है. यह धरती की वह खुली किताब है, जिसके पन्ने समय ने खुद लिखे हैं.

एक ही भू-भाग में करीब 11 करोड़ साल पुराने ज्वालामुखीय अवशेष, करोड़ों वर्ष पुराने वनस्पति जीवाश्म और सदियों पुरानी आदिवासी संस्कृति का अद्भुत संगम राजमहल पहाड़ियों को दुनिया के चुनिंदा भू-वैज्ञानिक धरोहर स्थलों में खड़ा करता है. यहां की चट्टानें सिर्फ भूगर्भीय परिवर्तन नहीं, बल्कि धरती के विकास की पूरी यात्रा का दस्तावेज हैं. राजमहल की पहाड़ियां सिर्फ संताल परगना की पहचान नहीं, बल्कि उस अनंत काल की जीवंत गवाह है, जब ज्वालामुखी फटे, जंगल पत्थरों में बदल गये, भू-भाग का स्वरूप बदला और अंततः इंसान ने इन्हीं पहाड़ियों को अपना घर बना लिया.

11 करोड़ साल पहले धरती के भीतर उठा था ज्वालामुखी

लगभग 10.5 से 11 करोड़ वर्ष पहले केटेशियस काल में धरती के भीतर से निकला बेसाल्टिक लावा ठंडा होकर जमता गया और राजमहल ट्रैप का निर्माण हुआ. राजमहल ट्रैप को वैज्ञानिक लार्ज इग्नियस प्रोविंस से जोड़कर देखते है. राजमहल क्षेत्र भारतीय प्लेट के भूगर्भीय विकास और गोंडवाना भू-भाग के विखंडन से जुड़े अध्ययनों में महत्वपूर्ण है.

पहाड़िया और संताल सभ्यता की जीवित विरासत मौजूद

राजमहल की पहाडिया सौरिया पहाड़िया और संताल समुदयों के जीवन, संस्कृति और परपराओं से गहराई से जुड़ी है. जंगल, पहाड और प्राकृतिक संसाधन इनके जीवन का हिस्सा रहे है. यहां की सभ्यता को पहाड़ों से अलग करके नहीं देखा जा सकता.

जहां पेड़ पत्थर बनकर आज भी सुरक्षित हैं

साहिबगंज के मंडरों में करोड़ों वर्ष पुराने पौधों के जीवाटम मिले है. यहां पत्तियों के अवशेष, पत्थर बन चुकी लकड़िया, फर्न के प्रमाण मिले है. यह जीवाश्म लगभग 6.8 करोड़ से 14.5 करोड़ वर्ष पुराने माने जाते हैं.

पहाड़ों के जंगलों में छिपी है मूल्यवान औषधीय संपदा

सतावर, अश्वगंधा, सर्पगंधा, कालमेघ, गुडमार, गिलोय, आंवला, हर्स, बहेरा, अर्जुन, महुआ, बेल, नीम, करंज और पलाश जैसी वनस्पतियां इस क्षेत्र की प्राकृतिक संपदा का हिस्सा है. इनमें से कई पौधे स्थानीय आदिवासी समुदायों के पारंपरिक उपचार ज्ञान से जुड़े रहे है.

भूगर्भ में पत्थरों के साथ खनिजों का भी भंडार है

राजमहल क्षेत्र बेसाल्ट के अलावा चूना पत्थर, काओलिन, फायरक्ले, क्वार्ट्ज, फेल्सपार और सिलिका बालू जैसे खनिज संसाधनों के लिए भी महत्वपूर्ण है. यानी इन पहाड़ियों की कहानी सिर्फ जंगल और चट्टानों तक सीमित नहीं है.


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लेखक के बारे में

By भूमि शर्मा

भूमि शर्मा पिछले दो वर्षों से डिजिटल मीडिया में सक्रिय हैं और वर्तमान में प्रभात खबर डिजिटल के साथ बतौर कंटेंट राइटर जुड़ी हुई हैं. वर्तमान में वह मुख्य रूप से जमशेदपुर और उसके आसपास के क्षेत्रों की खबरों को कवर करती हैं. इससे पहले वह एजुकेशन बीट और झारखंड बीट पर भी काम कर चुकी हैं, जहां उन्होंने शैक्षणिक बदलावों और राज्य से जुड़े महत्वपूर्ण मुद्दों पर लेखन किया है।

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