रांची : JSSC CGL परीक्षा रद्द होने के बाद बुधवार को दूसरे दिन भी चयनित अभ्यर्थियों ने प्रोजेक्ट भवन के समक्ष प्रदर्शन किया. सुबह अभ्यर्थी प्रोजेक्ट भवन सचिवालय के मुख्य द्वार के सामने धरने पर बैठ गये। इसके बाद वे सचिवालय परिसर के अंदर भी प्रवेश कर गये. अभ्यर्थी हाथों में प्लेकार्ड लिये हुए थे, जिन पर ‘न्याय दो या फांसी दो’ लिखा था. उन्होंने सरकार के फैसले के खिलाफ नारेबाजी भी की. प्रदर्शन के दौरान कई बार सुरक्षाकर्मियों और अभ्यर्थियों के बीच झड़प हुई. सुरक्षाकर्मी प्रदर्शनकारियों से मुख्य प्रवेश द्वार खाली कर दूसरी जगह प्रदर्शन करने को कह रहे थे. इसी दौरान हंगामा करते हुए अभ्यर्थी सचिवालय परिसर में घुस गये और वहीं धरने पर बैठ गये.
कर्मचारियों ने सरकार के फैसले पर नाराजगी जतायी
प्रदर्शनकारी कर्मचारियों ने सरकार के फैसले पर नाराजगी जतायी. उनका कहना था कि चयन प्रक्रिया पूरी होने के बाद उन्होंने नौकरी ज्वाइन की है. कई कर्मचारी पिछले कई महीनों से विभिन्न विभागों में अपनी सेवाएं दे रहे हैं. ऐसे में अब परीक्षा और नियुक्ति रद्द होने से उनका भविष्य संकट में पड़ गया है.
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प्रोजेक्ट भवन से हटिया चांदनी चौक तक निकाला फ्लैश लाइट मार्च
देर शाम चयनित कर्मचारियों ने प्रोजेक्ट भवन से हटिया चांदनी चौक तक फ्लैश लाइट मार्च निकाला. मार्च के दौरान उन्होंने सरकार से परीक्षा और नियुक्ति रद्द करने का फैसला वापस लेने की मांग की. इसके बाद करीब एक घंटे तक हटिया चांदनी चौक पर धरना दिया गया, जिससे वहां जाम की स्थिति बन गयी. करीब रात 8 बजे चयनित अभ्यर्थी वापस प्रोजेक्ट भवन लौट आये. अभ्यर्थी साकेत कुमार ने बताया कि फिलहाल वे रात में भी प्रोजेक्ट भवन के समक्ष धरना जारी रखेंगे.
‘नौकरी गयी तो EMI कैसे भरेंगे’
धरने पर बैठे कर्मचारियों ने अपनी आर्थिक चिंता भी जाहिर की. उन्होंने कहा कि अगर नौकरी चली गयी, तो EMI कैसे भरेंगे और परिवार का खर्च कैसे चलायेंगे. नौकरी मिलने के बाद वे अपने परिवार की आर्थिक जिम्मेदारी उठा रहे हैं. कुछ कर्मचारियों ने बताया कि उन्होंने दूसरी नौकरी छोड़कर होम स्टेट में नौकरी मिलने के कारण JSSC CGL की नौकरी ज्वाइन की थी. अब परीक्षा और नियुक्ति रद्द होने से वे खुद को असमंजस की स्थिति में पा रहे हैं.
निष्पक्ष जांच कर दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की जाये
चयनित अभ्यर्थियों की मांग है कि यदि परीक्षा में किसी स्तर पर गड़बड़ी हुई है, तो उसकी निष्पक्ष जांच कर दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की जाये, लेकिन पूरी चयन प्रक्रिया के बाद चयनित होकर विभिन्न विभागों में सेवा दे रहे कर्मचारियों को इसकी सजा नहीं मिलनी चाहिए.
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