Ranchi News: रांची मध्यस्थता केंद्र में एक ऐसा पारिवारिक विवाद सुलझा, जहां टूटने की कगार पर पहुंचा परिवार फिर से एक हो गया. करीब दो वर्षों से अलग रह रहे पति-पत्नी ने मध्यस्थता की प्रक्रिया के बाद पुराने मतभेद भुलाकर दोबारा साथ रहने का फैसला किया. ओएम वाद संख्या 629/2025 का सफलतापूर्वक निस्तारण अधिवक्ता मध्यस्थ अमरेंद्र कुमार ओझा और दोनों पक्षों के अधिवक्ताओं के संयुक्त प्रयास से हुआ. यह मामला अतिरिक्त प्रधान न्यायाधीश, कुटुंब न्यायालय-1 रमेश चंद्रा के न्यायालय से मध्यस्थता केंद्र भेजा गया था, जबकि डालसा सचिव राकेश रौशन ने इसे सुलझाने की जिम्मेदारी अधिवक्ता मध्यस्थ अमरेंद्र कुमार ओझा को सौंपी थी.
भरण-पोषण वाद से शुरू हुई थी कानूनी लड़ाई
मामले में प्रथम पक्ष ज्योति टोप्पो ने अपने पति प्रवीण केरकेट्टा के खिलाफ भरण-पोषण वाद दायर किया था. दोनों की शादी ईसाई रीति-रिवाज से हुई थी, लेकिन आपसी विवाद बढ़ने के कारण वे लगभग दो वर्षों से अलग रह रहे थे. मामला अदालत तक पहुंचने के बाद इसे मध्यस्थता के जरिए सुलझाने का प्रयास शुरू किया गया.
तीन से चार बैठकों में बदली रिश्ते की दिशा
अधिवक्ता मध्यस्थ अमरेंद्र कुमार ओझा ने प्रथम पक्ष के अधिवक्ता रौनक फिरदौश और द्वितीय पक्ष के अधिवक्ता सौरभ राज एवं हुमा कौशर के साथ मिलकर दोनों पक्षों से अलग-अलग और संयुक्त रूप से बातचीत की. करीब तीन से चार बैठकों के दौरान पति-पत्नी को रिश्ते के महत्व और आपसी संवाद की जरूरत समझाई गई. लगातार बातचीत के बाद दोनों ने अपने पुराने विवाद पीछे छोड़ने और वैवाहिक जीवन को नया मौका देने पर सहमति जता दी.
एक-दूसरे और परिवार का सम्मान करने का लिया संकल्प
समझौते के तहत दोनों ने तय किया कि वे एक-दूसरे के साथ-साथ दोनों परिवारों का भी सम्मान करेंगे. पत्नी अपने पति का सम्मान करेगी, जबकि पति अपनी पत्नी की जरूरतों और जिम्मेदारियों का पूरा ध्यान रखेगा. दोनों ने यह भी भरोसा दिलाया कि भविष्य में मतभेद होने पर संवाद के जरिए समाधान निकालेंगे और प्रेमपूर्वक साथ रहेंगे.
डालसा सचिव ने दी नई शुरुआत की शुभकामनाएं
मामले का समाधान होने के बाद डालसा सचिव राकेश रौशन ने दोनों पक्षों को बुके भेंट कर उनके उज्ज्वल भविष्य की शुभकामनाएं दीं. उन्होंने दंपति से भविष्य में किसी नए विवाद को जन्म नहीं देने और विश्वास के साथ अपना वैवाहिक जीवन आगे बढ़ाने की अपील की.
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मध्यस्थता बनी रिश्ते बचाने का जरिया
रांची मध्यस्थता केंद्र में सुलझा यह मामला बताता है कि कई बार अदालत की लंबी लड़ाई से अधिक प्रभावी संवाद और समझौते की प्रक्रिया होती है. दो साल से अलग रह रहे दंपति का फिर साथ आने का फैसला इस बात का उदाहरण बना कि समय रहते बातचीत हो तो टूटते रिश्तों को भी नई जिंदगी मिल सकती है.
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