रांची के खादगढ़ा बस स्टैंड टेंडर में बड़ा खेल, टेंडर रद्द, अब 5 अफसर करेंगे जांच

रांची के खादगढ़ा बस स्टैंड के बंदोबस्ती टेंडर में बड़े पैमाने पर गड़बड़ी के आरोप लगे हैं. 4.30 करोड़ रुपये के भारी अंतर के बाद, अब 5 सदस्यीय विशेष कमेटी इस मामले की जांच करेगी. टेंडर प्रक्रिया फिलहाल निलंबित कर दी गई है.

रांची : राजधानी रांची के खादगढ़ा बस स्टैंड के बंदोबस्ती टेंडर में हुई बड़ी गड़बड़ी की जांच अब पांच सदस्यीय विशेष कमेटी करेगी. टेंडर प्रक्रिया में बड़े पैमाने पर धांधली का आरोप लगाते हुए मेयर रोशनी खलखो द्वारा सवाल उठाए जाने के बाद नगर आयुक्त सुशांत गौरव ने त्वरित कार्रवाई करते हुए टेंडर को स्थगित कर दिया है. पहली बार 8 अगस्त को आयोजित टेंडर प्रक्रिया में अधिकतम बोली 7.50 करोड़ रुपये तक पहुंच गई थी, जिसे नगर निगम ने अचानक रद्द कर दिया था. इसके बाद 1 सितंबर को दोबारा ऑनलाइन बोली लगाई गई, जिसमें बंदोबस्ती की राशि घटकर महज 3.20 करोड़ रुपये रह गई. पहली और दूसरी निविदा की राशि में आए 4.30 करोड़ रुपये के भारी-भरकम अंतर को लेकर निगम प्रशासन की मंशा पर सवाल खड़े हो गए थे, जिसके बाद मेयर ने नगर आयुक्त को पत्र लिखकर निष्पक्ष जांच की मांग की थी.

अपर नगर आयुक्त की अध्यक्षता में बनी जांच टीम

मामले की गंभीरता को देखते हुए नगर आयुक्त ने जांच कमेटी का गठन कर दिया है. इस पांच सदस्यीय जांच टीम में अपर नगर आयुक्त संजय कुमार, कार्यपालक अभियंता संजीव कुमार, सहायक नगर आयुक्त निहारिका तिर्की, सहायक नगर आयुक्त मुकेश रंजन और कंप्यूटर प्रोग्रामर राजेश कुमार को शामिल किया गया है. कमेटी को पूरे टेंडर मामले की सूक्ष्मता से जांच कर अपने मंतव्य के साथ संयुक्त जांच रिपोर्ट सौंपने का स्पष्ट निर्देश दिया गया है. जब तक जांच रिपोर्ट पूरी नहीं हो जाती, तब तक टेंडर प्रक्रिया पूरी तरह से निलंबित रहेगी. इस अंतरिम अवधि में खादगढ़ा बस स्टैंड से होने वाले राजस्व और शुल्क की वसूली नगर निगम के अपने कर्मचारियों द्वारा की जाएगी ताकि निगम के राजस्व का नुकसान न हो.

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एमएसटीसी (MSTC) से जुटाए जाएंगे साक्ष्य

टेंडर प्रक्रिया में पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए नगर आयुक्त ने जांच टीम को ऑनलाइन ई-ऑक्शन संपन्न कराने वाली अधिकृत एजेंसी एमएसटीसी (MSTC) से सभी डिजिटल दस्तावेज और तकनीकी साक्ष्य जुटाने का आदेश दिया है. जांच कमेटी एमएसटीसी से प्राप्त लॉग फाइल्स, बिडिंग डेटा और अन्य तकनीकी साक्ष्यों का मिलान कर अपनी अंतिम रिपोर्ट तैयार करेगी. इस रिपोर्ट के आधार पर ही टेंडर को नए सिरे से जारी करने या दोषी अधिकारियों व एजेंसियों पर कार्रवाई करने का अंतिम निर्णय लिया जाएगा.

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लेखक के बारे में

By समीर उरांव

इंटरनेशनल स्कूल ऑफ बिजनेस एंड मीडिया से बीबीए मीडिया में ग्रेजुएट होने के बाद साल 2019 में भारतीय जनसंचार संस्थान दिल्ली से हिंदी पत्रकारिता में पीजी डिप्लोमा किया. 5 साल से अधिक समय से प्रभात खबर में डिजिटल पत्रकार के रूप में कार्यरत हूं. इससे पहले डेली हंट में बतौर प्रूफ रीडर एसोसिएट के रूप में काम किया. झारखंड के सभी समसामयिक मुद्दे खासकर राजनीति, लाइफ स्टाइल, हेल्थ से जुड़े विषयों पर लिखने और पढ़ने में गहरी रुचि है. तीन साल से अधिक समय से झारखंड डेस्क पर काम कर रहा हूं. फिर लंबे समय तक लाइफ स्टाइल के क्षेत्र में भी काम किया हूं. इसके अलावा स्पोर्ट्स में भी गहरी रुचि है.

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