ePaper

झारखंड समेत इन राज्यों ने नहीं बनाया पेसा रूल, जानें क्या है ये

Updated at : 18 Feb 2023 7:38 AM (IST)
विज्ञापन
झारखंड समेत इन राज्यों ने नहीं बनाया पेसा रूल, जानें क्या है ये

जिन छह राज्यों ने पेसा रूल बनाया है, उसमें आंध्र प्रदेश, हिमाचल प्रदेश, राजस्थान, महाराष्ट्र और गुजरात का नाम शामिल है. तेलंगाना ने आंध्रप्रदेश के पेसा रूल को ही स्वीकार करते हुए अपने यहां लागू कर लिया.

विज्ञापन

रांची, शकील अख्तर : झारखंड सहित चार राज्यों ने अब तक पंचायत एक्सटेंशन टू शिड्यूल एरिया एक्ट (पेसा) में निहित प्रावधानों के आलोक में रूल नहीं बनाया. पेसा रूल नहीं बनानेवाले राज्यों की सूची में ओड़िशा, मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ भी शामिल हैं. पेसा एक्ट 1996 में अनुसूचित राज्यों को रूल बना कर ग्रामसभा को शक्ति देने का प्रावधान किया गया था. पेसा रूल बना कर ग्रामसभा को शक्ति देने से अनुसूचित क्षेत्र में जमीन का हस्तांतरण करने या नहीं करने का पूरा अधिकार ग्रामसभा को होता.

पेसा एक्ट 1996 के बाद झारखंड बना :

झारखंड का गठन, पेसा एक्ट 1996 लागू होने के बाद हुआ. पांचवीं और छठी अनुसूची में शामिल सभी राज्यों के अपने-अपने पंचायत राज अधिनियम में पेसा के प्रावधानों को दिसंबर 1997 तक शामिल करने की बाध्यता थी. इस अधिनियम के प्रावधानों के लागू करने के लिए 10 राज्यों को पेसा रूल बनाना था. हालांकि किसी भी राज्य ने राजनीतिक और प्रशासनिक कारणों से इस निर्धारित समय-सीमा नें पेसा रूल नहीं बनाया. झारखंड और छत्तीसगढ़ के लिए 1997 तक पेसा रूल बनाने की बाध्यता नहीं थी, क्योंकि इन राज्यों का गठन इसके बाद हुआ.

छह राज्यों ने रूल बना लिया:

अब तक 10 में से जिन छह राज्यों ने पेसा रूल बनाया है, उसमें आंध्र प्रदेश, हिमाचल प्रदेश, राजस्थान, महाराष्ट्र और गुजरात का नाम शामिल है. तेलंगाना ने आंध्रप्रदेश के पेसा रूल को ही स्वीकार करते हुए अपने यहां लागू कर लिया. झारखंड सरकार ने अब तक पेसा रूल यह कह कर नहीं बनाया कि झारखंड पंचायत राज अधिनियम में पेसा के अनुरूप ही ग्राम सभा को शक्ति देने के प्रावधान कर दिया है.

पेसा एक्ट की धारा 4 (बी, सी, डी, इ) यथा ग्राम सभा के गठन, परंपराओं के संरक्षण का अधिकार, योजना और लाभुकों के चयन आदि का अधिकार ग्रामसभा को देने के लिए पंचायत राज अधिनियम की धारा 2, 3, 10 की विभिन्न उपधाराओं में प्रावधान किया गया है. न्यायिक विवादों के दौरान शीर्ष अदालत ने झारखंड पंचायत राज अधिनियम में किये गये प्रावधानों को संवैधानिक रूप से सही माना है.

झारखंड सरकार ने वर्ष 2003 में ग्रामसभा संचालन नियमावली बनायी

सरकार ने वर्ष 2003 में ग्रामसभा संचालन नियमावली भी बनायी. इसमें परंपरा के अनुरूप मानकी, मुंडा, प्रधान, माझी आदि को ग्राम सभा की बैठकों में अध्यक्षता करने का अधिकार दिया गया है. ग्राम सभाओं को फैसला करने और ग्राम पंचायतों को उसे क्रियान्वित करने का अधिकार भी पंचायत राज अधिनियम में दिया गया है. पेसा के अनुरूप ही लघु खनिजों के लिए लीज और लाइसेंस देने से पहले ग्रामसभा की सहमति लेने का प्रावधान किया गया है.

वन विभाग ने भी 2014 में अधिसूचना जारी कर लघु वनोपज पर अपना अधिकार समाप्त कर दिया है. अनुसूचित क्षेत्रों में जमीन के हस्तांतरण की शक्ति ग्राम सभा देने के बिंदु पर पंचायत राज में प्रावधान करने की कार्रवाई की जा रही है. सरकार ने भू-अर्जन अधिनियम में ग्राम सभा की सहमति आवश्यक करार दिया है.

विज्ञापन
Prabhat Khabar News Desk

लेखक के बारे में

By Prabhat Khabar News Desk

यह प्रभात खबर का न्यूज डेस्क है। इसमें बिहार-झारखंड-ओडिशा-दिल्‍ली समेत प्रभात खबर के विशाल ग्राउंड नेटवर्क के रिपोर्ट्स के जरिए भेजी खबरों का प्रकाशन होता है।

Prabhat Khabar App :

देश, एजुकेशन, मनोरंजन, बिजनेस अपडेट, धर्म, क्रिकेट, राशिफल की ताजा खबरें पढ़ें यहां. रोजाना की ब्रेकिंग हिंदी न्यूज और लाइव न्यूज कवरेज के लिए डाउनलोड करिए

Download from Google PlayDownload from App Store
विज्ञापन
Sponsored Linksby Taboola