रांची. ग्राम पंचायतों में पानी की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित करने के उद्देश्य से जल बजट और जल सुरक्षा योजना तैयार करने को लेकर प्रशिक्षकों के प्रशिक्षण फेज टू कार्यक्रम की शुरुआत हुई. पंचायती राज विभाग की ओर से केंद्रीय पंचायती राज मंत्रालय के सहयोग से आयोजित यह तीन दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम हेहल स्थित केंद्रीय प्रशिक्षण संस्थान में चल रहा है.
कार्यक्रम का आयोजन प्रदान के तकनीकी सहयोग से किया जा रहा है. इसमें झारखंड, बिहार, छत्तीसगढ, मध्य प्रदेश और पश्चिम बंगाल के कुल 30 प्रतिभागी शामिल हो रहे हैं. प्रशिक्षण का उद्देश्य ग्राम पंचायत स्तर पर सहभागितापूर्ण जल बजट और जल सुरक्षा योजना तैयार करने तथा उसे प्रभावी तरीके से लागू करने के लिए प्रशिक्षकों की क्षमता मजबूत करना है.
स्थानीय जरूरत के आधार पर बने जल बजट
केंद्रीय पंचायती राज मंत्रालय की संयुक्त सचिव पल्लका साहनी ने वर्चुअल माध्यम से कहा कि जल बजट और जल सुरक्षा योजनाएं ग्राम पंचायतों की वास्तविक जल स्थिति, स्थानीय जरूरतों और जमीनी परिस्थितियों पर आधारित होनी चाहिए. उन्होंने स्थानीय स्तर पर उपलब्ध जल संसाधनों और जरूरतों को ध्यान में रखते हुए योजनाएं तैयार करने पर जोर दिया.
पंचायती राज मंत्रालय, भारत सरकार के निदेशक विपुल उज्जवल ने जल चुनौतियों से निपटने में सामुदायिक स्वामित्व और विभिन्न योजनाओं के अभिसरण के महत्व पर जोर दिया. उन्होंने ग्राम पंचायत स्तर पर समुदाय की भागीदारी से जल प्रबंधन को मजबूत करने की आवश्यकता बतायी.
कार्यक्रम में पंचायती राज निदेशक राजेश्वरी बी, केंद्रीय प्रशिक्षण संस्थान के प्राचार्य देवेंद्र कुमार सिंह, प्रदान के तकनीकी विशेषज्ञ आलोक जाना, अर्नब चक्रवर्ती, सुमेंद्र पुनिया, पौलोमी मलिक और मोहनी साहा समेत अन्य मौजूद रहे.
