प्रणव/ सुनील चौधरी की रिपोर्ट
115.40 Crore Scam Update: 115.40 करोड़ रुपये के महाघोटाले में गिरफ्तार ठेकेदार और जमीन कारोबारी लोकेश्वर साह उर्फ लोकेश साह (43) ने सीआइडी के समक्ष दिये अपने स्वीकारोक्ति बयान में कई सनसनीखेज दावे किये हैं. उसके अनुसार, झारखंड स्टेट इलेक्ट्रिसिटी एम्प्लाइज मास्टर ट्रस्ट और झारखंड ऊर्जा उत्पादन निगम लिमिटेड की राशि सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया की बिरसा चौक शाखा के कथित फर्जी खाते संख्या 5600134210 में ट्रांसफर होने के बाद दुर्गा पूजा से पहले रांची के वीणा इन होटल में आरोपियों की बैठक हुई थी. लोकेश्वर के अनुसार बैठक में कथित सरगना अर्घ्य सेन गुप्ता उर्फ अर्णव गांगुली, समीर कुमार उर्फ रुद्र प्रताप, तत्कालीन बैंक मैनेजर लोलस लकड़ा और वह स्वयं मौजूद थे.
उसका दावा है कि पार्टी के बाद लोलस लकड़ा के जाने पर अर्घ्य सेन ने कहा कि इस पूरे खेल की जड़ वही है. यदि संभव हो तो उसकी हत्या करा दी जाये. लोकेश्वर के अनुसार उसने सरकारी कर्मचारी की हत्या कराने से इनकार किया, जिसके बाद मामला आगे नहीं बढ़ सका और बाद में सभी आरोपी पकड़े गये. सीआइडी के अनुसार लोकेश्वर ने अपने बयान में घोटाले की साजिश, कथित मिलीभगत, पैसों के बंटवारे और अवैध कमाई के इस्तेमाल से जुड़ी कई जानकारियां दी हैं. हालांकि इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि अभी जांच के दौरान की जानी बाकी है.
लोकेश्वर का दावा: बिजली विभाग के दो अफसरों को किया गया था 'सेट'
लोकेश्वर ने दावा किया है कि फर्जीवाड़े को अंजाम देने के लिए बिजली विभाग के कुछ अधिकारियों को पहले से सेट किया गया था. उसके अनुसार गोविंद पांडेय, अरुण पांडेय, सागर, समीर कुमार और अर्घ्य सेन गुप्ता के बीच बातचीत होती थी. उसने आरोप लगाया कि विभाग के रंजीत सिंह और श्रीकांत के हस्ताक्षर से फाइलें आगे बढ़ती थीं और दोनों की बैंक मैनेजर लोलस लकड़ा से सीधी बातचीत होती थी. बयान के अनुसार, झारखंड बिजली वितरण निगम के नाम पर बिरसा चौक शाखा में नीलू नायक और संदीप कुमार के नाम से कथित फर्जी खाता खोला गया. इसमें पहले से बनी एफडी तोड़कर करीब 95-95 करोड़ रुपये ट्रांसफर किये गये. बाद में इसी खाते से कोलकाता, मुंबई समेत अन्य स्थानों पर रकम भेजी गयी. इसके बाद कथित रूप से फर्जी एफडी दस्तावेज तैयार कर बिजली विभाग को भेजे गये. हालांकि पूरे मामले की जांच के लिए रंजीत कुमार सिंह ने सीआइडी में प्राथमिकी दर्ज करायी थी.
लोकेश्वर के अनुसार, किसे कितना पैसा मिलना था
- तत्कालीन बैंक मैनेजर लोलस लकड़ा को कुल रकम का 10 प्रतिशत.
- बिजली विभाग के डीजीएम और सीनियर मैनेजर को फंड उपलब्ध कराने के बदले 50 प्रतिशत हिस्सा तय था.
- इसी हिस्से से अन्य कथित बिचौलियों और अधिकारियों को भुगतान किया जाना था.
- लोकेश्वर का दावा है कि उसे इस फर्जीवाड़े में शामिल रहने के बदले 2.75 करोड़ रुपये मिले थे. इसके अलावा अन्य आरोपियों ने भी उसे अलग-अलग रकम दी थी.
घोटाले की रकम से क्या-क्या किया, बयान में दावा
लोकेश्वर ने दावा किया कि अवैध कमाई से उसने 25 लाख रुपये के जेवर खरीदे, पुरानी सफारी गाड़ी एक्सचेंज कर नई एक्सयूवी-700 ली और खूंटी के कर्रा क्षेत्र में करीब 1.20 करोड़ रुपये में आठ एकड़ जमीन खरीदने के लिए भुगतान किया. उसके अनुसार, इसी जमीन के आधार पर विभिन्न बैंकों में लाखों रुपये जमा किये गये. बयान में यह भी दावा किया गया है कि उसने स्कूल बैग में रखकर 70 लाख रुपये और बाद में 20 लाख रुपये तत्कालीन बैंक मैनेजर लोलस लकड़ा को दिये थे.
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