JPSC Student Protest: जनवादी लेखक संघ ने छात्रों के आंदोलन का किया समर्थन, सरकार से वार्ता की पहल करने की अपील

जनवादी लेखक संघ (जलेस), रांची ने जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम में जेपीएससी परीक्षा में अनियमितताओं के खिलाफ आंदोलन कर रहे छात्रों को अपना समर्थन दिया है. संगठन ने सरकार से छात्रों की मांगों पर तत्काल बातचीत करने की अपील की है.


JPSC Student Protest: जनवादी लेखक संघ (जलेस), रांची ने जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम में जेपीएससी परीक्षा और अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं, परीक्षा में विलंब और पारदर्शिता की मांग को लेकर आंदोलन कर रहे छात्रों के प्रति अपनी पूर्ण एकजुटता व्यक्त की है. संगठन ने कहा कि छात्रों की मांगें न्यायोचित हैं और राज्य सरकार को बिना किसी देरी के छात्र प्रतिनिधियों से बातचीत कर उनकी समस्याओं के समाधान की दिशा में ठोस और विश्वसनीय कदम उठाने चाहिए. जलेस के रांची इकाई के सचिव एमजेड खान की ओर से जारी बयान में कहा गया है कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में छात्रों की आवाज को अनसुना करना उचित नहीं है. सरकार को संवेदनशीलता दिखाते हुए संवाद की प्रक्रिया शुरू करनी चाहिए, ताकि आंदोलन का सकारात्मक समाधान निकल सके.

छात्रों के भविष्य से जुड़ा है पूरा मामला

जनवादी लेखक संघ ने अपने बयान में कहा कि छात्र किसी भी समाज और राष्ट्र के भविष्य के निर्माता होते हैं. उनके परिश्रम, भविष्य और सपनों के साथ किसी भी प्रकार का खिलवाड़ केवल व्यक्तिगत अन्याय नहीं, बल्कि पूरे समाज और राज्य के भविष्य के साथ अन्याय है. संगठन ने कहा कि प्रतियोगी परीक्षाओं को लेकर लगातार उठ रहे सवालों ने विद्यार्थियों और युवाओं के बीच गहरा असंतोष और अविश्वास पैदा किया है. ऐसे माहौल में सरकार की जिम्मेदारी और बढ़ जाती है कि वह छात्रों की बात सुने और उनकी चिंताओं का निष्पक्ष समाधान करे.

लोकतांत्रिक आंदोलन को गंभीरता से सुनने की जरूरत

जलेस ने कहा कि जयपाल सिंह स्टेडियम में छात्र शांतिपूर्ण और लोकतांत्रिक तरीके से अपनी मांगें रख रहे हैं. यह उनका संवैधानिक अधिकार है. ऐसे आंदोलनों को दबाने या नजरअंदाज करने के बजाय सरकार को इन्हें गंभीरता से लेना चाहिए. संगठन का मानना है कि लोकतंत्र की मजबूती इसी बात में है कि नागरिकों, विशेषकर युवाओं की आवाज को सम्मानपूर्वक सुना जाए. संवाद की प्रक्रिया ही किसी भी लोकतांत्रिक समाज की सबसे प्रभावी और स्वीकार्य व्यवस्था होती है.

शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता और जवाबदेही जरूरी

जनवादी लेखक संघ ने कहा कि शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता, जवाबदेही और समान अवसर सुनिश्चित करना राज्य सरकार की प्राथमिक जिम्मेदारी है. यदि भर्ती परीक्षाओं की प्रक्रिया पर लगातार सवाल उठते रहेंगे तो युवाओं का भरोसा व्यवस्था से उठ जाएगा. संगठन ने कहा कि प्रतियोगी परीक्षाओं की विश्वसनीयता बनाए रखने के लिए पारदर्शी परीक्षा प्रणाली विकसित करना समय की आवश्यकता है. सरकार को ऐसे सभी मामलों में निष्पक्ष जांच, जवाबदेही तय करने और आवश्यक सुधार लागू करने चाहिए, ताकि भविष्य में इस प्रकार के विवाद दोबारा उत्पन्न न हों.

संवाद से ही निकलेगा समाधान

जलेस ने स्पष्ट कहा कि समस्याओं का समाधान टकराव या उपेक्षा से नहीं, बल्कि लोकतांत्रिक संवाद से संभव है. सरकार को छात्र प्रतिनिधियों के साथ जल्द बैठक कर उनकी शिकायतों और मांगों पर गंभीरता से विचार करना चाहिए. संगठन ने यह भी कहा कि लोकतांत्रिक आंदोलनों को सुनना और उनसे संवाद करना किसी भी संवेदनशील सरकार का दायित्व होता है. छात्रों की आवाज को दबाने के बजाय उनकी मांगों का निष्पक्ष समाधान लोकतांत्रिक मूल्यों को और मजबूत करेगा.

साहित्य और संस्कृति के माध्यम से जताएंगे समर्थन

जनवादी लेखक संघ ने घोषणा की कि वह आगामी 9 अगस्त को होने वाली अपनी बैठक में छात्रों के आंदोलन के समर्थन में एक विशेष सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित करने के प्रस्ताव पर विचार करेगा. संगठन के अनुसार, जयपाल सिंह स्टेडियम में आंदोलनरत छात्रों के बीच कविता-पाठ और सांस्कृतिक एकजुटता कार्यक्रम आयोजित करने का निर्णय लिया जाएगा. जलेस का कहना है कि साहित्य और संस्कृति हमेशा से न्याय, लोकतंत्र, समानता और मानवीय गरिमा के पक्ष में खड़े रहे हैं. ऐसे समय में जब छात्र अपने अधिकारों और पारदर्शी परीक्षा व्यवस्था की मांग को लेकर संघर्ष कर रहे हैं, तब साहित्यकारों और रचनाकारों का भी नैतिक दायित्व बनता है कि वे लोकतांत्रिक मूल्यों के समर्थन में अपनी आवाज बुलंद करें.

इसे भी पढ़ें: ग्लैडसन डुंगडुंग को मिलेगा 'स्वामी देवानंद चक्कुंगल पुरस्कार', हिन्दी पत्रकारिता में योगदान के लिए होंगे सम्मानित

रचनात्मक एकजुटता का संदेश

संगठन ने कहा कि यदि प्रस्ताव को अंतिम रूप दिया जाता है तो जलेस से जुड़े लेखक, कवि और साहित्यकार आंदोलनरत छात्रों के बीच पहुंचकर अपनी रचनाओं के माध्यम से लोकतांत्रिक मूल्यों, सामाजिक न्याय और युवाओं की आकांक्षाओं के प्रति रचनात्मक एकजुटता व्यक्त करेंगे. जलेस के सचिव एम. जेड. खान ने कहा कि साहित्य केवल अभिव्यक्ति का माध्यम नहीं, बल्कि समाज के संघर्षों और उम्मीदों का दस्तावेज भी होता है. इसलिए संगठन छात्रों के लोकतांत्रिक आंदोलन के साथ खड़ा है और सरकार से अपेक्षा करता है कि वह संवेदनशीलता दिखाते हुए वार्ता के माध्यम से जल्द समाधान की दिशा में पहल करे.

इसे भी पढ़ें: रांची के DSPMU में नए छात्रों का भव्य स्वागत, शिक्षा, अनुशासन और रोजगार पर जोर


प्रभात खबर डिजिटल टॉप स्टोरी

लेखक के बारे में

By कुमार विश्वत सेन

कुमार विश्वत सेन प्रभात खबर डिजिटल में डेप्यूटी चीफ कंटेंट राइटर हैं. इनके पास हिंदी पत्रकारिता का 25 साल से अधिक का अनुभव है. इन्होंने 21वीं सदी की शुरुआत से ही हिंदी पत्रकारिता में कदम रखा. दिल्ली विश्वविद्यालय से हिंदी पत्रकारिता का कोर्स करने के बाद दिल्ली के दैनिक हिंदुस्तान से रिपोर्टिंग की शुरुआत की. इसके बाद वे दिल्ली में लगातार 12 सालों तक रिपोर्टिंग की. इस दौरान उन्होंने दिल्ली से प्रकाशित दैनिक हिंदुस्तान दैनिक जागरण, देशबंधु जैसे प्रतिष्ठित अखबारों के साथ कई साप्ताहिक अखबारों के लिए भी रिपोर्टिंग की. 2013 में वे प्रभात खबर आए. तब से वे प्रिंट मीडिया के साथ फिलहाल पिछले 10 सालों से प्रभात खबर डिजिटल में अपनी सेवाएं दे रहे हैं. इन्होंने अपने करियर के शुरुआती दिनों में ही राजस्थान में होने वाली हिंदी पत्रकारिता के 300 साल के इतिहास पर एक पुस्तक 'नित नए आयाम की खोज: राजस्थानी पत्रकारिता' की रचना की. इनकी कई कहानियां देश के विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित हुई हैं.

Read More
ePaper

अपने दैनिक समाचार अनुभव को और बेहतरीन बनाएं

सिर्फ ₹399 ₹149

एक साल के लिए

आज ही सब्सक्राइब करें

संबंधित खबरें >

यह भी पढ़ें >