संजीव सिंह की रिपोर्ट
रांची: जेपीएससी भर्ती घोटाले की जांच में सीआईडी को कई अहम जानकारियां मिली हैं. जांच में सामने आया है कि मामले के मुख्य आरोपी अभय तिवारी ने वर्ष 2021 में रांची के स्टेशन रोड स्थित एक होटल को 11 महीने के लिए लीज पर लिया था. जांच एजेंसी को आशंका है कि प्रतियोगी परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं से जुड़े नेटवर्क के संचालन, बैठकों और सेटिंग-गेटिंग के लिए इसी होटल का इस्तेमाल किया जाता था. सीआईडी अब होटल की लीज अवधि के दौरान वहां आने-जाने वाले लोगों का ब्योरा जुटा रही है. इसके लिए होटल के रजिस्टर, बिल और अन्य दस्तावेजों की भी जांच की जा रही है.
सीआईडी ने दो और आरोपियों को किया गिरफ्तार
इधर, जेपीएससी घोटाले में सीआईडी की कार्रवाई लगातार जारी है. शनिवार को एजेंसी ने जेपीएससी के कर्मचारी सोनू कुमार और मुख्य आरोपी अभय तिवारी के सहयोगी अरविंद कुमार को गिरफ्तार किया. दोनों की गिरफ्तारी जेपीएससी की पूर्व उप परीक्षा नियंत्रक श्वेता कुमारी गुप्ता, टीडीपीएल के निदेशक रामवीर सिंह, तत्कालीन मैनेजर सह बीएसओ मनोज कुमार तिवारी उर्फ अभय तिवारी और दो कर्मचारियों मोहम्मद उस्मान और मोहम्मद एबाद से पांच दिनों की रिमांड के दौरान हुई पूछताछ में मिले तथ्यों के आधार पर की गई.
पूछताछ में आरोपियों ने विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं में हुई कथित अनियमितताओं में अपनी संलिप्तता स्वीकार करने संबंधी जानकारी दी है. इस मामले में अब तक सीआईडी कुल 10 लोगों को गिरफ्तार कर चुकी है. इससे पहले 24 जुलाई को टीडीपीएल के तीन कर्मचारियों हेमंत वर्मा, प्रदीप कुमार सिंह और संजय कुमार को भी गिरफ्तार किया गया था.
पूछताछ में खुल रहे घोटाले के नए राज
जांच में यह भी सामने आया है कि अभय कुमार तिवारी वर्तमान में गोड्डा जिले के पोडैयाहाट प्रखंड में प्रखंड आपूर्ति पदाधिकारी के पद पर कार्यरत था. सेवा में आने से पहले वह नाम बदलकर जेपीएससी की परीक्षाएं संचालित करने वाली एजेंसी टीडीपीएल में मैनेजर के रूप में कार्यरत था. उसने टीजीटी, बीएसओ, रेंज फॉरेस्ट ऑफिसर और फूड सेफ्टी ऑफिसर सहित कई प्रतियोगी परीक्षाएं पास की थीं. इसके अलावा उसके भाई और पत्नी ने भी विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाएं उत्तीर्ण कर अधिकारी पद हासिल किए थे.
12 परीक्षाओं पर संकट, 1.70 लाख अभ्यर्थियों का भविष्य अधर में
जेपीएससी की 14वीं सिविल सेवा परीक्षा में कथित गड़बड़ी सामने आने के बाद आयोग ने नौ परीक्षाएं स्थगित कर दी हैं, जिनकी तिथियां पहले ही घोषित की जा चुकी थीं. इसके अलावा तीन अन्य परीक्षाओं की प्रक्रिया भी अनिश्चितता में है. इस तरह 750 से अधिक पदों के लिए होने वाली कुल 12 परीक्षाएं प्रभावित हुई हैं, जिससे करीब 1.70 लाख अभ्यर्थियों का भविष्य अधर में लटक गया है.
राज्य गठन के 25 वर्ष बाद भी झारखंड में अब तक केवल 13 सिविल सेवा परीक्षाएं ही आयोजित हो सकी हैं, जबकि लगभग उसी समय बने छत्तीसगढ़ और उत्तराखंड में 21 से अधिक सिविल सेवा परीक्षाएं आयोजित की जा चुकी हैं.
