झारखंड में आदिवासियों के पवित्र स्थलों का विकास समेत इन प्रस्तावों पर लगी मुहर, एनपीएस में भी चार प्रतिशत की बढ़ोतरी

Updated at : 30 Jun 2021 9:18 AM (IST)
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झारखंड में आदिवासियों के पवित्र स्थलों का विकास समेत इन प्रस्तावों पर लगी मुहर, एनपीएस में भी चार प्रतिशत की बढ़ोतरी

25 लाख रुपये तक का कार्य लाभुक समिति के माध्यम से होगा. इससे अधिक राशि की योजना खुली निविदा के माध्यम से पूरी की जायेगी. योजना

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CM Hemant Soren Latest News रांची : कैबिनेट ने जनजातीय समुदाय के पवित्र स्थल सरना, जाहेर, मसना, हरगड़ी व अन्य के संरक्षण व विकास के लिए योजना की रूपरेखा व कार्यान्वयन की प्रक्रिया में संशोधन के प्रस्ताव को मंजूरी दी. पहले िसर्फ पवित्र स्थलों की घेराबंदी का प्रावधान था. अब प्रति पवित्र स्थल के विकास व संरक्षण पर अधिकतम पांच करोड़ रुपये तक खर्च किये जा सकेंगे.

25 लाख रुपये तक का कार्य लाभुक समिति के माध्यम से होगा. इससे अधिक राशि की योजना खुली निविदा के माध्यम से पूरी की जायेगी. योजना के तहत स्थलों का सुंदरीकरण किया जायेगा. पेयजल व्यवस्था, मल्टीपर्पस हॉल, चबूतरा, ड्राइव वे, गार्डनिंग, वॉक वे, पार्किंग, सोलर आधारित बिजली जैसी आधारभूत संरचनाओं का विकास होगा. पवित्र स्थलों की जनजाति पेंटिंग भी करायी जायेगी.

सरकारी कर्मचारियों के एनपीएस में चार प्रतिशत की वृद्धि का फैसला :

कैबिनेट सचिव वंदना डाडेल ने बताया कि मंगलवार को हुई कैबिनेट की बैठक में कुल आठ प्रस्ताव को स्वीकृति प्रदान की गयी. उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार की तर्ज पर राज्य के सरकारी कर्मियों के नेशनल पेंशन स्कीम (एनपीएस) में सरकारी अंशदान की राशि 10 प्रतिशत से बढ़ा कर 14 प्रतिशत करने के प्रस्ताव को मंजूरी दी गयी. एक जुलाई 2021 से प्रभावी फैसले के मुताबिक राज्य सरकार के कर्मचारियों के मूल वेतन एवं महंगाई भत्ता के योग का 14 प्रतिशत राशि निर्धारित करने की स्वीकृति दी गयी है. इससे राज्य के खजाने पर लगभग 342 करोड़ का अतिरिक्त बोझ पड़ेगा.

किसानों के लिए : 25 करोड़ का कॉरपस फंड गठित

कैबिनेट ने झारखंड राज्य फसल राहत योजना के लिए कॉरपस फंड के गठन पर सहमति दी. योजना के तहत 25 करोड़ रुपये का कॉरपस फंड गठित किया जायेगा. इस राशि से अर्जित ब्याज से किसानों को फसल की क्षति होने पर तत्काल राहत के रूप में क्षतिपूर्ति का भुगतान किया जायेगा. मंत्रिमंडल ने 80.70 करोड़ रुपये की लागत से प्रधानमंत्री मत्स्य संपद्दा योजना के क्रियान्वयन की घटनोत्तर स्वीकृति प्रदान की.

वन क्षेत्र पदाधिकारी को अनिवार्य सेवानिवृत्ति

कैबिनेट ने अनिल कुमार सिंह, वन क्षेत्र पदाधिकारी, पाकुड़ प्रक्षेत्र को अनिवार्य सेवानिवृत्ति प्रदान करने के प्रस्ताव को मंजूर किया. श्री सिंह पर सरकारी सेवा में रहते हुए सरकार द्वारा किये जा रहे कार्यों व नीतियों के विरुद्ध न्यायालय में वाद दायर करने और कार्य में अनुशासनहीनता बरतने का आरोप था. कैबिनेट ने मनोज प्रसाद, प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश पूर्वी सिंहभूम की वाणिज्य कर न्यायाधीकरण, झारखंड के अध्यक्ष पद पर नियुक्ति को घटनोत्तर स्वीकृति प्रदान की.

अनुकंपा पर नियुक्ति के लिए हिंदी टाइपिंग की अनिवार्यता को शिथिल किया जायेगा

कैबिनेट ने सेवा काल के दौरान मृत सरकारी सेवकों के आश्रितों की अनुकंपा के आधार पर नियुक्ति के लिए नीति में संशोधन का फैसला किया. अब नियुक्ति के लिए शैक्षणिक योग्यता व अर्हता में हिंदी टाइपिंग की अनिवार्यता को शिथिल किया जायेगा. हालांकि, आवेदक को नौकरी मिलने के बाद हिंदी टाइपिंग सीख कर निर्धारित गति प्राप्त करनी होगी. तब तक सेवा संपुष्टि और वेतनवृद्धि स्थगित रहेगी.

Posted By : Sameer Oraon

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