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झारखंड में तेज हुई विकास की गति, आमदनी बढ़ी, आर्थिक सर्वेक्षण में दावा, आज पेश होगा बजट

Updated at : 27 Feb 2024 11:20 AM (IST)
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डॉ रामेश्वर उरांव ने सदन में पेश किया आर्थिक सर्वेक्षण

आर्थिक सर्वेक्षण : झारखंड में विकास की गति तेज हुई है. प्रति व्यक्ति आय में वृद्धि हुई है. राज्य में बेरोजगारी दर राष्ट्रीय औसत के मुकाबले कम है. राज्य में बेरोजगारी दर में भारी गिरावट आयी है.

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झारखंड में विकास की गति तेज हुई है. प्रति व्यक्ति आय में वृद्धि हुई है. राज्य में बेरोजगारी दर राष्ट्रीय औसत के मुकाबले कम है. राज्य में बेरोजगारी दर में भारी गिरावट आयी है. शिक्षा, स्वास्थ्य सहित नागरिक सुविधाओं से जुड़े क्षेत्रों में भी अपेक्षित प्रगति हुई है. झारखंड के आर्थिक सर्वेक्षण में यह जानकारी दी गई है.

सेंट्रल टैक्स में राज्य की हिस्सेदारी कम हुई : डॉ रामेश्वर उरांव

राज्य का कर राजस्व बढ़ा है, लेकिन केंद्रीय करों में राज्य की हिस्सेदारी कम हुई है. वित्त मंत्री रामेश्वर उरांव द्वारा विधानसभा में पेश की गयी वित्तीय वर्ष 2023-24 की ‘आर्थिक सर्वेक्षण रिपोर्ट’ में इन तथ्यों का उल्लेख किया गया है. उल्लेखनीय है कि मंगलवार को विधानसभा में वित्तीय वर्ष 2024-25 का बजट पेश किया जायेगा.

कोविड में लॉकडाउन के कुप्रभाव से उबरा झारखंड

आर्थिक सर्वेक्षण रिपोर्ट में कहा गया है कि कोविड-19 और लॉक डाउन की वजह से राज्य की विकास दर प्रभावित हुई थी. लेकिन, राज्य इसके कुप्रभाव से उबर चुका है. वित्तीय वर्ष 2020-21 से 2022-23 के बीच राज्य के सकल घरेलू उत्पाद(जीएसडीपी) में औसतन 8.8 प्रतिशत की दर से वार्षिक वृद्धि हुई.

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आर्थिक सर्वेक्षण में विकास दर 8.7 फीसदी रहने का अनुमान

वित्तीय वर्ष 2023-24 में इसके 8.7 प्रतिशत रहने का अनुमान है. आर्थिक सर्वेक्षण रिपोर्ट में अगले वित्तीय वर्ष(2024-25) में राज्य की आर्थिक विकास दर 9.8 प्रतिशत होने का अनुमान किया गया है. रिपोर्ट में पिछले 12 वित्तीय वर्षों (वित्तीय वर्ष 2011-12 से 2022-23) के दौरान राज्य की विकास दर का देश की विकास दर से अधिक रहने का दावा किया गया है.

  • विधानसभा में वित्त मंत्री डॉ रामेश्वर उरांव ने पेश की वित्तीय वर्ष 2023-24 की ‘आर्थिक सर्वेक्षण रिपोर्ट’
  • अगले वित्तीय वर्ष (2024-25) में राज्य की आर्थिक विकास दर 9.8 प्रतिशत होने का अनुमान
  • सरकार ने अगले वित्तीय वर्ष (2024-25) में प्रति व्यक्ति आय बढ़कर 1,07,027 होने का अनुमान

देश के जीडीपी में झारखंड का योगदान 1.6 से बढ़कर 1.63% हुआ

वित्तीय वर्ष 2020-21 में देश के सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) में झारखंड का योगदान 1.6 प्रतिशत था. 2021-22 में यह बढ़ कर 1.63 प्रतिशत हुआ. लेकिन 2022-23 में इस मामूली गिरावट आयी और देश के विकास में झारखंड का योगदान 1.62 प्रतिशत रहा.

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राज्य में प्रति व्यक्ति आय में लगातार हो रही वृद्धि

आर्थिक सर्वेक्षण रिपोर्ट में राज्य में प्रति व्यक्ति आय की चर्चा करते हुए यह कहा गया कि यहां प्रति व्यक्ति आमदनी में लगातार वृद्धि हो रही है. राज्य गठन के समय झारखंड प्रति व्यक्ति आय के मामले में देश के 28 राज्यों की सूची में 26वें पायदान पर था. 2021-22 में यह 25वें पायदान पर पहुंचा.

झारखंड में प्रति व्यक्ति आय 91,874 रुपए हुई

वित्तीय वर्ष 2021-22 में वर्तमान मूल्य पर प्रति व्यक्ति आय 84,095 रुपये थी. वित्तीय वर्ष 2022-23 में यह बढ़ कर 91,874 रुपये हुई. वित्तीय वर्ष 2023-24 में यह बढ़ कर 98,649 रुपये हो गयी. राज्य में जारी विकास दर के आलोक में सरकार ने अगले वित्तीय वर्ष (2024-25) में प्रति व्यक्ति आय बढ़ कर 1,07,027 रुपये होने का अनुमान किया है.

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मुद्रास्फीति आरबीआई की निर्धारित सीमा के अंदर

रिपोर्ट में राज्य में मुद्रास्फीति के रिजर्व बैंक द्वारा निर्धारित सीमा के अंदर होने की बात कही गयी है. रिजर्व बैंक में मुद्रास्फीति दर छह प्रतिशत से कम रखने की नीति निर्धारित की थी. वर्ष 2022-23 में राज्य में मुद्रास्फीति दर 6.1 प्रतिशत थी. चालू वित्तीय वर्ष के दौरान इसके छह प्रतिशत से कम होने का अनुमान है.

राज्य की बेरोजगारी दर में आयी गिरावट

रिपोर्ट में कहा गया है कि राज्य की बेरोजगारी दर में भारी गिरावट आयी है. राज्य में वित्तीय वर्ष 2017-18 में बेरोजगारी दर 7.7 प्रतिशत थी. वित्तीय वर्ष 2022-23 में यह घट कर 1.7 प्रतिशत हो गयी. राज्य में श्रमिक भागीदारी दर और श्रमिक जनसंख्या अनुपात राष्ट्रीय औसत से अधिक है. लेकिन बेरोजगारी दर देश की तुलना में कम है. रिपोर्ट में राज्य के राजस्व की चर्चा करते हुए कहा गया है कि 2016-17 से 2022-23 के बीच राज्य के कर राजस्व में औसतन 11.1 प्रतिशत की वृद्धि हुई.

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झारखंड में टैक्स का मुख्य स्रोत वाणिज्य कर

वाणिज्य कर राज्य के कर राजस्व का मुख्य स्रोत है. राज्य के कर राजस्व में वाणिज्य कर की हिस्सेदारी 80 प्रतिशत रहती थी. हालांकि, अब इसकी हिस्सेदारी कम हुई है. अब यह 70 प्रतिशत तक है. वित्तीय वर्ष 2016-17 से 2022-23 के बीच राज्य के कर राजस्व में वृद्धि हुई. लेकिन, उस अवधि में केंद्रीय करों में राज्य की हिस्सेदारी कम हुई. सर्वेक्षण रिपोर्ट में स्वास्थ्य, शिक्षा, आधारभूत संरचना सहित अन्य क्षेत्रों में प्रगति होने का उल्लेख किया गया है.

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