रांची. केंद्र सरकार द्वारा 15 सितंबर से चीनी डीलरों के लिए संशोधित स्टॉक सीमा लागू किये जाने को लेकर झारखंड में प्रशासन ने जांच तेज कर दी है. नयी व्यवस्था के तहत सामान्य क्षेत्रों में डीलरों के लिए चीनी की अधिकतम स्टॉक सीमा 4,000 क्विंटल से घटाकर 2,000 क्विंटल कर दी गयी है. यह व्यवस्था 15 सितंबर से 30 नवंबर 2026 तक प्रभावी रहेगी. केंद्र सरकार ने यह कदम चीनी की जमाखोरी और सट्टेबाजी पर रोक लगाने तथा घरेलू बाजार में पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए उठाया है.
केंद्र के निर्देश के बाद खाद्य आपूर्ति विभाग के सचिव राजेश शर्मा ने सभी जिला आपूर्ति पदाधिकारियों को चीनी के स्टॉक की जांच और जमाखोरी के खिलाफ कार्रवाई करने का निर्देश दिया है. सचिव के अनुसार, राज्य में केंद्र के दिशा-निर्देशों के अनुरूप जांच की प्रक्रिया शुरू कर दी गयी है. अब तक की जांच में कालाबाजारी का कोई मामला सामने नहीं आया है.
पोर्टल पर टाइपिंग की गलती मिली
विभाग के अनुसार, हाल में फूड स्टॉक मॉनिटरिंग पोर्टल पर एक व्यापारी के स्टॉक से जुडी जानकारी में टाइपिंग की गलती सामने आयी थी. व्यापारी ने क्विंटल की जगह टन दर्ज कर दिया था. जांच के दौरान इस मामले में किसी तरह की अनियमितता नहीं मिली.
डीलरों के लिए पंजीकरण अनिवार्य
नये नियम के तहत चीनी के सभी डीलरों को फूड स्टॉक मॉनिटरिंग पोर्टल पर पंजीकरण कराना होगा. पंजीकरण के बाद डीलरों को अपने मौजूदा स्टॉक की जानकारी पोर्टल पर दर्ज करनी होगी. इसके बाद प्रत्येक शुक्रवार को स्टॉक की स्थिति अपडेट करनी होगी.
राज्यों को डीलरों द्वारा घोषित स्टॉक का समय-समय पर भौतिक सत्यापन करने का भी निर्देश दिया गया है. इसका उद्देश्य पोर्टल पर दर्ज स्टॉक और गोदाम में मौजूद वास्तविक स्टॉक के बीच अंतर को रोकना है.
नियम तोडने पर होगी कार्रवाई
सरकार ने स्पष्ट किया है कि पोर्टल पर पंजीकरण नहीं कराने, गलत जानकारी देने या स्टॉक से जुडी जानकारी छिपाने वाले डीलरों के खिलाफ आवश्यक वस्तु अधिनियम, 1955 के तहत कार्रवाई की जा सकती है.
केंद्र सरकार के अनुसार, स्टॉक सीमा घटाने का उद्देश्य त्योहारी सीजन के दौरान बाजार में चीनी की पर्याप्त उपलब्धता बनाए रखना, जमाखोरी और सट्टेबाजी पर अंकुश लगाना तथा कीमतों को नियंत्रित रखने में मदद करना है.
