पंकज त्रिपाठी की रिपोर्ट
रांचीः झारखंड लोक सेवा आयोग (जेपीएससी) कार्यालय में सीआइडी की छापेमारी के बीच द्वितीय झारखंड सिविल सेवा परीक्षा में हुई कथित गड़बड़ी की परतें एक बार फिर खुलने लगी हैं. सीबीआइ ने भी अपनी जांच में वही तथ्य पाए हैं, जिनका उल्लेख राज्य निगरानी ब्यूरो पहले ही अपनी जांच में कर चुका था. इसके बावजूद मामले में चयनित कई अभियुक्त अब तक बेरोकटोक नौकरी कर रहे हैं. इस बीच सीबीआइ ने मामले की दोबारा जांच शुरू कर दी है और अपनी पूर्व जांच रिपोर्ट कोर्ट में दाखिल की है, जिसमें कई चौंकाने वाले तथ्य सामने आए हैं,
रिपोर्ट के अनुसार, परीक्षा की कोडिंग-डिकोडिंग प्रक्रिया में गंभीर खामियां थी. ग्राफ वाले प्रश्नों में रोल नंबर और नाम वाला कॉलम सही तरीके से कोड नहीं किया गया था, जिससे कोडेड उत्तर पुस्तिकाओं की पहचान आसानी से की जा सकती थी. इसके अलावा कुछ अभ्यर्थियों ने अपनी उत्तर पुस्तिकाओं में विशेष चिह्न बनाकर पहचान सुनिश्चित की. आरोप है कि कई अभ्यर्थियों ने कॉपी में 'ॐ साई नाथ' जैसे शब्द लिखकर अपनी पहचान गुप्त रूप से दर्ज कराई.
सीबीआइ जांच से पहले राज्य विजिलेंस की पांच चार्जशीट
सीबीआइ जांच से पहले राज्य निगरानी ब्यूरो (विजिलेस) ने मामले में पांच अलग-अलग चार्जशीट दाखिल की थी. पहली चार्जशीट एलिस उषा रानी सिंह के विरुद्ध, दूसरी दिलीप कुमार प्रसाद, गोपाल प्रसाद सिंह, सोहन राम, बतेश्वर पंडित और अलबर्ट टोप्पो, तीसरी चार्जशीट शांति देवी, सरस्वती गागराई, अनिल बिरेंद्र कुल्लू और आरती बेहरा के विरुद्ध, चौथी एनसीसीएफ के धीरज कुमार के विरुद्ध व पांचवी चार्जशीट परमानंद सिंह, नंद लाल और अरविंद कुमार सिंह के विरुद्ध दाखिल की गई थी.
CBI रिपोर्ट में सामने आए कई नेताओं के रिश्तेदारों के नाम
जांच रिपोर्ट के मुताबिक, सोहन सिंह खांका सहित 52 अतिरिक्त अभ्यर्थियों पर भी संदेह जताया गया था, लेकिन पर्याप्त साक्ष्य नहीं मिलने के कारण उन्हें 'चार्जशीट नहीं किए गए आरोपी' (आइटम-12) की श्रेणी में रखा गया. यानी जांच में संदेह के बावजूद उनके खिलाफ अभियोजन नहीं चलाया जा सका. सीबीआइ की रिपोर्ट में कई नेताओं के रिश्तेदारों के नाम सामने आए हैं, जिनका इस कथित गड़बड़ी से संबंध बताया गया है. हालांकि, आरोप लगाया जा रहा है कि रिपोर्ट में अधिकारियों के रिश्तेदारों से जुड़ी जानकारी को दबा दिया गया.
