CCL कर्मचारी की मौत के बाद बहन ने मांगी नौकरी, हाईकोर्ट ने कहा- नियम बदलने से पहले मौत हुई तो भी दावा खारिज नहीं कर सकते

झारखंड हाईकोर्ट ने अविवाहित बहन को अनुकंपा नियुक्ति से वंचित करने का आदेश रद्द कर दिया है. CCL को छह सप्ताह में नियुक्ति पत्र जारी करने का निर्देश. जानिए पूरा मामला.

रांची. झारखंड हाइकोर्ट ने सीसीएल कर्मचारी की मौत के बाद उसकी अविवाहित बहन को अनुकंपा नियुक्ति से वंचित करने के आदेश को रद्द कर दिया है. न्यायमूर्ति दीपक रोशन की अदालत ने सेंट्रल कोलफील्ड्स लिमिटेड (सीसीएल) को याचिकाकर्ता स्मृति कुमारी को छह सप्ताह के भीतर नियुक्ति पत्र जारी करने का निर्देश दिया.

अदालत ने कहा कि एनसीडब्ल्यूए-11 के तहत 11 जून 2024 से अविवाहित बहन को भी आश्रित की श्रेणी में शामिल किया गया है. संशोधन के बाद यदि निर्धारित 18 माह की अवधि के भीतर नियुक्ति के लिए आवेदन किया गया है, तो सिर्फ इस आधार पर दावा खारिज नहीं किया जा सकता कि संबंधित कर्मचारी की मौत संशोधन से पहले हुई थी.

कर्मचारी की सेवा के दौरान हुई थी मौत

मामला रामगढ़ के कुजू कॉलोनी निवासी अनीता देवी की बेटी स्मृति कुमारी से जुड़ा है. उनके भाई और सीसीएल कर्मचारी अंशु उरांव की सेवा के दौरान तीन अगस्त 2023 को मौत हो गयी थी. इसके बाद अनुकंपा नियुक्ति के लिए आवेदन किया गया था, जिसे सीसीएल ने खारिज कर दिया.

बाद में 11 जून 2024 को एनसीडब्ल्यूए-11 के तहत आश्रित की परिभाषा में बदलाव किया गया और अविवाहित बहन को भी इसमें शामिल किया गया. इसके बाद स्मृति कुमारी ने 18 जून और 24 जुलाई 2024 को नियुक्ति के लिए आवेदन किया. दोनों आवेदन निर्धारित 18 माह की अवधि के भीतर किये गये थे.

संशोधन को भविष्य से लागू करने के तर्क को कोर्ट ने नहीं माना

सीसीएल की ओर से संशोधन को भविष्य से लागू होने का तर्क दिया गया. कोर्ट ने इस आधार पर नियुक्ति से इनकार को उचित नहीं माना. अदालत ने स्पष्ट किया कि संशोधन के बाद और निर्धारित अवधि के भीतर आवेदन किये जाने की स्थिति में केवल कर्मचारी की मौत संशोधन से पहले होने के आधार पर अनुकंपा नियुक्ति के दावे को खारिज नहीं किया जा सकता.

अदालत के आदेश के बाद सीसीएल को स्मृति कुमारी को छह सप्ताह के भीतर नियुक्ति पत्र जारी करना होगा.

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By Manoj Kumar Singh

मनोज सिंह प्रभात खबर में बतौर मुख्य संवाददाता कार्यरत है. पत्रकारिता में उनका 26 साल का अनुभव है. दैनिक हिन्दुस्तान में करीब आठ साल काम करने के बाद वह प्रभात खबर से जुड़े हैं. कृषि, पशुपालन, सहकारिता, वन, जलवायु परिवर्तन, आजीविका, मनोरोग, कोयला संबंधी खबरों में वर्षों काम करने का अनुभव है.

आइआइटी कानपुर से जस्ट ट्रांजिशन विषय पर फेलोशिप प्राप्त करने वाले देश के पहले संवाददाता है. उनको दो बार एग्रई जर्निलिज्म अवार्ड मिल चुका है. झारखंड सरकार के वन विभाग से तिलका मांझी अवार्ड मिला है. कई मचों पर वह प्रभात खबर का प्रतिनिधित्व कर चुके हैं. कई राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय कार्यशाला में हिस्सा ले चुके हैं.


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