सतीश कुमार
रांची : झारखंड में परीक्षाओं में हो रही लगातार अनियमितताओं और पेपर लीक के मामलों को लेकर सियासी पारा चढ़ गया है. शनिवार को प्रदेश भाजपा कार्यालय में पत्रकारों से बातचीत करते हुए पूर्व मुख्यमंत्री रघुवर दास ने कांग्रेस, झामुमो और इंडिया गठबंधन पर निशाना साधा. उन्होंने सवाल उठाया कि जो दल नीट के मामले में केंद्रीय शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग कर रहे हैं, वे झारखंड लोक सेवा आयोग (जेपीएससी) और जेएसएससी में व्याप्त भ्रष्टाचार पर चुप्पी क्यों साधे हुए हैं. उन्होंने कहा कि झारखंड ने एक साथ नौ प्रतियोगिता परीक्षाएं स्थगित करने का अनचाहा रिकॉर्ड बनाया है, जो युवाओं के साथ क्रूर मजाक है.
उत्पाद सिपाही भर्ती परीक्षा में मौत मामले में सरकार को घेरा
उन्होंने आगे कहा कि हाल ही में हुई क्षेत्रीय कार्यकर्ता प्रतियोगिता परीक्षा में कई छात्रों को परीक्षा खत्म होने के बाद प्रवेश पत्र डाउनलोड करने का लिंक मिला और संथाली भाषा के प्रश्नपत्र में 40 से अधिक प्रश्न पाठ्यक्रम से बाहर से पूछे गए. इसके अलावा, उत्पाद सिपाही भर्ती परीक्षा की दौड़ के दौरान 12 आदिवासी-मूलवासी युवाओं की असमय मौत और सैकड़ों के घायल होने की घटना को सरकार की नाकामी बताया. श्री दास ने आरोप लगाते हुए कहा कि 14वीं जेपीएससी पीटी परीक्षा के लिए उत्तर प्रदेश की एक ब्लैकलिस्टेड निजी एजेंसी (टीडीपीएल) को चयन प्रक्रिया की बड़ी जिम्मेदारी सौंपी गयी है.
ब्लैकलिस्टेड कंपनी को दी गई चयन की जिम्मेदारी
रघुवर दास ने आगे कहा कि जबकि इस एजेंसी को 2025 में झारखंड में जेएसएससी द्वारा भी ब्लैक लिस्टेड किया जा चुका है. उन्होंने इस पूरे मामले की सीबीआई जांच की मांग की है. श्री दास ने केंद्र सरकार के कदमों की सराहना करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पेपर लीक के खिलाफ सख्त कानून लागू किया है, जिसमें 10 साल की सजा और 10 करोड़ रुपये तक के जुर्माने का प्रावधान है. केंद्र ने नीट-यूजी की दोबारा परीक्षा पारदर्शी तरीके से आयोजित कर युवाओं को राहत दी है. राज्य सरकार से उत्पाद सिपाही परीक्षा में जान गंवाने वाले युवाओं के परिजनों को एक-एक करोड़ रुपये का मुआवजा देने की मांग की. साथ ही छात्रों से अपील की गयी कि वे किसी राजनीतिक उकसावे में न आयें और शांतिपूर्ण तरीके से अपनी बात रखें.
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