Birth Certificate Update Jharkhand, रांची : अगर किसी के घर में बच्चे का जन्म होता है तो वहां पर खुशियां आना लाजमी है. लेकिन उसके जन्म होते ही माता-पिता पर जिम्मेदारी बढ़ जाती है. सबसे पहली जिम्मेवारी है बच्चे का जन्म प्रमाण पत्र (Birth Certificate) बनवाना. यह दस्तावेज केवल एक सरकारी कागज नहीं, बल्कि बच्चे की कानूनी पहचान का पहला प्रमाण है. भविष्य में स्कूल या कॉलेज में नामांकन, आधार कार्ड जारी कराने, पासपोर्ट बनवाने से लेकर तमाम सरकारी-गैर सरकारी योजनाओं का लाभ उठाने के लिए जन्म प्रमाण पत्र अनिवार्य रूप से मांगा जाता है. सरकार भी माता-पिता को सलाह देती है कि वे अस्पताल से डिस्चार्ज होते ही इस प्रक्रिया में लग जाएं ताकि आगे चलकर प्रशासनिक कागजी कार्रवाई में न उलझना पड़े. हालांकि जन्म प्रमाण पत्र बनवाने की प्रक्रिया इस बात पर निर्भर करती है कि बच्चे का जन्म कहां हुआ है. यदि आपका जन्म झारखंड के किसी सरकारी अस्पताल या सदर अस्पताल में हुआ है, तो वहां की प्रबंधन टीम जन्म का रिकॉर्ड संबंधित निकाय को भेजती है. अस्पताल से प्राप्त जन्म पर्ची, डिस्चार्ज स्लिप और माता-पिता के पहचान पत्रों के साथ प्रपत्र भरकर संबंधित नगर निगम, नगरपालिका या पंचायत सचिवालय में जमा करना होता है. वहीं, यदि जन्म झारखंड के किसी निजी अस्पताल या नर्सिंग होम में हुआ है, तो वहां से जारी जन्म डिस्चार्ज समरी के आधार पर नगर निगम या स्थानीय प्रज्ञा केंद्र (CSC) के जरिए ऑनलाइन/ऑफलाइन आवेदन जमा किया जाता है. आवेदन पत्र में बच्चे का नाम (यदि तय हो गया हो), माता-पिता का नाम, जन्म की तारीख और सही पता भरना अनिवार्य है।
21 दिनों की तय समय सीमा और छूट का नियम
जन्म एवं मृत्यु पंजीकरण अधिनियम के तहत शिशु के जन्म के 21 दिनों के भीतर रजिस्ट्रेशन कराना पूरी तरह निःशुल्क और बेहद सरल है. 21 दिनों के अंदर आवेदन करने पर न्यूनतम दस्तावेजों के साथ तुरंत प्रमाण पत्र जारी कर दिया जाता है. इस समयावधि के भीतर पंजीकरण कराने पर माता-पिता को न तो किसी अतिरिक्त शुल्क का भुगतान करना पड़ता है और न ही किसी प्रशासनिक प्रक्रिया से गुजरना पड़ता है. इसलिए 21 दिनों की समय सीमा का ध्यान रखना बेहद जरूरी है.
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21 दिन से अधिक की देरी होने पर अतिरिक्त नियम
यदि किसी कारणवश 21 दिनों की समय सीमा बीत जाती है, तो प्रक्रिया थोड़ी जटिल हो जाती है. 21 दिन से 30 दिन के भीतर पंजीकरण कराने पर विलंब शुल्क (Late Fee) देना पड़ता है. यदि देरी 30 दिन से अधिक और एक वर्ष के भीतर हो, तो संबंधित क्षेत्र के कार्यपालक दंडाधिकारी या अंचलाधिकारी (CO) से अनुमति पत्र और नोटरी से एफिडेविट (शपथ पत्र) लगाना पड़ता है. एक वर्ष से अधिक की देरी होने पर मामला अनुमंडलाधिकारी (SDO) कोर्ट के आदेश के बाद ही आगे बढ़ता है, जिसमें अस्पताल की पर्ची, एफिडेविट और स्थानीय जांच रिपोर्ट अनिवार्य होती है.
आवेदन के लिए आवश्यक दस्तावेजों की सूची
झारखंड में नवजात के जन्म प्रमाण पत्र के लिए आवेदन करते समय इन कागजातों को जमा करना जरूरी है:
- अस्पताल से प्राप्त जन्म पर्ची/डिस्चार्ज समरी की मूल प्रति
- माता-पिता दोनों के आधार कार्ड की छायाप्रति
- माता-पिता का आवासीय प्रमाण पत्र या राशन कार्ड
- विधिवत भरा हुआ निर्धारित आवेदन पत्र (फॉर्म-1)
- मोबाइल नंबर (ओटीपी और स्टेटस अपडेट के लिए)
- (21 दिन के बाद आवेदन करने पर) कार्यपालक दंडाधिकारी से स्वीकृत एफिडेविट
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