टॉफी-बैलून का लालच दे बुनते हैं जाल फिर होती मासूमों की सौदेबाजी, अंश-अंशिका केस से मिर्जापुर गैंग का पर्दाफाश

Ansh Anshika Case: रांची के धुर्वा से लापता भाई-बहन अंश और अंशिका को पुलिस की एसआईटी ने रामगढ़ से सकुशल बरामद कर लिया. जांच में मिर्जापुर आधारित मानव तस्करी गिरोह का बच्चों को टॉफी-बैलून का लालच देकर अगवा करने और उन्हें बेचने के खौफनाक नेटवर्क का खुलासा हुआ. इस पूरे मामले में प्रभात खबर की स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम की अहम भूमिका रही.

By Sameer Oraon | January 15, 2026 8:03 AM

Ansh Anshika Case: रांची के धुर्वा से लापता भाई-बहन अंश और अंशिका को बुधवार, 14 जनवरी को रांची पुलिस की एसआइटी और स्थानीय रामगढ़ पुलिस ने बरामद कर लिया. दोनों बच्चे रामगढ़ जिले के रजरप्पा में चितरपुर स्थित रौशन आरा के किराये के घर से सकुशल मिले. घासी टोला निवासी सन्नी नायक ने दोनों बच्चों के अपहरण के आरोपी नभ खेरवार और सोनी कुमारी को घर दिलाया था. इनके पास से ही बच्चे बरामद किये गये हैं. नभ औरंगाबाद के बारुण का निवासी है. दोनों से पूछताछ जारी है. मासूमों की बरामदगी के लिए पुलिस की एसआइटी के साथ-साथ प्रभात खबर की भी स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम ने अभियान चलाया था. पुलिस को जिस इलाके से दोनों बच्चे मिले हैं, वहां तक प्रभात खबर की इन्वेस्टिगेशन टीम भी पड़ताल करते हुए पहुंची थी. प्रभात खबर की एसआइटी ने वहीं पर बच्चों के होने के संकेत दिये थे.

पहले लापता हुए बच्चों के मामलों को खंगालना शुरू किया तब मिली जानकारी

अंश-अंशिका के मामले में कई पहलुओं पर जांच करने के बाद पुलिस ने पहले लापता हुए बच्चों के मामलों को खंगालना शुरू किया. इस क्रम में रांची के चुटिया थाना में 12 मई 2024 को दर्ज केस और पुरुलिया थाना में दर्ज एक अन्य केस की पड़ताल रांची पुलिस की एसआइटी ने शुरू की. चुटिया थाना में लातेहार के गारू निवासी प्रदीप लोहरा का नौ माह का बच्चा रांची रेलवे स्टेशन के बाहर से गायब हुआ था. दोनों केस की जांच में पता चला कि नभ खेरवार और उसकी पत्नी सोनी कुमारी की भागीदारी है.

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पुलिस ने नभ खरवार के मोबाइल को आधार बनाकर की छानबीन

वहीं, धुर्वा थाना क्षेत्र के शहीद मैदान से दो जनवरी को अंश-अंशिका के लापता होने में भी नभ खेरवार का मोबाइल नंबर आया. इसके बाद रांची पुलिस ने इसको आधार बनाकर आगे की जांच शुरू की तो पता चला कि उत्तरप्रदेश के मिर्जापुर के मानव तस्कर गिरोह से दोनों जुड़े हैं. पुलिस इसकी पड़ताल कर रही है

बच्चे को अकेला पाकर अगवा कर लेते हैं

पुलिस की जांच में यह बात सामने आयी कि मिर्जापुर गैंग का रहन-सहन गुलगुलिया गैंग की तरह है. लेकिन गुलगुलिया गैंग रेकी कर घटना को अंजाम देता है. वहीं मिर्जापुर गैंग को क्षेत्र में घूमते हुए अगर कोई बच्चा किसी जगह पर आधा से एक घंटे तक अकेले घूमते-फिरते मिल जाता है, तो यह गिरोह बच्चों को बैलून और टॉफी का लालच देकर वहां से दूर ले जाता है. फिर उन्हें मिर्जापुर तक पहुंचाता है. गुलगुलिया गैंग वाला हाव-भाव देखकर ही पुलिस ने सबसे पहले गुलगुलिया गैंग के ठिकानों पर दबिश दी थी. वहीं प्रभात खबर की टीम ने भी कई जगहों पर गुलगुलिया गैंग की पड़ताल की थी. मिर्जापुर गिरोह बच्चों को औने-पौने दाम में नि:संतान दंपती को बेच देता है या फिर भीख मंगवाने वाले गैंग को.

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