Ayatollah Arafi : 28 फरवरी को अमेरिका और इजरायल के हमलों में ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई की मौत के बाद उनके उत्तराधिकारी और कार्यवाहक सुप्रीम लीडर के रूप में अयातुल्ला अलीरेजा अराफी को ईरान की बागडोर सौंपी गई है. अयातुल्ला अराफी एक मौलवी हैं और उनकी उम्र 67 वर्ष है.
कौन हैं अयातुल्ला अलीरेजा अराफी?
अयातुल्ला अलीरेजा अराफी पेशे से एक अनुभवी मौलवी हैं. उनके बारे में यह कहा जा रहा है कि वे अयातुल्ला खामेनेई के काफी करीबी थे. ईरानी स्टूडेंट्स न्यूज एजेंसी (ISNA) की ओर से यह जानकारी सामने आयी है कि अयातुल्ला अराफी को लीडरशिप काउंसिल का ज्यूरिस्ट सदस्य नियुक्त किया गया है. तीन सदस्यों वाली लीडरशिप काउंसिल में राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन और चीफ जस्टिस घोलमहुसैन मोहसेनी एजेई भी शामिल हैं. अराफी अभी असेंबली ऑफ एक्सपर्ट्स के डिप्टी चेयरमैन के तौर पर काम कर रहे हैं, जो सुप्रीम लीडर को नियुक्त करती है. उनकी उम्र 67 साल है.
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ईरान में सुप्रीम लीडर का पद खाली हो जाये , तो क्या है व्यवस्था?
ईरान के संविधान के अनुसार अगर वहां के सुप्रीम लीडर का पद खाली हो जाए तो एक अस्थायी लीडरशिप काउंसिल बनाई जाती है, जिसमें राष्ट्रपति, न्यायपालिका प्रमुख और गार्जियन काउंसिल का एक ज्यूरिस्ट सदस्य शामिल हो सकता है. अराफी की नियुक्ति इसी ज्यूरिस्ट सदस्य के तौर पर हुई है जो यह सुनिश्चित करेगा कि देश के फैसले इस्लामी कानून और संविधान के अनुरूप हों. ईरान का सुप्रीम लीडर देश की मिलिट्री का कमांडर-इन-चीफ होता है, इसके अलावा ताकतवर रिवोल्यूशनरी गार्ड भी उनके असर वाले सर्कल का हिस्सा होता है.
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