दुबई में फंसे झारखंड के 100 से अधिक लोग, अब भारत सरकार से मदद की गुहार

Ranchi: इस्राइल और इरान के बीच जंग के कारण दुबई के कई एयरपोर्ट सुरक्षा कारणों से बंद कर दिए गए हैं और वहां झारखंड के 100 से ज्यादा लोग फंस गए हैं. ये सभी एक बिजनेस टूर पर गए थे और कईयों के साथ उनके परिवार के लोग भी हैं.

Ranchi: झारखंड के करीब 100 लोग दुबई में फंसे हुए हैं. दुबई में हुए हमलों के बाद वहां के एयरपोर्ट बंद कर दिए गए हैं और एक बिजनेस टूर पर गए सैकड़ों झारखंडी लोग वहां फंस गए हैं. सभी ने भारत सरकार से मदद की गुहार लगाई है. कॉर्पोरेट टूर पर गए ये लोग अब डर और अनिश्चितता के बीच होटल के कमरों में ठहरे हुए हैं. उनके परिवारों की चिंता बढ़ती जा रही है और हालात पर सबकी नजर टिकी है.

कॉर्पोरेट टूर बना संकट

जानकारी के अनुसार, ये सभी लोग एक प्राइवेट कंपनी के कॉर्पोरेट टूर पर दुबई गए थे. करीब 100 लोगों का यह समूह झारखंड के अलग-अलग जिलों — रांची, जमशेदपुर, पलामू, गिरिडीह, चतरा और खूंटी से है. इस समूह में केवल कर्मचारी ही नहीं, बल्कि कई लोग अपने परिवार के साथ भी गये थे. यानी यह सिर्फ एक आधिकारिक यात्रा नहीं, बल्कि कई परिवारों के लिए छुट्टी और खुशी का अवसर था, जो अचानक तनाव में बदल गया.

‘हम होटल में सुरक्षित हैं, लेकिन धमाकों की आवाज आ रही है’

रांची के एक व्यक्ति ने सुरक्षा कारणों से पहचान गुप्त रखने की शर्त पर अपना वीडियो शेयर किया है. इस वीडियो में होटल की बालकनी से दूर तक धमाकों की आवाज सुनाई दे रही है. उनका कहना है, ‘हम लोग रांची से दुबई आए थे… 28 तारीख को अबू धाबी एयरपोर्ट से रांची लौटना था… तभी यहां बम गिरने लगे… एयरपोर्ट बंद हो गया… किसी तरह हमें दुबई लाकर होटल में रखा गया है… होटल में सुरक्षित हैं… मगर आसपास धमाकों की आवाज आ रही है… इंडिया गवर्नमेंट से अपील है कि हमें सुरक्षित निकाला जाए…’

यह बयान उस मानसिक स्थिति को दर्शाता है जिसमें ये सभी लोग इस समय हैं — सुरक्षित तो हैं, लेकिन अनिश्चितता और भय के माहौल में.

दुबई में फंसे झारखंड के लोग

रांची से दुबई: कृष्णाकांत गिरी की आपबीती

रांची निवासी कृष्णाकांत गिरी, जो अपनी पत्नी के साथ इस टूर में शामिल हैं, ने फोन पर बातचीत में बताया, ‘पूरा रांची के अगल-बगल से… जमशेदपुर, पलामू, गिरिडीह… सब मिला करके करीब 100 लोग हैं… फैमिली टूर था…’ उन्होंने यह भी बताया कि अभी तक कंपनी की ओर से होटल और खाने-पीने की व्यवस्था की जा रही है. तत्काल किसी तरह की दिक्कत नहीं है. उन्होंने कहा, ‘अभी तक कोई दिक्कत नहीं है… कंपनी ने होटल और खाना-पीना सब अच्छा किया है…’ इसके बावजूद, मुख्य चिंता सुरक्षित वापसी को लेकर है.

झारखंड में मौजूद परिवार में बढ़ी बेचैनी

रांची और अन्य जिलों में बैठे परिवार टीवी और मोबाइल पर खबरें देख रहे हैं. हर फोन कॉल के साथ दिल की धड़कन तेज हो जाती है. उधर दुबई की बालकनी से आती धमाकों की आवाजें आ रही है और इधर रांची के घरों में बेचैनी और इंतजार बढ़ता जा रहा है. यह सिर्फ विदेश में फंसे लोगों की कहानी नहीं है, बल्कि झारखंड के उन परिवारों की भी है जो अपने प्रियजनों की सुरक्षित वापसी का इंतजार कर रहे हैं.

सरकार से अपील

फंसे हुए लोगों ने भारत सरकार से सुरक्षित निकासी की अपील की है. परिवारों को उम्मीद है कि जल्द ही केंद्र सरकार और संबंधित एजेंसियां हस्तक्षेप कर इन सभी को सुरक्षित स्वदेश लाने की व्यवस्था करेंगी.

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By AmleshNandan Sinha

अमलेश नंदन सिन्हा प्रभात खबर डिजिटल में वरिष्ठ पत्रकार के रूप में कार्यरत हैं. इनके पास हिंदी पत्रकारिता में 20 से अधिक वर्षों का अनुभव है. रांची विश्वविद्यालय से पत्रकारिता की पढ़ाई करने के बाद से इन्होंने कई समाचार पत्रों के साथ काम किया. इन्होंने पत्रकारिता की शुरुआत रांची एक्सप्रेस से की, जो अपने समय में झारखंड के विश्वसनीय अखबारों में से एक था. एक दशक से ज्यादा समय से ये डिजिटल के लिए काम कर रहे हैं. झारखंड की खबरों के अलावा, समसामयिक विषयों के बारे में भी लिखने में रुचि रखते हैं. विज्ञान और आधुनिक चिकित्सा के बारे में देखना, पढ़ना और नई जानकारियां प्राप्त करना इन्हें पसंद है.

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