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रांची : 88% भवन मालिकों ने नहीं बनवाया रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम...इसीलिए पाताल में जा रहा है पानी

Updated at : 07 Jul 2019 8:23 AM (IST)
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रांची : 88% भवन मालिकों ने नहीं बनवाया रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम...इसीलिए पाताल में जा रहा है पानी

रांची : रांची में जब भी जल संकट का मुद्दा उठता है, लोग बारिश का पानी बचाने और भूजल को रिचार्ज करने की बात करने लगते हैं. ज्ञान बघारा जाता है कि ज्यादा से ज्यादा भवनों में रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम बनाया जाना चाहिए. हालांकि, ये बातें केवल कहने भर की हैं. वास्तविकता यह है […]

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रांची : रांची में जब भी जल संकट का मुद्दा उठता है, लोग बारिश का पानी बचाने और भूजल को रिचार्ज करने की बात करने लगते हैं. ज्ञान बघारा जाता है कि ज्यादा से ज्यादा भवनों में रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम बनाया जाना चाहिए.
हालांकि, ये बातें केवल कहने भर की हैं. वास्तविकता यह है कि राजधानी रांची के 88 प्रतिशत घरों में रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम नहीं बनाया गया है. यह हाल तब है, रांची नगर निगम ने रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम नहीं बनाने वालों से डेढ़ गुना होल्डिंग टैक्स वसूलने का नियम बना रखा है.
रांची नगर निगम क्षेत्र में कुल 1.88 लाख मकान हैं. नगर निगम के ही आंकड़े बताते हैं कि इन मकानों में से केवल 22 हजार (करीब 12 प्रतिशत) में ही रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम बनाया गया है. शेष 1.66 लाख मकानों (करीब 88 प्रतिशत) में बारिश का पानी बचाने की कोई व्यवस्था नहीं है.
भूगर्भ वैज्ञानिकों के मुताबिक मौजूदा समय में इंसान जमीन से जितना पानी अपने उपयोग के लिए निकाल रहा है, उसका मात्र पांच प्रतिशत ही जमीन को वापस लौटा रहा है. ऐसे ही हालात राजधानी के भी हैं. यही वजह है कि यहां साल-दर-साल गर्मी के मौसम में जल संकट भयावह रूप लेता जा रहा है.
हालात बदलने के लिए सोच बदलनी होगी
नयी होल्डिंग टैक्स नियमावली से नगर निगम की चांदी, लेकिन जल संरक्षण पर गंभीर नहीं
रेन वाटर हार्वेस्टिंग नहीं बनावाने वालों से डेढ़ गुना होल्डिंग टैक्स वसूलने का बनाया है नियम
पिछले वर्ष 48 करोड़ रुपये टैक्स के रूप में वसूल चुका है रांची नगर निगम इस नियम के तहत
नगर निगम, तैयार किये तीन नये प्रस्ताव
1. नगर निगम ने होल्डिंग टैक्स नियमावली में संशोधन का प्रस्ताव तैयार किया है. इसके तहत अब 1000 वर्गफीट में बने घरों में भी रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम बनवाना जरूरी कर दिया जायेगा. जबकि इससे पहले 3000 वर्गफीट या उससे ऊपर के भूखंड या मकान के लिए ही रेन वाटर हार्वेस्टिंग की अनिवार्यता थी. जल्द ही इस प्रस्ताव को निगम बोर्ड की बैठक में पास करा कर सरकार के पास भेजा जायेगा.
2. जिन घरों में भी रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम बना होगा, कम से कम पांच पेड़ और वाटर रिसाइकल का सिस्टम लगा होगा, उन्हें रांची नगर निगम स्मार्ट हाउस का दर्जा देगा. निगम की टीम दावेदारों के घर जाकर सभी चीजों की जांच करेगी. सब कुछ मानक के अनुरूप पाया गया, तो स्मार्ट हाउस के मालिक को प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया जायेगा. साथ ही होल्डिंग टैक्स में 10 से 25 प्रतिशत की छूट भी दी जायेगी.
3. नगर निगम ने सभी रजिस्टर्ड इंजीनियरों को आदेश दिया है कि वे 10-10 बहुमंजिली इमारतों में रेनवाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम का निर्माण करायें
400 फीट बोरिंग कराने के बावजूद नहीं मिल रहा है पानी
भू-जलस्तर नीचे जाने की वजह से शहर के हरमू, मधुकम, विद्यानगर, गंगानगर, स्वर्ण जयंती नगर, यमुना नगर आदि इलाके ड्राई जोन में तब्दील हो चुके हैं. इन इलाकों में इस साल 600 से अधिक निजी बोरिंग की गयी.
हालत यह है कि 400-650 फीट तक बोरिंग कराने के बाद भी पानी निकलने की गारंटी नहीं है. वहीं, नगर निगम ने भी एक माह पहले 15 से अधिक बोरिंग करायी थी. दो सप्ताह तक इनसे पानी भी निकला, लेकिन बाद में इन बोरिंग ने भी जवाब दे दिया. इधर, वार्ड-28 के स्वर्ण जयंती नगर के एक मोहल्ले में 850 मकान हैं. इनमें से 600 घरों में बोरिंग करायी गयी है. इस बार के गर्मी में ये सभी बोरिंग सूख गयीं.
रेन वाटर हार्वेस्टिंग से बचाया 12 लाख लीटर पानी
मनोज ने पेश किया मॉडल, कर रहे दावा
गर्म में हलक सूखे थे. हम-आप पानी के लिए तरस रहे थे. पाताल से भी पानी निकालने के लिए बेदम थे. गली-मुहल्ले में पानी के लिए मारा-मारी थी.
गर्मी भर प्रकृति संरक्षण, पेड़ लगाने, वाटर बॉडी को रिचार्ज करने की बात खूब हुई. दरअसल, समय अब आया है. मॉनसून ब्रेक कर चुका है. बरसात की पानी को बेकार बहने से बचाना है. प्रभात खबर समाज के ऐसे सजग-सचेत लोगों के प्रयास को सामने ला रहा है, जिन्होंने पानी के संरक्षण के प्रयास किया है. यूं कहें कि पानी की खेती कर रहे हैं. सामाजिक सरोकार का प्रतिमान गढ़ा है.
रांची : साईं विहार कॉलोनी रातू रोड के रहनेवाले मनोज कुमार ने वर्ष 2015 में ही अपने घर में रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम बनवाया था. मनोज के प्रयास से जैसे कॉलोनी में जागृति आ गयी. इसके बाद वाटर हार्वेस्टिंग की होड़ सी लग गयी.
मनोज कुमार की मानें, तो इसके लिए उन्होंने छत में जमा होनेवाले बारिश के पानी को धरती में भेजने के के लिए पाइप लगाया हुआ है. इस पाइप को एक रेनी फिल्टर से जोड़ दिया गया है. जैसे ही बारिश होता है, पानी रेनी फिल्टर से होते हुए धरती के अंदर बनाये गये एक हजार लीटर क्षमता वाले टैंक में पहुंच जाता है.
इस टंकी के सबसे निचले हिस्से में 40 मिमी का गोल पत्थर, फिर 20 मिमी व उसके ऊपर में 10 मिमी का पत्थर डाला गया है. पत्थरों की परत की ऊंचाई एक फीट है. इसके ऊपर छह इंच की चारकोल की मोटी परत बिछायी गयी है.
इसके ऊपर बालू डाला गया है. बालू के ऊपर 10 मिमी साइज का पत्थर डाला गया है. इस टंकी का कनेक्शन बोरिंग से कर दिया गया है. इस प्रकार जब भी बारिश होती है. पहले बारिश में हम छत को पूरी तरह से साफ कर देते हैं. फिर उसके बाद का सारा बारिश का पानी इस टंकी के माध्यम से होते हुए बोरिंग में चला जाता है.
हमसे साझा करें, अपने प्रयास
प्रभात खबर ऐसे सजग लोगों के प्रयास और प्रयोग को प्रमुखता देगा. इससे समाज के अंदर पानी संरक्षण का माहौल बने, लोग आगे आयें. आप हमें अपने अनूठे प्रयास मोबाइल नंबर- 9431188711, पर साझा कर सकते हैं.
रांची : रेन वाटर हार्वेस्टिंग न करानेवाले बिल्डर का नक्शा पास नहीं होगा
रांची : राजधानी में गंभीर जल संकट को देखते हुए रांची नगर निगम अपने क्षेत्र के बिल्डरों पर लगाम लगाने की तैयारी में है. आगामी बोर्ड की बैठक में इस संबंध में उप महापौर संजीव विजयवर्गीय द्वारा प्रस्ताव भी लाया जायेगा.
इसके तहत रांची नगर निगम से नक्शा पास करवा कर बहुमंजिली इमारत का निर्माण करने वाले बिल्डर को हर हाल में अपने अपार्टमेंट में रेन वाटर हार्वेस्टिंग का निर्माण करना होगा. अगर बिल्डर ने ऐसा नहीं किया, तो भविष्य में उस बिल्डर के द्वारा नगर निगम में किये गये किसी भी प्रोजेक्ट के आवेदन को रिजेक्ट कर दिया जायेगा.
छूट का नाजायज लाभ उठाया बिल्डरों ने : पहले रांची नगर निगम में बहुमंजिली इमारतों का नक्शा इसी शर्त पर पास होता था कि बिल्डर अपने भवन में रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम का निर्माण करायेगा. लेकिन, पूर्व में जल संकट जैसी कोई स्थिति उत्पन्न नहीं होने के कारण निगम यह जांच कभी नहीं करता था.
अब जब प्रधानमंत्री मोदी ने जल संरक्षण का नारा दिया है, तो नगर निगम के अधिकारी एक बार फिर से रेस हो गये हैं. सभी अपार्टमेंटों की जांच की जा रही है. साथ ही बिल्डरों को यह निर्देश दिया जा रहा है कि वे हर हाल में अपने अपार्टमेंट में रेन वाटर हार्वेस्टिंग का निर्माण करायें.
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