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भारतीय भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण संस्थान के कुजू फील्ड ट्रेनिंग सेंटर का होगा कायाकल्प

Updated at : 22 May 2024 9:42 PM (IST)
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भारतीय भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण संस्थान के कुजू फील्ड ट्रेनिंग सेंटर का होगा कायाकल्प

भारतीय भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण संस्थान के कुजू फील्ड ट्रेनिंग सेंटर का होगा कायाकल्प

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धनेश्वर प्रसाद, कुजू जियोलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया के कुजू स्थित फील्ड ट्रेनिंग सेंटर का कायाकल्प होगा. यहां पर देश के विभिन्न राज्यों से भू-वैज्ञानिक प्रशिक्षण लेने के लिए आते हैं. डटमा मोड़ के अलंकार चित्र मंदिर के निकट स्थित फील्ड ट्रेनिंग सेंटर में आने वाले प्रशिक्षु पहले तंबू में रह कर प्रशिक्षण ले रहे थे. अब भू-वैज्ञानिकों के लिए आठ करोड़ की लागत से हॉस्टल के साथ प्रबंधन के कार्यालय का भी निर्माण कार्य जारी है. जल्द ही प्रशिक्षु इस नये हॉस्टल में रहेंगे. फील्ड ट्रेनिंग सेंटर के निदेशक शिव रंजन कुमार भारती ने बताया कि 2024 तक काम पूरा करने की उम्मीद है. बीते 40 वर्षों से भी ज्यादा समय से यहां प्रशिक्षण प्राप्त करने वाले भू वैज्ञानिक तंबू में रह कर प्रशिक्षण प्राप्त करते थे. इसके कारण भू-वैज्ञानिकों को काफी परेशानी हो रही थी. इसमें महिला प्रशिक्षु को और भी परेशानी होती थी.

झारखंड -बिहार का एकमात्र प्रशिक्षण केंद्र है कुजू में : जियोलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया के देश के चार प्रमुख फील्ड ट्रेनिंग सेंटर में एक प्रशिक्षण केंद्र कुजू में स्थित है. झारखंड बिहार सहित इस्ट जोन का यह एकमात्र प्रशिक्षण केंद्र है. जियोलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया खान मंत्रालय के अधीन काम करता है. देश में मात्र चार ट्रेनिंग सेंटर हैं. इनमें कर्नाटक के चित्रदुर्ग, छत्तीसगढ़ के रायपुर, राजस्थान के जावर और झारखंड के कुजू में स्थित है.

देश के विभिन्न राज्यों से प्रशिक्षण के लिए आते हैं भू वैज्ञानिक : कुजू स्थित फील्ड ट्रेनिंग सेंटर में केंद्रीय, राज्य, सार्वजनिक उपक्रमों, राष्ट्र शैक्षणिक संस्थानों सहित कई हितधारकों को यहां प्रशिक्षण दिया जाता है. यहां आने वाले प्रशिक्षु वैज्ञानिक क्षेत्र की दूधी नदी, दामोदर नद, डामर बेड़ा, वेस्ट बोकारो सहित कई जगहों का भ्रमण कर भू-गर्भ से जुड़े विभिन्न पाठ्यक्रमों की जानकारी प्राप्त करते हैं. प्रशिक्षण प्राप्त करने के बाद उन्हें प्रमाण पत्र दिया जाता है.

हिमयुग का साक्ष्य मौजूद है मांडू की दूधी नदी में : फील्ड ट्रेनिंग सेंटर के निदेशक शिवरंजन कुमार भारती ने बताया कि मांडू स्थित दूधी नदी में हिमयुग के साक्ष्य मौजूद हैं. यहां खास तरह का पत्थर गोलाशय की उत्पत्ति हिमनद से हुई है. यहां के कुछ चट्टान और पत्थर 300 मिलियन वर्ष पुराने हैं. उन्होंने बताया कि केंद्र में हर माह प्रशिक्षण दिया जाता है. प्रशिक्षणार्थियों को क्षेत्र के आरा, डुमरबेड़ा व चौथा नदी समागत के तट पर ले जाकर उनको जानकारी दी जाती है.

नये भवन में कई सुविधाएं होंगी उपलब्ध : केंद्र में बनाये जा रहे नये भवन में सभी तरह की सुविधाएं उपलब्ध होंगी. हॉस्टल, लेक्चर रूम, कॉन्फ्रेंस रूम, पार्किंग, शौचालय, ट्रांसफार्मर आदि की सुविधा उपलब्ध करायी जायेगी.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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