रामगढ़ के नेमरा से लेकर देश तक पहुंचा दिशोम गुरु शिबू सोरेन का संदेश

Ramgarh: रामगढ़ के नेमरा गांव से निकला दिशोम गुरु शिबू सोरेन का संदेश जल-जंगल-जमीन और सामाजिक न्याय की लड़ाई के रूप में देशभर में गूंजा, जिसने आदिवासी समाज को नई पहचान और आवाज दी.

सलाउद्दीन
Ramgarh: रामगढ़ के गोला प्रखंड के नेमरा गांव के लाल शिबू सोरेन हमेशा राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा में रहे. शिबू सोरेन का जीवन जंगल-पहाड़ के बीच रह कर शुरू हुआ है. चंदवाटुंगरी पहाड़, ढ़ेकाकोचा पहाड़ और बाड़े कोचा पहाड़ की तराई में हरियाली के बीच शिबू सोरेन का आवास है. इसी पहाड़ों में रहकर उन्होंने आंदोलन को आगे बढ़ाया. झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री शिबू सोरेन को मरणोपरांत भारत के प्रतिष्ठित नागरिक सम्मान पद्म भूषण से सम्मानित किया जायेगा. इसकी घोषणा के बाद शिबू सोरेन के पैतृक आवास नेमरा सहित सभी चाहने वालों ने खुशी जाहिर की है. शिबू सोरेन की भतीजी रेखा सोरेन समेत पैतृक आवास में रहने वाले लोगों के बीच यह संदेश पहुंचा, तो लोगों ने कहा कि बाबा के लिए यह सम्मान यादगार है.

संजीव बेदिया को याद आया शिबू सोरेन का संदेश

शिबू सोरेन को पिता के समान मानने वाले संजीव बेदिया ने कहा कि शिबू सोरेन के जीवन का संदेश यही है कि अपनी मिट्टी और परंपराओं को कभी भूलना नहीं चाहिए. परिवार के साथ अपने समर्थकों से परंपराओं, सभ्यता व संस्कृति से जुड़े रहने की सीख दी. शिबू सोरेन सिर्फ झारखंड के नहीं, बल्कि पूरे भारत के जननायक हैं. एक सच्चा जननायक केवल पद, सत्ता या आर्थिक प्रतिष्ठा से नहीं, बल्कि अपने नैतिक मूल्यों, समाज के प्रति जिम्मेदारी व परंपरा के सम्मान से लोगों के दिलों में राज करता है. केंद्र सरकार ने जननायक को पद्मभूषण से नवाजने का निर्णय लिया है.

दिशोम गुरु को अब भी याद करते हैं नेमरा के लोग

झामुमो नेता फागू बेसरा ने कहा कि शिबू सोरेन का संदेश यह है कि पद और तरक्की जितनी भी हो जाये, कर्म की शुरुआत की माटी को कभी नहीं भूलना चाहिए. शिबू सोरेन के जीवन का संदेश आपसी मेल मोहब्बत का था. शिबू सोरेन का संदेश अपने लोगों और मिट्टी के प्रति हमेशा सम्मान रहा है. शिबू सोरेन का जीवन, उनका योगदान समाज के लिए प्रेरणा है. पद्मभूषण की घोषणा के बाद दिशोम गुरु की तस्वीर के समक्ष झामुमो नेताओं ने बाबा को याद किया.

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By AmleshNandan Sinha

अमलेश नंदन सिन्हा प्रभात खबर डिजिटल में वरिष्ठ पत्रकार के रूप में कार्यरत हैं. इनके पास हिंदी पत्रकारिता में 20 से अधिक वर्षों का अनुभव है. रांची विश्वविद्यालय से पत्रकारिता की पढ़ाई करने के बाद से इन्होंने कई समाचार पत्रों के साथ काम किया. इन्होंने पत्रकारिता की शुरुआत रांची एक्सप्रेस से की, जो अपने समय में झारखंड के विश्वसनीय अखबारों में से एक था. एक दशक से ज्यादा समय से ये डिजिटल के लिए काम कर रहे हैं. झारखंड की खबरों के अलावा, समसामयिक विषयों के बारे में भी लिखने में रुचि रखते हैं. विज्ञान और आधुनिक चिकित्सा के बारे में देखना, पढ़ना और नई जानकारियां प्राप्त करना इन्हें पसंद है.

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