ईरान कर सकता है 2026 फुटबॉल वर्ल्डकप का बॉयकॉट, ट्रंप ने कहा- ईरान का स्वागत है

FIFA World Cup 2026 : ईरान युद्ध के परिणाम अब सामने आने लगे हैं. तेल-गैस की किल्लत की खबरों से तो सभी वाकिफ हैं, लेकिन जो लोग खेलप्रेमी हैं, उन्हें इस बात से निराशा हो सकती है कि ईरान इस बार के फुटबाॅल विश्वकप में शिरकत करने से मना कर रहा है. अमेरिकी हमले के विरोध में ईरान विश्वकप में हिस्सा लेने से बच रहा है और इसी वजह से उसने पिछले सप्ताह फीफा प्लानिंग समिट में भी हिस्सा नहीं लिया. 2026 के फीफा विश्वकप की मेजबानी अमेरिका, कनाडा और मेक्सिको संयुक्त रूप से कर रहे हैं. यह आयोजन 11 जून से 19 जुलाई तक होना है.

FIFA World Cup 2026: इस बार के फीफा विश्वकप में 48 टीमें हिस्सा ले रही हैं. ईरान एशिया की एक मजबूत टीम रही है, जो कई बार विश्वकप के लिए क्वालिफाई कर चुकी है, हालांकि नाॅकआउट चरण में ईरान अबतक नहीं खेल पाया है. इस बार भी ईरान क्वालिफाई कर चुका है, लेकिन ईरान के खेल मंत्री अहमद दोन्यामाली ने बुधवार को कहा कि हम किसी भी हालत में विश्व कप में हिस्सा नहीं ले सकते हैं.

ईरान क्यों कर रहा है विश्वकप का विरोध?

ईरान के खेल मंत्री दोन्यामाली ईरान सरकार के पहले प्रतिनिधि हैं जिन्होंने वर्ल्ड कप के मुद्दे पर बात की है. ईरान पर अमेरिकी हमले के 12वें दिन अहमद दोन्यामाली ने यह स्पष्ट कहा कि हम विश्वकप का हिस्सा नहीं बन सकते, क्योंकि अमेरिका इस विश्वकप का मेजबान यानी को होस्ट है. द गार्जियन अखबार के अनुसार, ईरान विश्वकप का विरोध इसलिए कर रहा है क्योंकि अमेरिका ने 28 फरवरी को ईरान पर मिसाइलों से हमला शुरू किया है. अमेरिकी हमले में ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई की मौत हो गई है. इस हमले के बाद ईरान ने भी जवाबी कार्रवाई की और इजरायल और अपने उन पड़ोसी देशों पर आक्रमण किया, जिनपर उसे इस बात का शक था कि वे अमेरिका से मिले हुए हैं.

ईरान का दावा, अमेरिका ने उनपर युद्ध थोपा

अहमद दोन्यामाली ने सरकारी टीवी को दिए बयान में कहा कि अमेरिका की भ्रष्ट सरकार ने हमारे सुप्रीम लीडर की हत्या की है. उनकी वजह से हमारे बच्चों की जान जा रही है, वे सुरक्षित नहीं हैं. हमारे हजारों लोगों की मौत पिछले आठ-नौ महीने में हुई है. इस अवधि में उन्होंने हमपर दो युद्ध थोपे हैं, हमारे हालात ऐसे नहीं है कि हम किसी विश्वकप का हिस्सा बनें.

विश्वकप के लिए क्वालिफाई कर चुका है ईरान

डोनाल्ड ट्रंप और जियानी इन्फेंटिनो

फुटबाॅल विश्वकप 2026 में हिस्सा लेने के लिए ईरान क्वालिफाई कर चुका है. इस परिस्थिति में फीफा के अध्यक्ष जियानी इन्फेंटिनों ने कहा है कि उन्हें अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से यह आश्वासन मिला है कि अगर ईरान की टीम विश्वकप में हिस्सा लेती है, तो उनका स्वागत होगा. फीफा के अध्यक्ष मंगलवार को व्हाइट हाउस में ट्रंप से मिले थे और उसके बाद उन्होंने ईरान के बारे में बयान दिया था. उससे पहले मार्च की शुरुआत में ट्रंप ने पोलिटिको अखबार से कहा था कि उन्हें इस बात से कोई फर्क नहीं पड़ता कि ईरान विश्वकप में हिस्सा लेता है या नहीं.

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क्या विश्वकप में हिस्सा नहीं लेने पर ईरान के खिलाफ कार्रवाई हो सकती है?

ईरान युद्ध के मद्देनजर अगर फुटबाॅल विश्वकप 2026 में ईरान भाग नहीं लेने का एकतरफा फैसला करता है, तो फीफा उसके खिलाफ कार्रवाई कर सकता है. इसकी वजह यह है कि ईरान का यह फैसला एकतरफा होगा, क्योंकि फीफा ने उसपर बैन नहीं लगाया है. ईरान की शिरकत को लेकर फीफा के अध्यक्ष जियानी इन्फेंटिनो ने इंस्टाग्राम पर स्पष्ट लिखा है. मेंबर एसोसिएशन को प्रतियोगिता से बाहर होने की इजाजत नहीं है और अभी तक किसी भी देश ने विश्वकप में हिस्सा लेने से मना नहीं किया है. सिर्फ 1950 में भारत और फ्रांस ने ट्रैवल खर्च वहन ना कर सकने का हवाला देकर क्वालीफाई करने के बाद भी विश्वकप से अपना नाम वापस ले लिया था. उसके बाद कभी भी किसी देश ने क्वालिफाई करने के बाद विश्वकप से अपना नाम वापस नहीं लिया है. फीफा के नियमों के मुताबिक, अगर कोई देश नाम वापस लेता है तो उसपर 275,000 से लेकर 555,000 यूरो तक जुर्माना लग सकता है. फीफा की डिसिप्लिनरी कमेटी स्पोर्टिंग बैन भी लगा सकती है यानी संबंधित टीम को कुछ समय के लिए या फिर हमेशा के लिए विश्वकप में हिस्सा लेने से रोका जा सकता है.

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Published by: Rajneesh Anand

रजनीश आनंद प्रभात खबर में सीनियर चीफ कंटेंट राइटर के पद पर कार्यरत है.पत्रकारिता के क्षेत्र में 25 वर्षों का अनुभव रखती हैं. झारखंड की राजधानी रांची में रहने वाली रजनीश ने इलाहाबाद विश्वविद्यालय से स्नातक की शिक्षा प्राप्त की और वर्ष 2000-01 में पत्रकारिता की शुरुआत की. इन्होंने पहली नौकरी झारखंड जागरण दैनिक अखबार में की. उसके बाद इन्होंने प्रभात खबर, हिंदुस्तान, रांची एक्सप्रेस तथा दैनिक जागरण सहित कई प्रमुख समाचार संस्थानों के लिए रिपोर्टिंग और लेखन किया. प्रिंट मीडिया के दैनिक, साप्ताहिक, पाक्षिक और सांध्य संस्करणों में काम करने के बाद वे वर्ष 2012 से डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय हैं. रजनीश आनंद की पहचान तथ्यपरक रिपोर्टिंग, गहन शोध और विश्लेषणात्मक लेखन के लिए है. उनकी रुचि राजनीति, सामाजिक सरोकारों, ग्रामीण विकास, महिला मुद्दों, इतिहास, खेल, जनजातीय समाज और सार्वजनिक नीतियों से जुड़े विषयों में रही है। उन्होंने हमेशा उन मुद्दों को प्राथमिकता दी है जो समाज के हाशिये पर खड़े लोगों के जीवन को प्रभावित करते हैं, लेकिन मुख्यधारा की चर्चा में अपेक्षाकृत कम स्थान पाते हैं. वे कई प्रतिष्ठित पत्रकारिता फेलोशिप से जुड़ी रही हैं. इन्क्लूसिव मीडिया–यूएनडीपी फेलोशिप के तहत उन्होंने झारखंड के पश्चिमी सिंहभूम (चाईबासा) जिले में माहवारी स्वच्छता और किशोरियों एवं महिलाओं के स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों पर विस्तृत अध्ययन और रिपोर्टिंग की. झारखंड सरकार मीडिया फेलोशिप के दौरान उन्होंने महिला सशक्तिकरण, सरकारी योजनाओं के प्रभाव और सामाजिक बदलाव के विभिन्न आयामों पर कार्य किया. इसके अतिरिक्त सेव द चिल्ड्रन फेलोशिप के तहत उन्होंने बच्चों के अधिकार, शिक्षा, सुरक्षा और बाल कल्याण से जुड़े मुद्दों पर गहन रिपोर्टिंग की. आदिवासी समाज, विशेषकर मुंडा जनजाति के इतिहास, संस्कृति और समकालीन चुनौतियों पर उनका काम उल्लेखनीय माना जाता है. उन्होंने भूमि, पहचान, परंपरा, सामाजिक बदलाव और आदिवासी समुदायों के अधिकारों से जुड़े विषयों पर व्यापक फील्ड रिपोर्टिंग की है. हाल के वर्षों में उन्होंने झारखंड में ऊर्जा संक्रमण (Energy Transition) और जस्ट ट्रांजिशन की अवधारणा पर भी काम किया है. विशेष रूप से कोयला आधारित अर्थव्यवस्था वाले क्षेत्रों में भविष्य की चुनौतियों, रोजगार, आजीविका और सामाजिक प्रभावों पर उनकी रिपोर्टिंग ने महत्वपूर्ण प्रश्न उठाए हैं. उनका मानना है कि ऊर्जा परिवर्तन की प्रक्रिया तभी सफल होगी जब उसमें प्रभावित समुदायों की भागीदारी और हितों को केंद्र में रखा जाए.पत्रकारिता उनके लिए केवल एक पेशा नहीं, बल्कि समाज के प्रति जिम्मेदारी निभाने का माध्यम है. जमीनी रिपोर्टिंग, तथ्यों की पड़ताल और जनसरोकारों को केंद्र में रखकर लिखना उनकी कार्यशैली की विशेषता रही है. इसके अतिरिक्त रजनीश आनंद कहानियां और कविताएं लिखने का शौक भी रखती है.

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