Palamu News: करैत के डंसने के बाद झाड़-फूंक में बीता समय, सूरज राजवार की मौत से तीन मासूमों पर टूटा संकट

पलामू में सांप के काटने के बाद इलाज के बजाय अंधविश्वास में एक व्यक्ति की मौत हो गई। परिवार के मुखिया की मौत से तीन मासूम बच्चे अनाथ और बेसहारा हो गए हैं।

मोहम्मदगंज, पलामू : पलामू जिले के मोहम्मदगंज थाना क्षेत्र के राजनडीह गांव निवासी सूरज राजवार (55) की सर्पदंश के बाद मौत हो गयी. परिजनों के अनुसार, गुरुवार की रात करीब दो बजे बिछावन में छिपे करैत ने उनके बायें हाथ में डंस लिया. इसके बाद तत्काल अस्पताल ले जाने के बजाय गांव में झाड़-फूंक करायी गयी. काफी समय बीतने के बाद हालत बिगड़ने पर उन्हें हुसैनाबाद अनुमंडलीय अस्पताल ले जाया गया, जहां से चिकित्सक ने रेफर कर दिया. शुक्रवार की रात उनकी मौत हो गयी.

बिछावन में सो रहे थे सूरज

घटना के समय सूरज चौकी पर बिछावन में अकेले सो रहे थे, जबकि उनकी पत्नी फुलवा देवी तीन बच्चों के साथ दूसरे कमरे में थीं. रात करीब दो बजे बायें हाथ में चुभने जैसा दर्द महसूस होने पर उनकी नींद खुली. हाथ से खून निकलता देख परिजनों को जानकारी दी. सुबह गांव में झाड़-फूंक शुरू करायी गयी. काफी समय बाद हालत बिगड़ने पर ग्रामीण उन्हें हुसैनाबाद अस्पताल ले गये. चिकित्सकों के अनुसार, सांप का जहर शरीर में फैल चुका था.

परिवार पर टूटा आर्थिक संकट

सूरज परिवार के एकमात्र पुरुष सदस्य थे. उनकी मौत के बाद पत्नी फुलवा देवी और तीन मासूम बच्चों के सामने परवरिश और शिक्षा का संकट खड़ा हो गया है. बताया गया कि सूरज के बेटे विष्णु राजवार की करीब तीन वर्ष पहले अहमदाबाद से मजदूरी कर लौटने के दौरान ट्रेन में हार्ट अटैक से मौत हो गयी थी. इसके बाद विष्णु की पत्नी ने दूसरी शादी कर ली. ऐसे में बच्चों की देखभाल की जिम्मेदारी सूरज और उनकी पत्नी पर थी.

ग्रामीणों के अनुसार, परिवार के पांच सदस्य सरकारी पेंशन पर निर्भर थे. सूरज की मौत के बाद परिवार की मुश्किलें और बढ़ गयी हैं.

ग्रामीणों के सहयोग से हुआ अंतिम संस्कार

मुखिया प्रतिनिधि रोशन कुमार की पहल पर ग्रामीणों ने आर्थिक सहयोग किया. पोस्टमार्टम के बाद शुक्रवार को कोयल नदी के तट पर सूरज का अंतिम संस्कार किया गया. घटना के बाद पत्नी और बच्चों का रो-रोकर बुरा हाल है.

आश्रित को मुआवजा देने का आश्वासन

पंचायत प्रतिनिधियों की सूचना पर सीओ रणवीर कुमार ने मामले की जानकारी ली. उन्होंने पोस्टमार्टम रिपोर्ट और अन्य आवश्यक कागजात की प्रक्रिया पूरी होने के बाद आश्रित को नियमानुसार मुआवजा दिलाने का आश्वासन दिया.

तीन मासूमों की परवरिश की चिंता

करकट से ढके अर्धनिर्मित आवास में पत्नी फुलवा देवी तीन बच्चों के साथ रह रही हैं. ग्रामीणों ने कहा कि आर्थिक तंगी के कारण सूरज को समय पर बेहतर इलाज नहीं मिल सका. अब पूरे गांव और समाज के सामने तीनों बच्चों की शिक्षा और परवरिश की चिंता है.

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By Prabhat khabar news desk

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