BRICS अकादमिक फोरम में गूंजी पलामू की आवाज, डॉ सीमी मेहता ने उठाया संयुक्त राष्ट्र में सुधार का मुद्दा

लखनऊ में आयोजित 18वें BRICS अकादमिक फोरम में झारखंड के पलामू जिले की डॉ सीमी मेहता ने वैश्विक दक्षिण के प्रतिनिधित्व और संयुक्त राष्ट्र में सुधार का मुद्दा उठाया. उन्होंने कहा कि वैश्विक शासन संस्थाओं को अधिक समावेशी बनाने की जरूरत है.


BRICS Academic Forum: लखनऊ में आयोजित 18वें BRICS अकादमिक फोरम में झारखंड के पलामू जिले की आवाज अंतरराष्ट्रीय स्तर पर गूंजी. पांकी विधायक डॉ. शशिभूषण मेहता की पुत्री और इम्पैक्ट एंड पॉलिसी रिसर्च इंस्टीट्यूट की प्रतिनिधि डॉ. सीमी मेहता ने मंच पर वैश्विक दक्षिण के प्रतिनिधित्व और संयुक्त राष्ट्र में व्यापक सुधार का मुद्दा प्रमुखता से उठाया. उन्होंने कहा कि आज की बदलती राजनीतिक, आर्थिक और जनसांख्यिकीय परिस्थितियों में वैश्विक शासन संस्थाओं को अधिक समावेशी बनाने की जरूरत है.

लखनऊ में हुआ BRICS अकादमिक मंच का आयोजन

18वें BRICS अकादमिक मंच का आयोजन आब्जर्वर रिसर्च फाउंडेशन (ORF), रिसर्च एंड इन्फॉर्मेशन सिस्टम फॉर डेवलपिंग कंट्रीज (RIS) और लखनऊ विश्वविद्यालय के संयुक्त सहयोग से किया गया. मंच पर BRICS सदस्य देशों के साथ साझेदार देशों के शिक्षाविद, शोधकर्ता, नीति विशेषज्ञ और थिंक टैंक प्रतिनिधियों ने भाग लिया. इस वर्ष मंच का मुख्य विषय "लचीलापन, नवाचार, सहयोग और सततता के लिए निर्माण" रहा, जिस पर विभिन्न सत्रों में विस्तार से चर्चा की गई.

डॉ सीमी ने उठाया वैश्विक दक्षिण का सवाल

अपने संबोधन में डॉ. सीमी मेहता ने संयुक्त राष्ट्र की वर्तमान संरचना पर सवाल उठाते हुए कहा कि द्वितीय विश्व युद्ध के बाद बनी संस्थागत व्यवस्था क्या आज की दुनिया की वास्तविकताओं का सही प्रतिनिधित्व करती है. उन्होंने कहा कि संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में केवल वीटो अधिकार का सवाल ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि यह भी जरूरी है कि एशिया, अफ्रीका और लैटिन अमेरिका जैसे वैश्विक दक्षिण के देशों की आवाज वैश्विक निर्णय निर्माण की प्रक्रिया में प्रभावी रूप से सुनी जाए.

BRICS की भूमिका पर भी रखे महत्वपूर्ण विचार

डॉ. सीमी मेहता ने BRICS की भूमिका पर भी अपने विचार रखते हुए कहा कि संगठन की वास्तविक ताकत केवल उसकी सदस्य संख्या या आर्थिक क्षमता में नहीं है. उन्होंने कहा कि BRICS की सबसे बड़ी शक्ति वैश्विक दक्षिण की साझा प्राथमिकताओं को प्रभावी नीतिगत आवाज में बदलने की क्षमता होनी चाहिए. उन्होंने जोर दिया कि यदि BRICS विकासशील देशों के हितों को वैश्विक नीति निर्माण में मजबूती से रख सके, तो यह अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था में सकारात्मक बदलाव का महत्वपूर्ण माध्यम बन सकता है.

वैश्विक शासन सुधार पर हुई व्यापक चर्चा

मंच के विभिन्न सत्रों में वैश्विक शासन में सुधार, सतत विकास, तकनीकी सहयोग और बहुपक्षीय व्यवस्था को अधिक समावेशी बनाने जैसे विषयों पर विस्तृत चर्चा हुई. सम्मेलन के दौरान BRICS थिंक टैंक परिषद की सिफारिशें भारत के विदेश मंत्रालय के प्रतिनिधि को भी सौंपी गईं.

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BRICS शिखर सम्मेलन से पहले महत्वपूर्ण मंच

लखनऊ में आयोजित यह अकादमिक मंच नई दिल्ली में 12 और 13 सितंबर को होने वाले 18वें BRICS शिखर सम्मेलन के संदर्भ में महत्वपूर्ण माना जा रहा है. इस मंच पर विभिन्न देशों के विशेषज्ञों ने भविष्य की वैश्विक नीतियों को लेकर अपने सुझाव साझा किए. डॉ सीमी मेहता ने अंत में कहा कि वैश्विक दक्षिण की आवाज को केवल चर्चा तक सीमित नहीं रखा जाना चाहिए, बल्कि उसे संस्थागत प्रतिनिधित्व और वास्तविक नीतिगत प्रभाव में बदलना समय की सबसे बड़ी आवश्यकता है.

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लेखक के बारे में

By चंद्रशेखर सिंह

चंद्रशेखर सिंह प्रभात खबर से जुड़े वरिष्ठ पत्रकार हैं और पिछले करीब 30 वर्षों से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं. उन्होंने अपने लंबे समय से पत्रकारिता करियर में क्राइम, सामाजिक मुद्दों और राजनीति से जुड़े विषयों पर व्यापक रूप से काम किया है. मेदिनीनगर (पलामू) में जमीनी स्तर की पत्रकारिता में इनकी खास पकड़ रही है. समाज से जुड़े महत्वपूर्ण और अनदेखे मुद्दों को सामने लाने, आम लोगों की समस्याओं को आवाज देने और सामाजिक सरोकार से जुड़े विषयों को प्रमुखता से उठाने के लिए वह जाने जाते हैं. अपराध और राजनीति से जुड़े मामलों की रिपोर्टिंग के साथ-साथ उन्होंने सामाजिक बदलाव और जनहित के मुद्दों पर भी लगातार काम किया है. क्राइम रिपोर्टिंग, सामाजिक सरोकार और राजनीतिक पत्रकारिता उनके प्रमुख कार्यक्षेत्र रहे हैं. तीन दशकों के अनुभव के दौरान उन्होंने बदलते मीडिया परिदृश्य और पत्रकारिता के तौर-तरीकों को करीब से देखा और समझा है. उनकी पत्रकारिता में जमीनी अनुभव, सामाजिक मुद्दों की समझ और तथ्यपरक रिपोर्टिंग को विशेष महत्व मिलता है.

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