मेदिनीनगर : शनिवार को जिला स्कूल परीक्षा केंद्र पर वन विभाग के वनरक्षियों की विभागीय परीक्षा आहूत की गयी. इस केंद्र पलामू- गढ़वा व लातेहार में कार्यरत वनरक्षियों को विभागीय परीक्षा देना था. लेकिन आधे से अधिक वनरक्षियों ने इस विभागीय परीक्षा का बहिष्कार कर दिया. झारखंड राज्य अवर वनसेवा संघ के बैनर तले परीक्षा का बहिष्कार किया गया.
बहिष्कार करने वाले कर्मियों का कहना था कि सेवा संपुष्टि व वेतन वृद्धि के नाम पर जो विभागीय परीक्षा ली जा रही है, वह वन विभाग के नियमावली के विरुद्ध है. इस परीक्षा के बहाने वन विभाग के पदाधिकारी वनरक्षियों का शोषण कर रहे हैं.साथ ही सरकारी राशि की भी बंदरबांट की जा रही है.
उनका कहना था कि वर्ष-2017 में उनलोगों की नियुक्ति हुई. प्रशिक्षण के बाद हिंदी व जनजातिये भाषा की परीक्षा उनलोगों ने पास की है. किसी भी विभाग में 2000 ग्रेड पे वाले कर्मियों का विभागीय परीक्षा अलग से नहीं होता है. लेकिन वन विभाग के पदाधिकारी मनमानी व तानाशाही रवैया अपना रहे हैं.
वन अधिनियम के तहत इस तरह की परीक्षा का कोई औचित्य नहीं है. नियुक्ति के बाद उनलोगों का वेतनवृद्धि हुआ है. लेकिन अब पदाधिकारी यह दबाव बना रहे हैं कि विभागीय परीक्षा पास नहीं करने पर पूर्व में दिया गया इंक्रिमेंट की रिकवरी की जायेगी और नौकरी से भी निकाल दी जायेगी. लेकिन वे लोग उस काम को नहीं करना चाहते, जो अन्य विभागों में नहीं हुआ है.
बहिष्कार कर रहे वनरक्षियों ने पदाधिकारियों पर यह आरोप लगाया कि परीक्षा आयोजन के लिए सरकार से जो राशि प्राप्त हुई है, उसे खर्च करने का यह तरीका खोजा गया है.
परीक्षा में शामिल होने के लिए वनरक्षियों को पदाधिकारी द्वारा प्रलोभन दिया जा रहा है. कहा जा रहा है कि परीक्षा में चोरी करके लिखने की छूट दी जायेगी. प्रलोभन में नहीं आने वाले वनरक्षियों के खिलाफ कार्रवाई करने की भी धमकी पदाधिकारी ने दी है. परीक्षा का बहिष्कार करने वाले कई वनरक्षियों ने आरोप लगाया कि परीक्षा में कुछ वनरक्षी शामिल हैं, जो खुलेआम किताब खोल कर लिख रहे हैं.
यह सब वन विभाग के पदाधिकारी की मिली भगत से हो रहा है. 23 दिसंबर को परीक्षा फार्म भराया गया है और आनन-फानन में परीक्षा ली जा रही है. परीक्षा का बहिष्कार करने वाले वनरक्षियों में अभिषेक, राघवेंद्र, रमेश राम, जीके निराला आदि का नाम शामिल है.
