तारापीठ से प्रतीम मष्करा की रिपोर्ट
पश्चिम बंगाल के प्रसिद्ध शक्तिपीठ तारापीठ में कौशिकी अमावस्या का महापर्व संपन्न होते ही मंदिर के लंबे समय से प्रतीक्षित जीर्णोद्धार का काम शुरू हो गया है. 14 सितंबर से शुरू हुए जीर्णोद्धार के कारण मां तारा की प्रतिमा को मूल गर्भगृह से हटाकर पास के शिव मंदिर में स्थापित किया गया है. करीब एक माह तक मां तारा यहीं विराजमान रहेंगी. इसी स्थान से पूजा-अर्चना, आरती, भोग और श्रद्धालुओं के दर्शन की व्यवस्था जारी रहेगी. मंदिर की नयी कमेटी ने जीर्णोद्धार के साथ श्रद्धालुओं की दर्शन व्यवस्था को आसान बनाने के लिए भी कई फैसले लिये हैं.
कौशिकी अमावस्या के बाद शुरू हुआ जीर्णोद्धार
तारापीठ मंदिर कमेटी के सचिव पुलक चट्टोपाध्याय ने बताया कि नयी कमेटी के गठन के बाद ही कौशिकी अमावस्या के बाद मंदिर के जीर्णोद्धार का निर्णय लिया गया था. इसी योजना के तहत अमावस्या समाप्त होने के बाद 14 सितंबर से काम शुरू किया गया. मंदिर के अंदर के साथ बाहरी हिस्से में भी आवश्यक मरम्मत और जीर्णोद्धार कराया जायेगा. काम के दौरान विशेषज्ञ तकनीकीविदों की सलाह और तकनीकी दिशा-निर्देश का पालन किया जायेगा.
मंदिर बंद नहीं, शिव मंदिर से होंगे दर्शन
जीर्णोद्धार के कारण मंदिर में पूजा-अर्चना या श्रद्धालुओं के दर्शन बंद नहीं किये गये हैं. मां तारा की प्रतिमा को पास के शिव मंदिर में स्थापित कर वहीं से नियमित पूजा, आरती और भोग की व्यवस्था की गयी है. श्रद्धालु भी इसी स्थान से मां तारा के दर्शन कर सकेंगे.
मंदिर कमेटी के अनुसार, जीर्णोद्धार का उद्देश्य केवल मंदिर का सौंदर्यीकरण करना नहीं है. श्रद्धालुओं की सुविधा को ध्यान में रखते हुए भी बदलाव किये जा रहे हैं.
नाटमंदिर से दर्शन को बनाया जायेगा आसान
तारापीठ में बड़ी संख्या में बुजुर्ग श्रद्धालु पहुंचते हैं, लेकिन सभी गर्भगृह में प्रवेश कर मां तारा की पूजा नहीं कर पाते. ऐसे श्रद्धालु नाटमंदिर से ही मां तारा का दर्शन करते हैं. कई बार यहां से दर्शन करने में परेशानी होती है.
इसी समस्या को दूर करने के लिए मंदिर के सामने के दरवाजे को करीब एक फुट ऊंचा करने की योजना है. इसके अलावा नाटमंदिर से मां तारा का दर्शन और स्पष्ट हो, इसके लिए देवी की मुख्य वेदी को करीब आठ इंच ऊंचा किया जायेगा.
महालय से पहले गर्भगृह में लौटेंगी मां तारा
मंदिर कमेटी के सचिव पुलक चट्टोपाध्याय ने बताया कि जीर्णोद्धार का काम करीब एक माह में पूरा करने का लक्ष्य है. महालय से पहले या महालय के दिन मां तारा की प्रतिमा को फिर से मूल गर्भगृह में स्थापित करने की योजना है. इसके बाद श्रद्धालु पहले की तरह गर्भगृह से मां तारा के दर्शन कर सकेंगे..
