कभी हड़िया बेचने की मजबूरी, अब बांस के हुनर से 15-18 हजार की कमाई! महेशपुर की महिलाओं ने बदली जिंदगी

महेशपुर की महिलाओं ने बांस की कला से अपनी किस्मत बदली है. हड़िया बेचने की मजबूरी से निकलकर अब वे सुप, डलिया और झाड़ू बनाकर अच्छी आय अर्जित कर रही हैं. यह सफलता जेएसएलपीएस के सहयोग और महिलाओं के दृढ़ संकल्प का परिणाम है.

महेशपुर : महेशपुर प्रखंड के पोखरिया गांव की महिलाओं की जिंदगी अब बदल रही है. कभी रोजगार के अभाव में पलायन और हड़िया बेचने की मजबूरी झेल रहीं महिलाएं झारखंड स्टेट लाइवलीहुड प्रमोशन सोसाइटी (जेएसएलपीएस) से जुड़कर बांस की सामग्री तैयार कर आय अर्जित कर रही हैं. गांव की लुखीमुनि टुडू इसका उदाहरण हैं, जिन्होंने हड़िया-दारू बेचने का काम छोड़कर सुप, डलिया और झाड़ू बनाकर सम्मानजनक आजीविका शुरू की है.

90 फीसदी आबादी कृषि पर निर्भर

पोखरिया गांव में आजीविका का मुख्य साधन कृषि है. करीब 90 फीसदी आबादी कृषि पर निर्भर थी, जबकि 10 प्रतिशत लोग मजदूरी पर निर्भर थे. आर्थिक स्थिति कमजोर होने के कारण जेएसएलपीएस के सहयोग से महिलाओं ने सखी मंडल का गठन किया. इसके बाद समूह की दीदियों को बांस से सामान बनाने का प्रशिक्षण दिया गया.

लुखीमुनि टुडू फूलो-झानो आशीर्वाद अभियान से जुड़ीं. उन्होंने 25 हजार रुपये का ब्याज मुक्त ऋण लेकर सुप, डलिया समेत अन्य बांस की सामग्री बनाना शुरू किया. उनके पति भी इस कार्य में सहयोग करते हैं. इससे वह प्रतिमाह करीब 15 से 18 हजार रुपये की आय अर्जित कर रही हैं.

हड़िया बिक्री छोड़ी, सम्मान के साथ मिली आजीविका

जेएसएलपीएस के द-एनयूडीजीई के ब्लॉक लीड राजेश कुमार महतो ने बताया कि आर्थिक सहयोग और द-एनयूडीजीई के तकनीकी सहयोग से महिलाएं हड़िया-दारू बिक्री छोड़कर सुप-डलिया आदि बनाकर आय अर्जित कर रही हैं. उन्होंने बताया कि पहले लुखीमुनि बाजार और चौक-चौराहों पर हड़िया-दारू बेचती थीं, जहां उन्हें अभद्र भाषा का सामना करना पड़ता था. ऋण मिलने के बाद उन्होंने बांस का काम शुरू किया. अब दूसरी महिलाएं भी उनसे प्रेरित होकर इस कार्य से जुड़ रही हैं.

परिवार की खुशहाली और बच्चों की पढ़ाई पर जोर

लुखीमुनि को मुख्यमंत्री मंईयां सम्मान योजना का भी लाभ मिल रहा है. वह जेएसएलपीएस के आर्थिक सहयोग और द-एनयूडीजीई के तकनीकी सहयोग को अपने बदलाव का श्रेय देती हैं. उनके अनुसार, फूलो-झानो आशीर्वाद अभियान से बेहतर आजीविका के साथ समाज में सम्मान से जीवन जीने का आत्मविश्वास मिला. अब परिवार भी खुश है और बच्चों की पढ़ाई पर पहले से बेहतर ध्यान दिया जा रहा है.

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By Prabhat khabar news desk

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