हिंदू सम्मेलन में गूंजा राष्ट्रवाद और सामाजिक समरसता का स्वर

हिंदू सम्मेलन में गूंजा राष्ट्रवाद और सामाजिक समरसता का स्वर

लोहरदगा़ राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के शताब्दी वर्ष के उपलक्ष्य में रविवार को चुन्नीलाल उच्च विद्यालय के मैदान में विशाल हिंदू सम्मेलन का आयोजन किया गया. कार्यक्रम में स्वयंसेवकों, प्रबुद्धजनों और काफी संख्या में महिलाओं ने अपनी सहभागिता दर्ज करायी. कार्यक्रम का शुभारंभ अतिथियों ने दीप प्रज्ज्वलन और भारत माता के चित्र पर पुष्पांजलि अर्पित कर किया गया. इस दौरान दुर्गा वाहिनी की युवतियों ने साहसिक अस्त्र-शस्त्र संचालन का प्रदर्शन कर अपनी शक्ति का परिचय दिया. विघटित समाज को संगठित करना अनिवार्य : मुख्य वक्ता अनूप कुमार (क्षेत्रीय कार्यकारिणी सदस्य, बिहार-झारखंड) ने कहा कि आरएसएस देश का पहला संगठन है, जिसने सेवा और समर्पण के 100 वर्ष पूरे किये हैं. उन्होंने कहा कि आपदा हो या विपत्ति, संघ के स्वयंसेवक सदैव राष्ट्रहित में सबसे पहले सड़कों पर उतरते हैं. शाखाएं व्यक्ति को चरित्र निर्माण और सामूहिक अनुशासन का प्रशिक्षण देती हैं. दुर्गा वाहिनी की प्रांतीय संयोजिका कृति गौरव ने कहा कि वर्तमान में हिंदू समाज संकुचित हो रहा है. परिवार और समाज के विघटन को रोकने के लिए महिलाओं का सशक्त होना और समाज का संगठित होना आवश्यक है. जाति-पाति के भेदभाव को समाप्त करने की अपील : कार्यक्रम के अध्यक्ष जय प्रकाश शर्मा ने सामाजिक समरसता पर जोर देते हुए कहा कि जाति-पाति के भेदभाव को त्यागकर पूरे समाज को एक सूत्र में पिरोना ही संघ का मुख्य उद्देश्य है. सम्मेलन का संचालन शिवांजलि मिश्रा और धन्यवाद ज्ञापन कमल अग्रवाल ने किया. मौके पर राजेंद्र खत्री, ओम सिंह, रितेश साहू, सुनील अग्रवाल, डॉ कुमुद अग्रवाल, सुनील अग्रवाल, दीपक सर्राफ, सूरज ठाकुर सहित काफी संख्या में गणमान्य लोग उपस्थित थे.

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Published by: Shailesh ambashtha

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