कैरो़ ग्रामीणों की लगन और प्रशासनिक अधिकारियों की सक्रियता से कैरो पंचायत आज विकास के पथ पर तेजी से अग्रसर है. यहां की बुनियादी सुविधाओं में निरंतर सुधार हो रहा है, जिसका सीधा लाभ ग्रामीणों को मिल रहा है. विशेष रूप से नंदनी डैम से निकली तीन नहरें इस क्षेत्र के लिए जीवनदायिनी साबित हो रही हैं. विदित हो कि वर्ष 1983-84 में लगभग नौ करोड़ रुपये की लागत से बने इस डैम से कैरो क्षेत्र को सिचाई की सुविधा मिली है, जो आज किसानों के लिए वरदान से कम नहीं है. धान के बाद अब रबी व गरमा फसल की तैयारी : नहरों के पानी की बदौलत ही लोहरदगा जिले में सबसे पहले कैरो पंचायत के किसान धान की खेती शुरू करते हैं. अच्छी पैदावार के बाद किसान पंजाब और हरियाणा की तर्ज पर गेहूं की खेती करते हैं, जिससे उन्हें मोटी आमदनी होती है. पिछले तीन वर्षों से 54 करोड़ की लागत से नहरों के पक्कीकरण का कार्य चल रहा था, जिसे 28 फरवरी तक पूर्ण किया जाना था. निर्माण कार्य अब लगभग पूरा हो चुका है, एक सप्ताह से नहरों में पानी छोड़ दिया गया है. इससे किसानों में खुशी की लहर है और वे गरमा फसल के तहत मिर्च, टमाटर, कद्दू, खीरा व शिमला मिर्च की खेती के लिए खेत तैयार करने में जुट गये हैं. पलायन पर लगेगी रोक, घर पर ही मिलेगा रोजगार : नहर का पानी नहीं मिलने के कारण पूर्व में कैरो पंचायत के काफी लोग रोजगार की तलाश में रांची, लातेहार, गोवा और तमिलनाडु जैसे सुदूर क्षेत्रों में पलायन करने को मजबूर थे. सिंचाई के संकट ने किसानों के सामने आर्थिक समस्याएं उत्पन्न कर दी थीं. लेकिन अब नहर का कार्य पूर्ण होने और पानी की उपलब्धता सुनिश्चित होने से पलायन कर चुके लोग वापस लौटने लगे हैं. किसानों को विश्वास है कि अब उन्हें अपने गांव-घर में ही सम्मानजनक रोजी-रोजगार मिल जायेगा, जिससे क्षेत्र की अर्थव्यवस्था को नयी मजबूती मिलेगी.
कैरो में नंदनी नहर बनी किसानों के लिए वरदान
कैरो में नंदनी नहर बनी किसानों के लिए वरदान

कैरो में नंदनी नहर बनी किसानों के लिए वरदान