क्या है अमेरिका का CSAR मिशन? ईरान में जिसका इस्तेमाल कर पायलट को बचाया गया

US CSAR Mission: अमेरिका ने रविवार को ईरान में अपने लापता पायलट को बचा ही लिया. वह शुक्रवार को प्लेन क्रैश के बाद फंस गया था. इस अभियान के बाद अमेरिका के CSAR मिशन की चर्चा हो रही है, जिसका इसमें इस्तेमाल किया गया.

US CSAR Mission: अमेरिका ने ईरान में फंसे हुए अपने पायलट को बचा लिया है. शुक्रवार को एक एफ-15ई स्ट्राइक ईगल ईरान के ऊपर गिरा. इसमें एक क्रू सदस्य को बचा लिया गया, जबकि दूसरा लापता हो गया था. यह घटना ईरान के देहदाश्त इलाके में हुई थी. दो दिनों तक एक पिस्टल और अपने इजेक्शन किट के सहारे पायलट खुद को बचाने में सफल रहा. जैसे-जैसे समय बीत रहा था ईरानी सुरक्षा बलों के उसके नजदीक पहुंचने का खतरा भी बढ़ रहा था. लेकिन अमेरिकी सेना के कॉम्बैट सर्च एंड रेस्क्यू (CSAR) मिशन अपने सम्मानित कर्नल (पायलट) को बचा लिया. तो आखिर क्या है यह CSAR मिशन और कैसे काम करता है?

अमेरिका की CSAR यूनिट को अमेरिकी सरकार द्वारा दर्ज किए गए सबसे जटिल और समय-संवेदनशील बचाव अभियानों को संभालने के लिए जाना जाता है. इसका उद्देश्य दुश्मन के इलाके में फंसे सैनिकों (जैसे ईरान में हुआ- गिराए गए पायलट या अलग-थलग पड़े जवानों) को ढूंढना, उनकी मदद करना और उन्हें सुरक्षित बाहर निकालना होता है. ये मिशन सक्रिय युद्ध क्षेत्र में चलाए जाते हैं. ये आमतौर पर हेलीकॉप्टरों के जरिए अंजाम दिए जाते हैं.

यह CSAR के आदर्श वाक्य से ही स्पष्ट हो जाता है. इसका मोटो है- हम ये काम करते हैं ताकि दूसरे जीवित रह सकें. यानी इनका उद्देश्य सक्रिय युद्ध क्षेत्रों में फंसे सैनिकों को ढूंढना और सुरक्षित निकालना होता है, जहां समय का दबाव और खतरा दोनों बेहद ज्यादा होते हैं.

अमेरिकी csar मिशन. फोटो- एक्स.

कैसे होता है CSAR ट्रूप्स का प्रशिक्षण?

अमेरिका में एयर फोर्स की विशेष इकाइयों को CSAR मिशनों के लिए प्रशिक्षित किया जाता है. उन्हें अक्सर उन क्षेत्रों के पास पहले से तैनात किया जाता है जहां विमान गिरने की संभावना होती है. इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार, इन्हें एलीट कमांडो और पैरामेडिक के रूप में प्रशिक्षित किया जाता है. 

उनका प्रशिक्षण सैन्य क्षेत्र के सबसे कठिन कार्यक्रमों में से एक होता है, जो लगभग दो साल तक चलता है. इसमें पैराशूट जंप, डाइविंग, सर्वाइवल ट्रेनिंग, दुश्मन से बचने और निकलने की तकनीकें और पूरी मेडिकल ट्रेनिंग शामिल होती है. 

सीबीएस न्यूज से बात करते हुए एक पूर्व अमेरिकी कमांडर ने बताया कि इस स्तर के CSAR मिशन में कम से कम 24 पैरा रेस्क्यू जम्पर्स को ब्लैक हॉक हेलीकॉप्टरों के जरिए तैनात किया जा सकता है. उसके अनुसार, ‘इसे खतरनाक कहना भी कम होगा… यही वह काम है जिसके लिए उन्हें दुनिया भर में ट्रेनिंग दी जाती है. इन्हें एयर फोर्स का ‘स्विस आर्मी नाइफ’ कहा जाता है.’

अमेरिकी csar मिशन. फोटो- एक्स.

युद्ध क्षेत्र में कैसे काम करता CSAR मिशन?

CSAR सक्रिय युद्ध क्षेत्रों में होता है, जहां बचाव दल को खुद दुश्मन की गोलीबारी, एंटी-एयरक्राफ्ट खतरों और गंभीर जोखिमों का सामना करना पड़ता है. CSAR  प्रक्रिया बेहद तेज और सटीक होती है, जैसे- पैराशूट के जरिए इलाके में उतरना, फंसे हुए सैनिक से संपर्क स्थापित करना, तुरंत जीवन रक्षक चिकित्सा देना और फिर दुश्मन से बचते हुए सुरक्षित बाहर निकालना. ईरान में चले मिशन को इसी तरह अंजाम दिया गया. 

पूर्व अमेरिकी मरीन स्पेशल ऑपरेशंस विशेषज्ञ जोनाथन हैकेट ने बीबीसी से बात करते हुए बताया कि ऐसे ऑपरेशन आमतौर पर लापता व्यक्ति की आखिरी ज्ञात लोकेशन से शुरू होते हैं और फिर इलाके की भौगोलिक स्थिति और संभावित मूवमेंट के आधार पर सर्च बढ़ाई जाती है. 

उन्होंने यह भी कहा कि यह ‘नॉन-स्टैंडर्ड असिस्टेड रिकवरी मिशन’ भी हो सकता है, जिसमें पहले से मौजूद स्थानीय संपर्कों की मदद ली जाती है. माना जा रहा है कि अमेरिका का पायलट जिस इलाके में गिरा, वहां सत्ता पक्ष को समर्थन नहीं मिलता, इसीलिए उसका बचना आसान हो गया. हालांकि, इसे स्वतंत्र तौर पर पुष्ट नहीं किया जा सका.

CSAR मिशन: इतिहास और भूमिका

कॉम्बैट सर्च एंड रेस्क्यू मिशनों की शुरुआत पहले वर्ल्ड वॉर के समय से मानी जाती है, जब पायलट कभी-कभी दुश्मन के इलाके (जैसे फ्रांस के कुछ हिस्सों) में जोखिम भरी लैंडिंग कर अपने साथियों को बचाकर वापस लाते थे. अमेरिकी सेना की पैरा रेस्क्यू इकाइयों की शुरुआत 1943 में बर्मा (आज का म्यांमार) में हुए एक साहसिक मिशन से मानी जाती है, जब दो सैन्य डॉक्टरों ने दुश्मन के इलाके में पैराशूट से उतरकर घायल सैनिकों का इलाज किया. वर्तमान CSAR ऑपरेशन का स्वरूप वियतनाम युद्ध के दौरान विकसित हुआ, जब युद्ध लंबा खिंचने के साथ इन मिशनों का दायरा और जटिलता दोनों बढ़ गए.

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ईरान में क्या हुआ? 

अमेरिका-इजरायल गठबंधन और ईरान के बीच जारी संघर्ष अब पांचवें सप्ताह में प्रवेश कर चुका है. पश्चिम एशिया में चल रहे इस युद्ध से जुड़े हालिया घटनाक्रम में अमेरिका के दो अलग-अलग विमान गिरे थे. शुक्रवार को ही एक एफ-15ई स्ट्राइक ईगल ईरान के ऊपर गिरा. इसी दौरान एक दूसरा विमान, ए-10 वॉरथॉग, होर्मुज जलडमरूमध्य के पास दुर्घटनाग्रस्त हो गया, जिसके पायलट को सुरक्षित निकाल लिया गया. 

ए-10 वॉरथॉग रेस्क्यू मिशन पर गया था और वही शिकार बन गया. हालांकि, फंसे हुए पायलट को कैसे बचाया जाएगा, इसी पर पूरा ध्यान केंद्रित हो गया. अमेरिकी सेना के कॉम्बैट सर्च एंड रेस्क्यू (CSAR) मिशनों की भी चर्चा होने लगी, उसने अपनी प्रतिष्ठा के अनुरूप ही काम किया और अपने पायलट को बचा लिया. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भी इसकी पुष्टि की.

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By Anant narayan shukla

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