US-Israel Airstrike Iran: ईरान के कोहगिलुयेह प्रांत में स्थित ‘ब्लैक माउंटेन’ पर अमेरिका और इजरायल की सेनाओं ने मिलकर एयरस्ट्राइक की है. ईरानी सरकारी मीडिया के हवाले से अल जजीरा ने बताया कि इस हमले में कम से कम 3 लोगों की जान चली गई है. कोहगिलुयेह के गवर्नर ने तस्नीम न्यूज एजेंसी को बताया कि हमले में 2 लोग घायल भी हुए हैं. उन्होंने चेतावनी दी है कि मलबे और नुकसान का जायजा लिया जा रहा है, जिससे मरने वालों का आंकड़ा अभी और बढ़ सकता है.
स्थानीय लोगों ने की फायरिंग
इस हमले के बीच एक और बड़ी खबर सामने आई है. सीएनएन की रिपोर्ट के मुताबिक, शुक्रवार को ईरान के ऊपर एक लड़ाकू विमान गिरा दिया गया था. इसके बाद जब अमेरिकी ब्लैक हॉक हेलीकॉप्टर अपने लापता क्रू मेंबर को ढूंढने निकले, तो स्थानीय जनजातीय लोगों ने उन पर गोलियां चला दीं. ईरान की फार्स न्यूज एजेंसी ने बताया कि कोहगिलुयेह, बोयर-अहमद और बख्तियारी जैसे पहाड़ी इलाकों में शनिवार (4 मार्च) को दो अमेरिकी हेलीकॉप्टरों को निशाना बनाया गया.
IRGC ने स्थानीय लोगों को बहादुर और सीमाओं का रक्षक बताया
सोशल मीडिया पर कुछ वीडियो भी सामने आए हैं जिनमें बख्तियारी कबीले के लोग राइफलों के साथ अमेरिकी सैनिकों को ढूंढते दिख रहे हैं. सीएनएन की रिपोर्ट के अनुसार, ईरान की रिवोल्यूशनरी गार्ड कोर (IRGC) ने इन स्थानीय लोगों की तारीफ करते हुए उन्हें बहादुर और सीमाओं का रक्षक बताया है.
ईरान का नया एयर डिफेंस सिस्टम बना सिरदर्द
ईरानी सेना अब अपने नए एयर डिफेंस सिस्टम का जमकर प्रचार कर रही है. IRGC से जुड़ी तस्नीम न्यूज एजेंसी ने एक वीडियो जारी किया है, जिसमें दावा किया गया है कि इसी नए सिस्टम की मदद से शुक्रवार को विमान गिराया गया और हेलीकॉप्टरों को खदेड़ा गया. खातम अल-अंबिया हेडक्वार्टर के प्रवक्ता ने सीएनएन के हवाले से कहा कि वे अब अपने आसमान पर पूरी तरह कंट्रोल पा लेंगे और दुश्मन को दुनिया के सामने नीचा दिखाएंगे. हालांकि, सीएनएन अभी अमेरिकी विमानों पर फायरिंग की इन खबरों की जांच कर रहा है.
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क्यों खास है ब्लैक माउंटेन?
ब्लैक माउंटेन ईरान के दक्षिण-पश्चिमी हिस्से में जग्रोस पर्वत श्रृंखला का हिस्सा है. काले पत्थरों और उबड़-खाबड़ रास्तों की वजह से इसे ‘ब्लैक माउंटेन’ कहा जाता है. यह इलाका बहुत सुनसान है, इसलिए सैन्य ठिकाने और रडार सिस्टम छिपाने के लिए यह सबसे सुरक्षित जगह मानी जाती है. सुरक्षा जानकारों का मानना है कि अमेरिका और इजरायल ने सीधे शहरों पर हमला करने के बजाय इन स्ट्रैटेजिक ठिकानों को निशाना बनाया है. यह पूरा तनाव 28 फरवरी को शुरू हुए अमेरिका-इजरायल हमलों और ईरान के पलटवार के बाद से लगातार बढ़ता जा रहा है.
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