कुड़ू़ प्रखंड के पश्चिमी क्षेत्र में प्रकृति पर्व सरहुल के मौके पर उत्साह का माहौल है. सलगी, बड़की चांपी, सुंदरू, जीमा, चीरी सहित विभिन्न गांवों में सरहुल का जश्न मनाया गया. पारंपरिक वेशभूषा में सजे श्रद्धालु मांदर और नगाड़े की थाप पर थिरकते नजर आये, जिससे पूरा वातावरण प्राकृतिक सौंदर्य से सराबोर हो गया. पाहनों ने की सुख-समृद्धि की कामना : कुंदगढ़ा, चुंद और बहेराटोली गांवों में सरहुल काफी धूमधाम से मनाया गया. कुंदगढ़ा में पाहन राजू पाहन व पुजार सुलेश उरांव और चुंद में पाहन राम किशुन भगत व पुजार सीडी उरांव ने विधिवत झखरा स्थल पर पूजा-अर्चना की. पाहन ने सखुआ के फूलों से प्रकृति की आराधना कर गांव की सुख-समृद्धि और अच्छी वर्षा की कामना की. पूजा के बाद अखड़ा में पारंपरिक नृत्य-संगीत का आयोजन हुआ, जहां स्थानीय लोगों ने देर शाम तक जश्न मनाया. भाईचारे का प्रतीक है सरहुल : अतिथि : मौके पर मौजूद अतिथियों ने कहा कि सरहुल आपसी भाईचारे और प्रकृति से प्रेम का प्रतीक है. गांव के लोग एकजुट होकर इस पर्व को मनाते हैं, जो हमारी समृद्ध परंपरा को दर्शाता है. शोभायात्रा में आसपास के कई गांवों के लोग शामिल हुए. आयोजन को सफल बनाने में प्रमुख मुन्नी देवी, गंदरू उरांव, सुनील मुंडा, एतवा उरांव, विकास उरांव, रविंद्र उरांव, सुनीता उरांव, सुशीला उरांव, बिंदेश उरांव, लखन राम और लक्ष्मी उरांव सहित कई ग्रामीणों का सराहनीय योगदान रहा.
मांदर की थाप पर थिरके लोग, प्रकृति पर्व सरहुल की रही धूम
मांदर की थाप पर थिरके लोग, प्रकृति पर्व सरहुल की रही धूम
