कैरो़ प्रखंड के गितिलगढ़ गांव में प्रकृति का महापर्व सरहुल पारंपरिक श्रद्धा और हर्षोल्लास से मनाया गया. इस मौके पर पहान लदुरा उरांव और पुजार मुना उरांव ने सरना रीति-रिवाज से पूजा-अर्चना संपन्न करायी. सरहुल की खुशियों में सराबोर धर्मावलंबी पारंपरिक वेशभूषा में ढोल, मांदर और नगाड़ों की थाप पर अपनी कला-संस्कृति का प्रदर्शन करते हुए गांव की विभिन्न गलियों से गुजरे.प्रकृति का संरक्षण हमारा कर्तव्य : प्रमुख : मौके पर प्रखंड प्रमुख श्रीराम उरांव ने कहा कि आदिवासी समुदाय आदिकाल से ही प्रकृति का उपासक रहा है. उन्होंने जोर देते हुए कहा कि जब तक प्रकृति सुरक्षित है, तभी तक मानव और अन्य जीवों का अस्तित्व संभव है. प्रकृति के बिना जीवन की कल्पना नहीं की जा सकती, इसलिए इसे संरक्षित करना हम सभी का नैतिक कर्तव्य है. सांप्रदायिक सौहार्द की दिखी मिसाल : उत्सव के दौरान सांप्रदायिक सौहार्द का अनूठा नजारा देखने को मिला. अंजुमन इस्लामिया, गितिलगढ़ के सदर अफरोज अंसारी और सेक्रेटरी एहसान अंसारी के नेतृत्व में मुस्लिम समुदाय ने सरहुल जुलूस का भव्य स्वागत किया. इस दौरान कोटवार परना उरांव, जीतू उरांव, वार्ड सदस्य सोनू उरांव, तेतरी उरांव, भोला उरांव, प्रकाश भगत, विमल कुमार, सरोज उरांव, विनय सहित काफी संख्या में ग्रामीण उपस्थित थे.
प्रकृति के बिना जीवन संभव नहीं : श्रीराम उरांव
प्रकृति के बिना जीवन संभव नहीं : श्रीराम उरांव
