करमा पर्व में क्यों खास है जावा फूल? किस्को में ग्रामीणों को बताया गया इसका महत्व

किस्को प्रखंड में करमा पर्व की पूर्व संध्या पर विशेष कार्यक्रम का आयोजन हुआ. यहां जावा फूल के पारंपरिक महत्व पर प्रकाश डाला गया, जो नई फसल और भाई-बहन के प्रेम का प्रतीक है.

किस्को. किस्को प्रखंड के चरहु गांव में करमा पर्व की पूर्व संध्या पर कार्यक्रम का आयोजन किया गया. कार्यक्रम में मुख्य अतिथि बिरी भगत, विशिष्ट अतिथि शिवशंकर टाना भगत, अरेया पंचायत की मुखिया यशोदा उरांव, जिला उपाध्यक्ष मनोज उरांव समेत कई लोग मौजूद रहे. आयोजनकर्ता विनोद उरांव, लालू उरांव, कमल उरांव, रोहित उरांव, सनियारो उरांव, रीना उरांव, रीता उरांव एवं प्रदीप उरांव ने कार्यक्रम की व्यवस्था संभाली.

जावा फूल के महत्व की दी जानकारी

कार्यक्रम में अतिथियों ने करमा पर्व के महत्व और इसे मनाने की परंपरा के बारे में जानकारी दी. वक्ताओं ने कहा कि अपनी संस्कृति और परंपरा को जीवंत रखने के लिए पर्व-त्योहारों को पारंपरिक तरीके से मनाना जरूरी है. इस दौरान करमा पर्व के साथ जावा फूल के महत्व पर भी विस्तार से प्रकाश डाला गया.

वक्ताओं ने बताया कि जावा के बिना करमा पूजा अधूरी मानी जाती है. जावा को नई फसल, समृद्धि और भाई-बहन के प्रेम का प्रतीक माना जाता है. करमा पर्व से करीब एक सप्ताह पहले कुंवारी बहनें टोकरी में मिट्टी, बालू और जावा के बीज बोती हैं. इसे जावा कहा जाता है. करीब नौ दिनों तक इसकी देखभाल और पूजा की जाती है. मान्यता है कि जावा के अंकुरित होकर बढ़ने के साथ भाई-बहन के प्रेम और फसल में वृद्धि होती है. करमा की रात जावा को काटकर करम डाली के साथ उसकी पूजा की जाती है और भाई की लंबी उम्र की कामना की जाती है.

बच्चों को समाज से जोड़ने पर जोर

जिला उपाध्यक्ष मनोज उरांव ने कहा कि समाज के बच्चों को सामाजिक कार्यक्रमों और बैठकों में शामिल करने की जरूरत है. उन्होंने कहा कि अपनी भाषा और संस्कृति को बचाने में समाज के बच्चे भविष्य में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं.

उन्होंने कहा कि आज कहीं न कहीं आदिवासी समाज के कुछ बच्चे समाज से भटक रहे हैं. ऐसे में बच्चों को सही दिशा देने के लिए हर सामाजिक बैठक और कार्यक्रम में उनकी भागीदारी सुनिश्चित करना जरूरी है.

कई गांवों के खोड़हा दल हुए शामिल

कार्यक्रम में मनहे, महुंगाव, तेतरटांड़, अरेया समेत कई गांवों के खोड़हा दलों ने हिस्सा लिया. गीत-संगीत और मांदर की थाप पर लोग देर रात तक थिरकते नजर आए. पूरे कार्यक्रम के दौरान पारंपरिक संस्कृति और उत्सव का माहौल बना रहा.

प्रभात खबर डिजिटल टॉप स्टोरी

लेखक के बारे में

By Prabhat khabar news desk

यह प्रभात खबर का न्यूज डेस्क है। इसमें बिहार-झारखंड-ओडिशा-दिल्‍ली समेत प्रभात खबर के विशाल ग्राउंड नेटवर्क के रिपोर्ट्स के जरिए भेजी खबरों का प्रकाशन होता है।
Read More
ePaper

अपने दैनिक समाचार अनुभव को और बेहतरीन बनाएं

सिर्फ ₹399 ₹149

एक साल के लिए

आज ही सब्सक्राइब करें

संबंधित खबरें >

यह भी पढ़ें >