भंडरा- लोहरदगा : प्रखंड मुख्यालय से दो किमी एवं जिला मुख्यालय से 20 किमी दूर 1857 के विद्रोह के क्रांति दूत शहीद पांडेय गणपत राय का गांव भौंरो कृषि संपन्न होने के बावजूद कई समस्याएं झेल रहा है.
यहां की आबादी 2900 है. भौंरो गांव के लोग सड़क, पानी, शिक्षा, सिंचाई, स्वास्थ्य की समस्याएं झेल रहे हैं. साल में एक दिन 17 जनवरी को पांडेय गणपत राय की जयंती समारोह में जनप्रतिनिधि अवश्य आते हैं. यहां जयंती समारोह में राज्य के मुख्यमंत्री, विधानसभा अध्यक्ष, केंद्रीय मंत्री सुदर्शन भगत, झारखंड सरकार के मंत्री सरयू राय सहित दर्जनों मंत्री आ चुके हैं और घोषणाओं की झड़ी भी लगा चुके हैं, लेकिन धरातल पर कोई काम नहीं हुआ है. यहां बड़ी-बड़ी घोषणाएं होती हैं. कहा जाता है कि भौंरो गांव को आदर्श ग्राम बनायेंगे. शहरों जैसी सुविधाएं उपलब्ध करायेंगे, लेकिन जैसे ही समारोह स्थल से टेंट उखड़ना शुरू होता है नेता अपना वादा भूलने लगते हैं. कुछ सरकारी योजनाएं गांव में मिलती भी है तो वो अधिकारियों की मिलीभगत से भ्रष्टाचार के भेंट चढ़ जाती है.
गांव में अभी बुनियादी सुविधाओं का अभाव है. गांव में सफाई के अभाव में नालियां बजबजा रही है. अतिक्रमण के कारण गांव से गुजरने वाली नदी नाला में तब्दील हो गया है. तालाब सिमट गया है. सड़क की दुर्गति हो चुकी है. राशन दुकान में भी सामान समय पर नही मिलता है. इससे काफी परेशानियों का सामना करना पड़ता है. ग्रामीणों का कहना है कि विकास की बात तो सभी करते हैं, लेकिन इसके लिए जो प्रयास होना चाहिए, वह नहीं के बराबर होता है. यदि ईमानदारी के काम किया जाये, तो विकास नजर आने लगेगा.
