जिले में गहराया जल संकट
गरमी ने दी दस्तक. बूंद-बूंद पानी के लिए परेशान हैं लोग
लोहरदगा : गरमी के दस्तक देने के साथ ही लोहरदगा जिले में पीने की पानी के लिए हाहाकार मचा हुआ है. क्या गांव, क्या शहर तमाम जगहों पर बूंद -बूंद पानी के लिए लोग अहले सुबह से लेकर देर रात तक मशक्कत कर रहे हैं. पानी की यह समस्या लोहरदगा जिला में कोई नयी समस्या नहीं है. हर बार गरमी के मौसम में पेयजल की समस्या सामने आती है . लोहरदगा जिला की स्थापना 17 मई 1983 को हुई थी. जिला स्थापना के समय लोगों ने कई ख्वाब देखे थे, लेकिन किसी ने भी ये नहीं सोचा था कि लोहरदगा जिला में कभी पीने के पानी के लिए भी लोगों का मशक्कत करनी पड़ेगी. लोहरदगा जिला की आबादी पांच लाख है.
शहर की आबादी लगभग 60 हजार के करीब है. नगर परिषद क्षेत्र में 22 वार्ड हैं और हरेक वार्ड में पेयजल की गंभीर समस्या है. समस्या के निदान को लेकर जिला प्रशासन, विधायक, नगर परिषद, अधिवक्ता संघ सहित अन्य लोगों के साथ लगातार बैठक की जा रही है लेकिन अब तक कुछ इलाकों में टैंकर से जलापूर्ति के अलावे कोई निदान नहीं निकला है. टैंकर से पानी की आपूर्ति भी पर्याप्त नहीं हो रही है. लोगों की परेशानी जस की तस है.
चाहिए पांच लाख गैलन, मिल रहा है एक लाख : लोहरदगा शहरी क्षेत्र में 22 वार्ड हैं. यहां 2420 जलापूर्ति के कनेक्शनधारी हैं. शहर में प्रतिव्यक्ति 145 लीटर पानी की खपत तय की गयी है. शहर में पांच लाख गैलन प्रतिदिन पानी की आवश्यकता है जबकि अभी बड़ी मुश्किल से किस्तों में एक लाख गैलन पानी की आपूर्ति की जा रही है. पठारी क्षेत्र होने के कारण यहां के अधिकांश चापानल खराब पड़े हैं. लोहरदगा शहरी क्षेत्र में 513 हैंडपंप हैं और नगर परिषद के द्वारा बताया जाता है कि लगभग 450 हैंडपंप चालू अवस्था में हैं.
सब काम छोड़ पानी की जुगाड़ में लग जाते हैं : किस्को प्रखंड के पाखर, बंगलापाट, तुईमू पाट, खड़िया, तलसा, पेशरार के डूमरपाट, सरना पाट सहित दर्जनों गांव में स्थिति भयावह है. भंडरा प्रखंड में पेयजल का संकट काफी पहले से रहा है लेकिन यहां भी अब तक इस समस्या का निदान नहीं हो सका है. सेन्हा प्रखंड क्षेत्र में पानी की समस्या गंभीर है. लोग सभी काम छोड़कर पानी जुगाड़ में अपना ज्यादा वक्त लगा रहे हैं. सरकारी आकड़ों के अनुसार 1220 हैंडपंप खराब पड़े हैं, लेकिन धरातल की स्थिति कुछ और है.
जलापूर्ति योजना पर नहीं हुआ काम : जिले में अकाशी ग्रामीण पाइप जलापूर्ति योजना का काम शिल्पी कंस्ट्रक्शन गिरिडीह द्वारा किया जा रहा है. यह काम 27 जून 2013 को शुरू होकर 26 जून 2015 को पूरा होना था. लगभग 13.50 करोड़ रुपये की लागत से बनने वाली इस योजना का लाभ भी ग्रामीणों को नहीं मिल पा रहा है. पूरी तरह यह योजना चालू नहीं हुई है. कुछ क्षेत्रों में जैसे तैसे जलापूर्ति की जा रही है.
पानी के लिए लोग सुबह से लेकर देर रात तक हो रहे हैं पानी-पानी
भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ रही है जलापूर्ति योजना
लोहरदगा में शहरी जलापूर्ति योजना लगभग 12.50 करोड़ रुपये की लागत से बनायी गयी. यह योजना 2004 की थी. इसके संवेदक एसएन इंवाईटरी टेक प्राइवेट लिमिटेड नयी दिल्ली थे. इसके तहत तीन इंफिल्ट्रेशन वेल का निर्माण किया जाना था, लेकिन अप्रैल 2010 में एक इंटकवेल का निर्माण होने के बाद ही तत्कालीन विधायक कमल किशोर भगत द्वारा इस योजना का उदघाटन कर दिया गया था. जैसे ही इस शहरी जलापूर्ति योजना का उदघाटन हुआ, संवेदक दो इंफिल्ट्रेशन वेल का काम पूरा किये बिना दिल्ली भाग गया. और अब तक यह इंफिल्ट्रेशन वेल नहीं बना, इसके बावजूद संवेदक के विरुद्ध पेयजल स्वच्छता विभाग ने कोई कार्रवाई की और न ही जनप्रतिनिधियों ने ही कोई आवाज उठायी. बताया जाता है कि संवेदक द्वारा इस जलापूर्ति योजना में अन्य कई गड़बड़ी की गयी. जिन जिन इलाकों में पाइप बिछाना था, उन इलाकों में पूरा पाइप भी नहीं बिछाया गया.
