रांची/ लोहरदगा : स्वच्छ भारत मिशन के अंतर्गत लोहरदगा जिला खुले में शौचमुक्त जिला बन गया. यहां दूसरे जिलों के लोग आकर देख रहे हैं कि कैसे लोहरदगा को इतनी बड़ी सफलता इतने कम समय में मिल गयी. पेयजल एवं स्वच्छता विभाग द्वारा जो आंकड़ा प्रस्तुत किया गया, उसके अनुसार बेस लाइन सर्वे में जितने घरों में शौचालय का निर्माण करना था, वहां काम पूरा हो गया है और एमआइएस इंट्री भी हो गयी. बेस लाइन सर्वे के अनुसार लोहरदगा में एक भी घर ऐसा नहीं है, जिसमें शौचालय का निर्माण नहीं हुआ है. लोहरदगा जिला बिहार, ओड़िशा एवं झारखंड का पहला जिला है, जो खुले में शौचमुक्त जिला बना है.
इसके पूर्व रामगढ़ जिला को खुले में शौचमुक्त जिला बनने की घोषणा की गयी थी लेकिन रामगढ़ में सिर्फ ग्रामीण इलाकों में ओडीएफ हुआ, लेकिन लोहरदगा में ग्रामीण एवं शहरी दोनों क्षेत्र ओडीएफ कर दिया गया है. लोहरदगा जिला में बेस लाइन सर्वे सूची के अनुसार 353 गांवों में 59573 शौचालय बनाने का लक्ष्य रखा गया था, जो पूरा हो गया है. इसमें जिला प्रशासन, पेयजल एवं स्वच्छता प्रमंडल के सभी अभियंता व अधिकारी, कर्मचारी, यूनिसेफ के प्रतिनिधि, मास्टर ट्रेनर,साक्षरता समिति, स्वच्छता प्रेरक ने अथक प्रयास किया.
कैसे हुआ लोहरदगा ओडीएफ: लोहरदगा को खुले में शौचमुक्त बनाने के पूर्व काफी परेशानियों का भी सामना करना पड़ा. उपायुक्त विनोद कुमार ने मार्निंग फॉलो-अप के माध्यम से कड़ाके की सर्दी में ग्रामीण इलाकों में जाकर खुले में शौच करने जा रहे लोगों को समझाते थे कि तमाम बीमारियों की जड़ गंदगी है और यह तभी फैलती है जब लोग खुले में शौच करते हैं. इसी तरह रात्रि चौपाल लगाकर गांव में लोगों को शौचालय निर्माण एवं उसके उपयोग के लिए प्रेरित किया गया.
उपायुक्त ने जिले के तमाम सरकारी कर्मियों, अनुबंध में कार्यरत कर्मियों, पंचायती राज के प्रतिनिधियों से शपथ पत्र लिया कि उनके घरों में शौचालय बन गया है और वे लोग उसका उपयोग करते हैं. जिले के अधिकारियों को भी पंचायतों की जिम्मेवारी दी गयी, जहां वे लोग जाकर शौचालय निर्माण का कार्य देखते थे और शौचालय निर्माण एवं उसके उपयोग के लिए लोगों को प्रेरित करते थे. जिले में जागरूकता अभियान चलाया गया. छोटा सिपाही, गुलाबी गैंग बनाकर लोगों को मोटिवेट किया गया.
शौचालय निर्माण के कार्य में तमाम बीडीओ, सीओ, साक्षरता कर्मियों, अधिकारियों को जिम्मेवारी देकर इसे धरातल पर उतारा गया. भंडरा प्रखंड के कुम्हरिया में जहां हर ओर सिर्फ चट्टान ही चट्टान है उस गांव के पांच घरों के लोगों के समक्ष शौचालय बनवाने की समस्या थी, लेकिन इसका भी निदान निकाला गया. चट्टानों के बीच कम्युनिटी शौचालय बनवाया गया.
लोहरदगा जिले को खुले में शौच से मुक्त घोषित करने के पूर्व धरातल पर क्या सच है, इसे जानने के लिए यूनिसेफ झारखंड एवं रांची से पत्रकारों की एक टीम कुड़ू पहुंची. टीम ने राजकीय कन्या मध्य विद्यालय टाकू एवं पंडरा पंचायत का जायजा लिया. पीएचइडी विभाग द्वारा बनाये गये शौचालयों के इस्तेमाल, साफ -सफाई सहित हैंडवास यूनिट से होनेवाले फायदे अन्य जानकारी ली. यूनिसेफ के राज्य सलाहकार मिथिलेश सिंह के नेतृत्व में टीम आयी थी.
