होर्मुज स्ट्रेट खुलवाने नहीं आया नाटो, गुस्साए ट्रंप करवाएंगे पुतिन का फायदा, जानें अब क्या कह दिया?

Trump Hormuz NATO Ukraine: ईरान-अमेरिका युद्ध में यूक्रेन बलि का बकरा बन सकता है. ट्रंप ने होर्मुज स्ट्रेट खुलवाने के लिए यूरोपीय देशों की सहायता न मिलने पर बड़ी धमकी दी है. उन्होंने नाटो देशों से कई बार अपील की, लेकिन उन्होंने हर बार इससे इनकार किया है.

Trump Hormuz NATO Ukraine: ईरान युद्ध रुकेगा या नहीं? होर्मुज स्ट्रेट खुलेगा या नहीं? मिडिल ईस्ट संघर्ष में नाटो देश अमेरिका की मदद करेंगे या नहीं? यह ऐसे सवाल हैं, जो बीते एक महीने से काफी चर्चा में है. इन तीनों मुद्दों पर अमेरिकी राष्ट्रपति लगातार बयान दे रहे हैं, लेकिन तीखी बयानबाजी के बावजूद डोनाल्ड ट्रंप को कोई मदद मिलती नहीं दिख रही है. इसी बात से खिसियाए प्रेसिडेंट ट्रंप अब अपना गुस्सा यूक्रेन पर निकाल सकते हैं. 

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप अपने यूरोपीय सहयोगियों पर दबाव बनाने के लिए यूक्रेन को हथियारों की आपूर्ति रोकने की धमकी दी है. ट्रंप चाहते हैं कि नाटो देश हॉर्मुज़ स्ट्रेट को खोलने के लिए अमेरिका साथ दें. फाइनेंशियल टाइम्स की एक रिपोर्ट के मुताबिक, ट्रंप ने संकेत दिया कि अगर सहयोगी ‘कोएलिशन ऑफ द विलिंग’ में शामिल नहीं होते, तो वे नाटो की हथियार खरीद पहल PURL के लिए समर्थन कम कर सकते हैं. इसे यूरोपीय देश फंड करते हैं.

चार साल से रूस का सामना कर रहा है यूक्रेन

ऐसे में ट्रंप के कोपभाजन का शिकार यूक्रेन को बनना पड़ सकता है. यूक्रेन पिछले चार साल से अधिक (फरवरी 2022) समय से रूस के खिलाफ जंग में है. रूस जैसी महाशक्ति का सामना करना यूक्रेन के अकेले बस की बात नहीं है, ऐसे में यूरोपीय देश ही उसकी सहायता करते हैं. रूस-यूक्रेन युद्ध अब भी जारी है, लेकिन ट्रंप के बयान के बाद बदली हुई परिस्थिति में अगर उन्होंने हथियार पर रोक लगा दी, तो यूक्रेन के सामने बड़ा संकट पैदा हो सकता है. वहीं रूस और पुतिन के लिए यूक्रेन पर हमला करना और भी आसान हो जाएगा.

होर्मुज खुलवा पाने में अब तक असमर्थ ट्रंप

यह कदम ऐसे समय में सामने आया है जब हॉर्मुज स्ट्रेट को लेकर तनाव बढ़ा हुआ है. यह वैश्विक तेल आपूर्ति के लिए बेहद अहम मार्ग है, यहां से पूरी दुनिया का लगभग 20 प्रतिशत तेल और गैस का यातायात होता. इसे अमेरिका और इजराइल के हमलों के बाद ईरान ने प्रभावी रूप से बंद कर दिया है. ट्रंप नाटो नौसेनाओं से इस जलमार्ग को फिर से खोलने में मदद की अपील कर रहे हैं, लेकिन कई यूरोपीय देशों ने इसे ‘हमारा युद्ध नहीं’ बताते हुए इसमें शामिल होने से हिचक दिखाई है.

ये भी पढ़ें:- अमेरिका के एक और स्टेट ने दीपावली उत्सव को दी मान्यता, यहां रहते हैं 9000 हिंदू

नाटो महासचिव ने साझा बयान जारी करने पर दिया जोर

रिपोर्ट के अनुसार, ट्रंप की इस चेतावनी के बाद नाटो के भीतर कूटनीतिक हलचल तेज हो गई. नाटो महासचिव मार्क रूटे ने फ्रांस, जर्मनी और ब्रिटेन जैसे प्रमुख देशों के साथ एक संयुक्त बयान जारी करने पर जोर दिया, जिसमें होर्मुज में सुरक्षित आवाजाही सुनिश्चित करने के प्रयासों का समर्थन करने की बात कही गई. एक अधिकारी ने फाइनेंशियल टाइम्स से कहा कि रूटे ने संयुक्त बयान पर इसलिए जोर दिया क्योंकि ट्रंप ने यूक्रेन से समर्थन पूरी तरह वापस लेने की धमकी दी थी.

ये भी पढ़ें:- अगर समझौता नहीं हुआ तो, ईरान वॉर में अब हमारा टारगेट ये होगा… ट्रंप ने दी नई धमकी

लगातार नाटो पर हमलावर हैं ट्रंप

ट्रंप लगातार नाटो से अपनी नाराजगी जाहिर करते रहे हैं और सहयोगियों पर अमेरिकी प्राथमिकताओं का समर्थन न करने का आरोप लगाते रहे हैं. उन्होंने हाल ही में एक कैबिनेट बैठक में कहा, ‘हम नाटो की रक्षा के लिए हैं, लेकिन वे हमारी रक्षा के लिए नहीं हैं. यह हास्यास्पद है.’ इससे पहले, द टेलीग्राफ को दिए एक इंटरव्यू में ट्रंप ने नाटो से संभावित अमेरिकी वापसी पर विचार करने की बात कही थी. उन्होंने नाटो को कागजी शेर तक बताया था. हालांकि, ट्रंप का अमेरिका को नाटो से बाहर करना आसान नहीं होगा, इसके लिए उन्हें अमेरिकी सीनेट से सलाह, सहमति और दो तिहाई बहुमत भी प्राप्त करना होगा. हालांकि, ट्रंप यूक्रेन की हथियार आपूर्ति को जरूर बंद कर सकते हैं.  

प्रभात खबर डिजिटल टॉप स्टोरी

लेखक के बारे में

By Anant narayan shukla

अनन्त नारायण शुक्ल प्रभात खबर डिजिटल में कंटेंट क्रिएटर के रूप में कार्यरत हैं. उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में करीब दो वर्षों का अनुभव है. अनन्त राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मामलों, वैश्विक भू-राजनीति (ग्लोबल जियोपॉलिटिक्स), रक्षा नीति, कूटनीति और विश्व राजनीति से जुड़े विषयों पर खबरें करते हैं. वे दुनिया भर में घट रही महत्वपूर्ण घटनाओं को गहरी रिसर्च और तथ्यमात्मक विश्लेषण के साथ पाठकों तक पहुंचाने का काम करते हैं.

अनन्त मुख्य रूप से अंतरराष्ट्रीय संघर्ष, वैश्विक सुरक्षा, रक्षा रणनीतियों, विदेश नीति, भारत के पड़ोसी देशों से जुड़े घटनाक्रम और विश्व स्तर पर भारत की भूमिका जैसे विषयों को कवर करते हैं. इजरायल-ईरान संघर्ष, अमेरिका की विदेश नीति, परमाणु सुरक्षा, पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (PoK) के हालात, नेपाल-चीन सीमा से जुड़े मुद्दे और वैश्विक कूटनीतिक घटनाक्रम पर उनकी विशेष पकड़ है. इसके अलावा वे अंतरराष्ट्रीय आपदाओं, विदेशों में बसे भारतीयों और वैश्विक स्तर पर भारत के बढ़ते प्रभाव से जुड़ी खबरों पर भी नियमित रूप से लिखते हैं.

इतिहास, राजनीति और विज्ञान में उनकी गहरी रुचि रही है, जिसने उन्हें वैश्विक मामलों और अंतरराष्ट्रीय पत्रकारिता की ओर प्रेरित किया. यही वजह है कि उनके लेखों में विषय की गहराई, एक्सपर्ट्स की राय के साथ उनके कमेंट्स, तथ्यों की सटीकता और व्यापक संदर्भ देखने को मिलता है. बदलते वैश्विक परिदृश्य पर उनकी पैनी नजर रहती है, जिससे वे पाठकों तक समय पर विश्वसनीय और विश्लेषणात्मक जानकारी पहुंचाते हैं.

अनन्त को राष्ट्रीय राजनीति की भी समझ है. उन्होंने झारखंड विधान सभा 2024, दिल्ली विधान सभा चुनाव 2025 चुनाव और देश के अन्य चुनावों को कवर किया है. चुनाव के काउंटिंग डे को कवर करने का भी उनके पास काफी अनुभव है.

अनन्त कभी-कभी नेशनल डेस्क भी संभालते हैं, जिसमें देश भर में जनता से जुड़े जरूरी सामाजिक मुद्दे, न्यायिक खबरों और अपराध की खबरों को भी कवर करते हैं. इसके अलावा उन्हें रोचक जानकारियों को क्यूरेट करने का भी शौक है. इसमें लाइफस्टाइल, ऐतिहासिक और पुरातात्विक जानकारी के साथ ही दुनिया भर के साम्राज्यों के बारे में खबरें करते हैं.

उत्तर प्रदेश के भदोही जिले के रहने वाले अनन्त ने इलाहाबाद विश्वविद्यालय से मास कम्युनिकेशन में पोस्ट ग्रेजुएशन की पढ़ाई पूरी की है. उन्होंने 2024 में अपने पत्रकारिता करियर की शुरुआत प्रभात खबर में खेल पत्रकार के रूप में की थी, जहां उन्होंने करीब एक वर्ष तक क्रिकेट और अन्य खेलों से जुड़ी खबरों को कवर किया. बाद में अपनी रुचि और विशेषज्ञता के चलते उन्होंने अंतरराष्ट्रीय डेस्क का रुख किया और आज वैश्विक राजनीति व भू-राजनीति के प्रमुख विषयों पर लेखन कर रहे हैं.

तथ्यों की पुष्टि और सटीक जानकारी को वे अपनी पत्रकारिता का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा मानते हैं. उनका प्रयास रहता है कि पाठकों को विश्व घटनाक्रम की भरोसेमंद, संतुलित और गहन जानकारी सरल भाषा में उपलब्ध हो, ताकि वे वैश्विक मुद्दों को बेहतर ढंग से समझ सकें.

Read More
ePaper

अपने दैनिक समाचार अनुभव को और बेहतरीन बनाएं

सिर्फ ₹399 ₹149

एक साल के लिए

आज ही सब्सक्राइब करें

संबंधित खबरें >

यह भी पढ़ें >