कृष्णा गुप्ता की रिपोर्ट गारू (लातेहार). सरकार की कई योजनाएं संचालित होने के बावजूद गारू प्रखंड के नक्सल प्रभावित सुरकुमी-हेसवा गांव आज भी सड़क और पुल की सुविधा से नहीं जुड़ सका है. सुरकुमी गांव को प्रखंड मुख्यालय से जोड़ने वाले रास्ते में कुड़ील नदी पड़ती है. नदी पर पुल नहीं होने के कारण बरसात में गांव का प्रखंड मुख्यालय से संपर्क प्रभावित हो जाता है.
बाढ़ और तेज जलप्रवाह के दौरान रास्ते से आवागमन मुश्किल
सुरकुमी, हेसवा, नावाटोली, भंवरबंधा, बेसनखाड़ और मौनाडोंडा गांवों की करीब ढाई हजार आबादी को इसका खामियाजा भुगतना पड़ता है. इन गांवों के चारों ओर जंगल, पहाड़ और नदियां हैं. गारू प्रखंड मुख्यालय से सुरकुमी-हेसवा गांव की दूरी करीब पांच किलोमीटर है, लेकिन कुड़ील नदी में बाढ़ और तेज जलप्रवाह के दौरान इस रास्ते से आवागमन मुश्किल हो जाता है. ग्रामीणों के अनुसार, ऐसी स्थिति में उन्हें मारोमाड़ होकर करीब 14 किलोमीटर की दूरी तय कर प्रखंड मुख्यालय पहुंचना पड़ता है. सड़क और पुल के अभाव में बड़े वाहन भी गांव तक नहीं पहुंच पाते हैं. ग्रामीणों को कुड़ील नदी के अलावा तीन जंगली नालों को पार करना पड़ता है.
छात्र, मरीज और बुजुर्ग सबसे ज्यादा परेशान
ग्रामीणों ने बताया कि बरसात के दिनों में स्कूली बच्चों को स्कूल जाने, मरीजों को अस्पताल पहुंचाने और बुजुर्गों को प्रखंड मुख्यालय आने-जाने में काफी परेशानी होती है. नदी में तेज बहाव होने पर पैदल आवागमन भी जोखिम भरा हो जाता है. सामाजिक कार्यकर्ता पतवा सिंह, ग्राम प्रधान नरेश सिंह सहित अंतु कोरवा, बिफन सिंह, सत्यनारायण सिंह, जगन्नाथ सिंह, बलकु सिंह, अजय सिंह, सोहन उरांव, बालेश्वर उरांव, लक्ष्मण सिंह, मानकी सिंह, बिनेषर सिंह, दिनेश सिंह, राजेंद्र सिंह, शिवचरण कोरवा, मंगल बिरजिया और किशन सिंह समेत कई ग्रामीणों ने पुल निर्माण की मांग की है. ग्रामीणों का कहना है कि पुल और बिजली की सुविधा नहीं होने से उन्हें लंबे समय से परेशानी का सामना करना पड़ रहा है.
दो बार हुआ टेंडर, फिर भी नहीं बना पुल
ग्रामीणों के अनुसार, कुड़ील नदी पर पुल निर्माण के लिए दो बार टेंडर हो चुका है. पहली बार वर्ष 2011-12 में पीएमजेएसवाई के तहत टेंडर हुआ था. इसके बाद वर्ष 2021-22 में पीएमजेएसवाई के तहत पुल और सड़क निर्माण के लिए दोबारा टेंडर किया गया. ग्रामीणों का कहना है कि वन विभाग से एनओसी नहीं मिलने के कारण पुल का निर्माण नहीं हो सका. जंगल क्षेत्र में करीब ढाई किलोमीटर सड़क का निर्माण भी अधूरा रह गया.
जनता दरबार से सांसद तक उठी मांग
ग्रामीणों ने बताया कि वर्ष 2018-19 में सुरकुमी गांव में आयोजित जनता दरबार में तत्कालीन उपायुक्त जिशान कमर के सामने सड़क और पुल निर्माण की मांग रखी गई थी. आश्वासन मिलने के बावजूद अब तक निर्माण नहीं हो सका. इस वर्ष 5 अप्रैल को गारू में हुई बैठक में ग्रामीणों ने चतरा सांसद कालीचरण सिंह के सामने भी कुड़ील नदी पर पुल निर्माण की मांग रखी थी. ग्रामीणों के अनुसार, सांसद ने पुल निर्माण का आश्वासन दिया है. ग्रामीणों का कहना है कि झारखंड अलग राज्य बने 25 वर्ष से अधिक समय हो चुका है, लेकिन सुरकुमी-हेसवा और आसपास के गांवों के लोगों को आज भी सड़क, पुल, बिजली और स्वास्थ्य जैसी बुनियादी सुविधाओं के लिए परेशानी उठानी पड़ रही है.
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