बेतला से संतोष कुमार की रिपोर्ट
Latehar News: झुलसाने वाली गर्मी की दस्तक के साथ ही पलामू टाइगर रिजर्व प्रबंधन पूरी तरह अलर्ट मोड में आ गया है. वन्यजीवों को गर्मी के मौसम में किसी तरह की परेशानी न हो, इसके लिए झारखंड के लातेहार जिला स्थित बेतला नेशनल पार्क में समर एक्शन प्लान लागू कर दिया गया है. पार्क प्रशासन ने गर्मियों में वन्यजीवों को पर्याप्त पानी उपलब्ध कराने और उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए कई विशेष इंतजाम शुरू कर दिए हैं. बेतला नेशनल पार्क में रहने वाले हिरण, चीतल, बंदर, लंगूर और अन्य वन्यजीवों को पानी की तलाश में जंगल से बाहर न निकलना पड़े, इसके लिए कृत्रिम जलपात्रों में टैंकरों के माध्यम से पानी पहुंचाने का काम युद्ध स्तर पर शुरू किया गया है.
टैंकरों से भरे जा रहे कृत्रिम जलपात्र
पार्क प्रशासन द्वारा जंगल के विभिन्न हिस्सों में बनाए गए वाटर ट्रफ यानी कृत्रिम जलपात्रों में नियमित रूप से पानी भरा जा रहा है. इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि भीषण गर्मी के दौरान भी वन्यजीवों को उनके प्राकृतिक आवास के आसपास ही पर्याप्त पेयजल मिल सके. बेतला नेशनल पार्क के रेंजर उमेश कुमार दुबे ने बताया कि फिलहाल पार्क के प्राकृतिक और पारंपरिक जल स्रोतों में पानी की कमी नहीं है. इसके बावजूद एहतियात के तौर पर अतिरिक्त जलापूर्ति की जा रही है, ताकि आने वाले दिनों में किसी प्रकार की समस्या उत्पन्न न हो. उन्होंने कहा कि गर्मियों के दौरान छोटे वन्यजीवों को सबसे ज्यादा परेशानी होती है, क्योंकि उन्हें पानी की तलाश में लंबी दूरी तय करनी पड़ती है. ऐसे में टैंकरों के माध्यम से की जा रही जलापूर्ति उन्हें बड़ी राहत देगी.
सोलर पंपसेट से भी मिल रही मदद
वन विभाग ने पार्क के अलग-अलग हिस्सों में आधा दर्जन से अधिक सोलर आधारित पंपसेट भी लगाए हैं. ये पंपसेट जंगल के गहरे जलाशयों से जुड़े हुए हैं और लगातार जल स्तर बनाए रखने में मदद कर रहे हैं. दिनभर सौर ऊर्जा से संचालित ये पंपसेट वाटर ट्रफ और अन्य जल स्रोतों में पानी पहुंचाने का काम कर रहे हैं. इससे न केवल पानी की उपलब्धता बनी हुई है, बल्कि गर्मियों में वन्यजीवों के पलायन की संभावना भी कम हो रही है. वन विभाग के अधिकारियों का कहना है कि हर वर्ष अप्रैल और मई में पानी की समस्या बढ़ने लगती है. इस बार विभाग ने पहले से तैयारी कर ली है, ताकि वन्यजीवों को किसी भी तरह की परेशानी का सामना न करना पड़े.
सीमावर्ती इलाकों में बढ़ाई गई निगरानी
गर्मी के मौसम में जब जंगल के भीतर पानी कम होने लगता है तो कई वन्यजीव पार्क की सीमा पार कर गांवों और बाहरी क्षेत्रों की ओर चले जाते हैं. इससे उनके शिकार होने का खतरा बढ़ जाता है. इसी खतरे को देखते हुए इस बार वन विभाग ने सीमावर्ती इलाकों में विशेष निगरानी शुरू कर दी है. पार्क के संवेदनशील और सीमावर्ती रास्तों पर वन कर्मियों की विशेष तैनाती की गई है. इसके अलावा नियमित गश्त के साथ-साथ चौबीसों घंटे विशेष पेट्रोलिंग भी शुरू की गई है. वन विभाग का मानना है कि यदि जानवर जंगल से बाहर निकलते हैं तो वे शिकारियों के आसान निशाने पर आ सकते हैं. इसलिए हर हाल में उन्हें जंगल के भीतर सुरक्षित रखना प्राथमिकता है.
एंटी-पोचिंग कैंप किए गए सक्रिय
वन्यजीवों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए पार्क के आसपास एंटी-पोचिंग कैंप भी सक्रिय कर दिए गए हैं. इन शिविरों के माध्यम से वन कर्मी लगातार जंगल और सीमावर्ती क्षेत्रों पर नजर बनाए हुए हैं. पलामू टाइगर रिजर्व के उच्च अधिकारियों ने बेतला प्रबंधन को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि गर्मियों में किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी. यदि गश्त या निगरानी में कोताही सामने आती है तो संबंधित कर्मियों पर कार्रवाई होगी. रेंजर उमेश कुमार दुबे ने बताया कि वन्यजीवों पर सालभर निगरानी रखी जाती है, लेकिन गर्मियों में अतिरिक्त सतर्कता बरती जाती है. उन्होंने कहा कि वन्यजीवों की सुरक्षा विभाग की सर्वोच्च प्राथमिकता है.
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दावानल से निपटने की भी तैयारी
गर्मियों के मौसम में जंगल की आग यानी दावानल भी एक बड़ी चुनौती बन जाती है. सूखी पत्तियों और तेज गर्म हवाओं के कारण आग तेजी से फैल सकती है, जिससे वन्यजीवों और जंगल दोनों को नुकसान पहुंचता है. इसी खतरे को देखते हुए फायर वॉचर्स की विशेष टीमों को भी तैनात किया गया है. ये टीमें लगातार जंगल के संवेदनशील इलाकों पर नजर रख रही हैं और सूखी पत्तियों की सफाई का काम कर रही हैं. वन विभाग का कहना है कि किसी भी अप्रिय घटना से तुरंत निपटने के लिए सभी जरूरी संसाधन तैयार रखे गए हैं. विभाग का लक्ष्य बेतला के समृद्ध पारिस्थितिकी तंत्र और वन्यजीवों को हर परिस्थिति में सुरक्षित रखना है.
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