लातेहार से चंद्रप्रकाश सिंह की रिपोर्ट
Success Story: झारखंड के लातेहार जिले के सदर प्रखंड स्थित जालिम खुर्द गांव के किसान संदीप कुमार ने यह साबित कर दिया है कि सही मार्गदर्शन, आधुनिक तकनीक और मेहनत के बल पर बंजर जमीन को भी सोना उगलने वाला खेत बनाया जा सकता है. प्रधानमंत्री किसान समृद्धि योजना-2 (वाटरशेड) के तहत उन्होंने अपनी एक एकड़ बंजर भूमि पर ड्रैगन फ्रूट की खेती शुरू की, जो आज न केवल उनके परिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत कर रही है, बल्कि जिले के अन्य किसानों के लिए भी प्रेरणा का स्रोत बन गई है.
बंजर जमीन से शुरू हुआ सफलता का सफर
करीब तीन वर्ष पहले संदीप कुमार की एक एकड़ जमीन पूरी तरह बंजर थी. खेती योग्य नहीं मानी जाने वाली इस भूमि पर पारंपरिक फसलें भी अच्छी नहीं होती थीं. ऐसे समय में जिला भूमि संरक्षण कार्यालय, लातेहार की पहल पर उन्हें ड्रैगन फ्रूट की खेती करने का सुझाव मिला. शुरुआत में यह विचार उन्हें काफी अलग और चुनौतीपूर्ण लगा, क्योंकि क्षेत्र में पहले कभी बड़े पैमाने पर इस फल की खेती नहीं हुई थी. इसके बावजूद उन्होंने जोखिम उठाया और विभाग के सहयोग से खेती शुरू करने का फैसला किया.
जैविक खाद ने बदल दी मिट्टी की तस्वीर
खेती शुरू करने से पहले जमीन को तैयार करने के लिए जैविक खाद का व्यापक उपयोग किया गया. इसके बाद ड्रैगन फ्रूट के पौधे लगाए गए. तीन वर्षों की देखभाल और नियमित मेहनत का परिणाम यह है कि कभी बंजर रही जमीन अब पूरी तरह उपजाऊ हो चुकी है और हरे-भरे पौधों से लहलहा रही है. इस वर्ष खेत में ड्रैगन फ्रूट की बेहतरीन फ्लावरिंग और फ्रूटिंग देखने को मिल रही है. अच्छी पैदावार से किसान और उनका परिवार काफी उत्साहित है. कृषि विशेषज्ञों के अनुसार ड्रैगन फ्रूट की फसल एक बार लगाने के बाद लगभग 25 वर्षों तक उत्पादन देती है, जिससे लंबे समय तक आय का स्रोत बना रहता है.
विभाग ने उपलब्ध कराए पौधे और प्रशिक्षण
प्रधानमंत्री किसान समृद्धि योजना-2 (वाटरशेड) के तहत जिला भूमि संरक्षण कार्यालय ने किसान को ड्रैगन फ्रूट के पौधे, जैविक खाद, तकनीकी प्रशिक्षण और अन्य आवश्यक संसाधन उपलब्ध कराए. विभाग का उद्देश्य आधुनिक एवं लाभकारी खेती को बढ़ावा देना और किसानों की आय में वृद्धि करना है. इस योजना के माध्यम से किसानों को नई फसलों की खेती के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है, ताकि वे पारंपरिक खेती के साथ-साथ नकदी फसलों से भी बेहतर आमदनी अर्जित कर सकें.
किसान बोले, पहले अजीब लगा था यह विचार
किसान संदीप कुमार बताते हैं कि शुरुआत में उन्हें ड्रैगन फ्रूट की खेती का सुझाव काफी अजीब लगा था. उन्होंने कभी नहीं सोचा था कि उनकी बंजर जमीन पर इतनी महंगी और विदेशी फल की खेती सफल हो सकती है. उन्होंने कहा, "जिला भूमि संरक्षण पदाधिकारी विवेक मिश्रा के लगातार प्रयास और मार्गदर्शन से मैंने एक एकड़ बंजर जमीन पर ड्रैगन फ्रूट लगाने का निर्णय लिया. सबसे पहले जैविक खाद डालकर मिट्टी तैयार की गई, फिर पौधे लगाए गए. इस साल अच्छी फसल मिली है. पहले गांव के लोग ड्रैगन फ्रूट के बारे में ज्यादा नहीं जानते थे, लेकिन अब इसकी खेती और बाजार दोनों को लेकर लोगों की रुचि बढ़ रही है."
अधिकारी बोले, मेहनत का मिला शानदार परिणाम
जिला भूमि संरक्षण पदाधिकारी विवेक मिश्रा ने बताया कि विभाग की ओर से किसान को हर संभव तकनीकी और संसाधन संबंधी सहायता उपलब्ध कराई गई. हालांकि इस सफलता का सबसे बड़ा श्रेय किसान की मेहनत, धैर्य और समर्पण को जाता है. उन्होंने कहा कि ड्रैगन फ्रूट एक उच्च मूल्य वाली फसल है, जिसकी बाजार में अच्छी मांग रहती है. इससे किसानों को पारंपरिक फसलों की तुलना में अधिक आय प्राप्त हो सकती है. उन्होंने जिले के अन्य किसानों से भी आधुनिक और लाभकारी फसलों की खेती अपनाने की अपील की.
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दूसरे किसानों के लिए बन रहे प्रेरणा
आज संदीप कुमार का खेत लातेहार के किसानों के लिए एक मॉडल फार्म बनता जा रहा है. कई किसान उनके खेत का दौरा कर ड्रैगन फ्रूट की खेती की तकनीक, लागत और लाभ की जानकारी ले रहे हैं. यह सफलता दिखाती है कि यदि सरकारी योजनाओं का सही लाभ लिया जाए और नई तकनीकों को अपनाया जाए, तो बंजर जमीन भी समृद्धि का आधार बन सकती है. संदीप कुमार की कहानी झारखंड के उन किसानों के लिए उम्मीद की मिसाल है, जो सीमित संसाधनों के बावजूद खेती में नई संभावनाएं तलाशना चाहते हैं.
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