53 साल बाद मंडल डैम परियोजना में आयी तेजी

53 वर्ष पहले पलामू टाइगर रिजर्व के कुटकू वन प्रक्षेत्र में शुरू की गयी उत्तर कोयल जलाशय परियोजना (मंडल डैम) के निर्माण कार्य पूरा होने की एक बार फिर उम्मीद जगी है.

बेतला. झारखंड और बिहार के खेतों को पानी देने के उद्देश्य से करीब 53 वर्ष पहले पलामू टाइगर रिजर्व के कुटकू वन प्रक्षेत्र में शुरू की गयी उत्तर कोयल जलाशय परियोजना (मंडल डैम) के निर्माण कार्य पूरा होने की एक बार फिर उम्मीद जगी है. सरकार के दिशा निर्देश पर पलामू टाइगर रिजर्व प्रबंधन ने जिला प्रशासन के सहयोग से मंडल डैम क्षेत्र से विस्थापित होनेवाले सात गांवों के 780 परिवारों के पुनर्वास हेतु भूमि को चिह्नित कर उसका सर्वे कर लिया है. वहीं सर्वे रिपोर्ट को राज्य सरकार और भारत सरकार को भेजने की प्रक्रिया शुरू कर दी गयी है. विस्थापित होनेवाले गांव में लातेहार जिला के मेराल और गढ़वा जिले के कुटकू, सनेया, चेमो, भजना, खैर और खुरा का नाम शामिल है. इन गांवों में 780 परिवार हैं. पीटीआर प्रबंधन को उम्मीद है कि इस क्षेत्र के निवास करनेवाले सभी परिवारों को सफलता पूर्वक अन्य जगहों पर पुनर्वासित कर लिया जायेगा. पीटीआर प्रबंधन के अधिकारियों का दावा है कि डूब क्षेत्र के लोगों पुनर्वासित करने के लिए जिस स्थान को चिह्नित किया गया है, वह उनके लिए काफी उपयुक्त है. सभी परिवारों को दो किस्तों में 15 लाख और एक एकड़ जमीन दी जायेगी. पहली किस्त में 10 लाख और दूसरी किस्त में पांच लाख रुपये दिये जायेंगे. डूब क्षेत्र में रहनेवाले लोगों को गढ़वा के रंका प्रखंड के बिश्रामपुर के इलाके में बसाया जाना है. कुछ दिन पहले झारखंड सरकार की मुख्य सचिव अलका तिवारी के नेतृत्व में एक उच्च स्तरीय कमेटी ने मंडल डैम का जायजा लिया था. इसके बाद मंडल डैम से जुड़े विस्थापितों का मामला सुलझ गया है. तय किया गया है कि सरकार के सभी विभागों के समन्वय के साथ इस स्थल को मॉडल विलेज के रूप में विकसित किया जायेगा जहां जंगल क्षेत्र में निवास करनेवाले लोगों को आधुनिक सुख सुविधाओं का लाभ मिल सकेगा. उनके लिए इसका विशेष पैकेज भी तैयार कर लिया गया है. जानकारी देते हुए पीटीआर के डिप्टी डायरेक्टर प्रजेश कांत जेना ने कहा कि सिर्फ लोगों को जागरूक करने की होने की जरूरत है. किसी राजनीति के शिकार होने के बजाय लोगों को अपने विवेक से काम लेना चाहिये, क्योंकि यह परियोजना जहां वन और वन्य प्राणियों के लिए हितकारी है वही लोगों को भी इसका काफी लाभ मिलेगा. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने किया था शिलान्यास: 1972 में शुरू हुई और वर्षों से बंद पड़ी इस परियोजना का शिलान्यास प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पांच जनवरी 2019 को किया था. लेकिन, इस परियोजना को अपेक्षित गति नहीं मिल सकी थी. हालांकि इस दौरान वन विभाग और सिंचाई विभाग के संयुक्त प्रयास से कई अड़चनों को दूर करने का प्रयास किया गया. चतरा सांसद कालीचरण सिंह और पलामू सांसद वीडी राम की ओर से इस मामले को लेकर सक्रियता दिखाया गया है. वहीं पिछले दो दिन पहले राज्य के मुख्य सचिव के दौरा के बाद एक बार पुनः मंडल डैम ने लोगों का ध्यान अपनी और आकर्षित कर लिया है. बाघ का है कॉरिडोर एरिया: मंडल डैम के निर्माण हो जाने से पलामू टाइगर रिजर्व के बाघों और हाथियों के लिए उपयुक्त वातावरण मिल जायेगा. छत्तीसगढ़ से झारखंड आने वाले बाघों का यह इलाका कॉरिडोर है. अक्सर इन स्थलों से बाघों का आना जाना लगा रहता है. यदि गांव को पुनर्वासित कर दिया जाता है तो बाघ स्वतंत्र रूप से इस इलाके में निवास करने रहे लगेंगे. वही पर्याप्त पानी के होने से हाथियों का भी जमावड़ा लगा रहेगा.

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By Anuj singh

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