अदालत में अभिलेख नहीं, एक माह से जेल में है शिवदयाल

लातेहार. वर्ष 2006 में मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी लातेहार की अदालत द्वारा जारी एक गिरफ्तारी वारंट की तामिला कर लातेहार थाना पुलिस ने आठ वर्षो के बाद आरागुंडी ग्राम निवासी शिवदयाल उरांव को गत 20 अगस्त को मंडल कारा तो भेज दिया है. आरोपी की जमानत की याचिकाओं पर अभिलेख नहीं रहने के कारण अदालत द्वारा […]

लातेहार. वर्ष 2006 में मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी लातेहार की अदालत द्वारा जारी एक गिरफ्तारी वारंट की तामिला कर लातेहार थाना पुलिस ने आठ वर्षो के बाद आरागुंडी ग्राम निवासी शिवदयाल उरांव को गत 20 अगस्त को मंडल कारा तो भेज दिया है. आरोपी की जमानत की याचिकाओं पर अभिलेख नहीं रहने के कारण अदालत द्वारा सुनवाई नहीं की जा रही है. आरोपी पर 09.01.2000 में मंगरा ग्राम निवासी बलवंत सिंह का घर माओवादियों के साथ उड़ाने का आरोप है.

लातेहार थाना कांड संख्या 03/2000 के अनुसार उक्त मामले में कुल 73 लोगों को नामजद आरोपी बनाया गया था, जिसमें आवेदक का नाम 35 नंबर क्रमांक पर दर्ज था. थाना पुलिस द्वारा रिमांड पेश करने पर अभिलेख खोल कर उसे अदालत द्वारा रिमांड तो कर लिया गया, लेकिन एक माह बीत जाने के बाद भी अभियोजन द्वारा संबंधित अभिलेख अदालत को उपलब्ध नहीं कराया जा रहा है.

आरोपी द्वारा गत 21 अगस्त 2014 को मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी की अदालत में जमानत की याचिका प्रस्तुत की गयी, लेकिन अदालत द्वारा उक्त याचिका पर सुनवाई न करके मामला प्रधान जिला जज की अदालत में दौरा सुपूर्द कर दिया गया. सेशन अदालत ने बगैर मूल अभिलेख के उपलब्धता कराये ही मामले को सेशन जज (प्रथम) की अदालत में स्थानांतरित कर दिया. उक्त अदालत में आरोपी ने गत 11.09.2014 को पूर्व के आवेदन का हवाला देते हुए पुन: जमानत याचिका दायर की गयी, लेकिन 13 दिन के बीत जाने के बावजूद भी जमानत याचिका पर सुनवाई नहीं हो सकी है.
अदालत द्वारा बताया जा रहा है कि आरोपी का आरोप पत्र एवं प्राथमिकी अन्य अभियुक्तों के मामले की सुनवाई में संलग्न है, जिसकी पड़ताल की जा रही है. उधर, भुक्तभोगी के परिजनों का कहना है कि उक्त मामले में गांव के अधिकतर लोगों को मुद्दालय बनाये जाने के बाद तत्कालीन पुलिस अधीक्षक ने जांच करके निदरेषों को आरोप मुक्त कर दिया था, जिसमें आरोपी शिवदयाल भी मुक्त हुआ था. उन्होंने इसकी जानकारी गिरफ्तारी के लिए पहुंची लातेहार थाना पुलिस को दी, लेकिन पुलिस ने लाल वारंट का हवाला दे कर उनकी एक नहीं सुनी और जेल भिजवा दिया.
मानवाधिकार आयोग से शिकायत : जेल में बंद शिव दयाल उरांव के परिजनों ने बगैर आरोप पत्र के एक महीने से जेल में बंद करने की शिकायत मानवाधिकार आयोग एवं अनुसूचित जनजाति आयोग से किया है. परिजनों ने शिकायती पत्र में लिखा है कि पुलिस आठ वर्ष पूर्व निर्गत अदालती वारंट की बगैर जांच किये गलत ढंग से उनकी गिरफ्तारी एवं उपस्थापन किया है.

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