खास बातें
Assembly Election 2026 North Bengal: पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 के पहले चरण की वोटिंग से पहले उत्तर बंगाल की सियासत गरम है. इस बार लड़ाई केवल विकास की नहीं, बल्कि उस ‘राजबंशी’ समुदाय का दिल जीतने की है, जो उत्तर बंगाल की कम से कम 30 से 40 सीटों पर हार-जीत तय करने की ताकत रखता है.
टीएमसी के राजबंशी कार्ड ने बढ़ायी भाजपा की चिंता
भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) अपनी पकड़ बनाये रखने के लिए एड़ी-चोटी का जोर लगा रही है, तो मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने ‘राजबंशी कार्ड’ खेलकर भगवा खेमे की चिंता बढ़ा दी है. उत्तर बंगाल का यह किला किसके पास रहेगा, इसका फैसला इस बार राजबंशी समुदाय के हाथ में है.
क्यों है राजबंशी समुदाय पर दोनों दलों का फोकस?
उत्तर बंगाल के कूचबिहार, जलपाईगुड़ी, उत्तर दिनाजपुर और दार्जिलिंग जिलों में राजबंशी समुदाय की आबादी निर्णायक भूमिका में है. इस समुदाय का प्रभाव उत्तर बंगाल की लगभग आधी विधानसभा सीटों पर है.
- भाजपा का मजबूत गढ़ : वर्ष 2019 के लोकसभा और 2021 के विधानसभा चुनाव में राजबंशी समुदाय का बड़ा हिस्सा भाजपा के साथ खड़ा था. यही वजह है कि भाजपा ने इस क्षेत्र में क्लीन स्वीप जैसा प्रदर्शन किया था.
- TMC की वापसी की कोशिश : ममता बनर्जी इस बार समुदाय के सांस्कृतिक गौरव और विकास योजनाओं के जरिये खोयी हुई जमीन वापस पाने की कोशिश कर रही हैं.
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ममता का ‘सांस्कृतिक दांव’ बनाम भाजपा का ‘पहचान कार्ड’
दोनों ही दलों ने इस समुदाय को लुभाने के लिए अपनी पूरी ताकत झोंक दी है. तृणमूल कांग्रेस ने राजबंशी भाषा को मान्यता देने, अलग अकादमी बनाने और समुदाय के महापुरुषों के सम्मान में कई घोषणाएं की हैं. कूचबिहार की रैलियों में वह लगातार केंद्र पर समुदाय की उपेक्षा का आरोप लगा रही हैं.
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Assembly Election 2026 North Bengal: भाजपा भी कर रही घेराबंदी
भाजपा ने ‘नारायणी सेना’ और राजबंशी रेजिमेंट की मांग को लेकर समुदाय की भावनाओं को सहलाया है. साथ ही, निशीथ प्रमाणिक जैसे युवा राजबंशी चेहरे को आगे करके भाजपा ने अपनी पकड़ मजबूत रखने का प्रयास किया है.
अधूरे वादे और नाराजगी से बदलेगा समीकरण?
समुदाय के भीतर कुछ मुद्दों को लेकर नाराजगी भी देखी जा रही है. अलग राज्य की मांग और पहचान के मुद्दे अभी भी पूरी तरह सुलझे नहीं हैं. रोजगार और शिक्षा के अवसर राजबंशी युवाओं के लिए सबसे बड़ा सवाल हैं. नागरिकता से जुड़े मुद्दों पर समुदाय में मिली-जुली प्रतिक्रिया है, जिसका फायदा दोनों दल अपने-अपने तरीके से उठाने की कोशिश कर रहे हैं.
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2026 में किसका पलड़ा भारी?
उत्तर बंगाल के इस ‘पावर गेम’ में राजबंशी समुदाय जिस तरफ झुकेगा, बंगाल की सत्ता की राह उसी के लिए आसान होगी. फिलहाल, भाजपा अपने पुराने प्रदर्शन को दोहराने की चुनौती से जूझ रही है, जबकि तृणमूल कांग्रेस ‘मिशन उत्तर बंगाल’ के तहत सेंधमारी करने में जुटी है.
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